शुक्रवार, 8 जनवरी 2021

अदालत का आईआईटी-रूड़की के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं करने का आदेश

नैनीताल, आठ जनवरी (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पुलिस को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-रूड़की के निदेशक अजित कुमार चतुर्वेदी सहित संस्थान के तीन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं करने का आदेश दिया है। इन अधिकारियों पर संस्थान में धन के गबन के एक मामले में लिप्त होने का आरोप है। न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे ने आईआईटी-रूडकी के निदेशक चतुर्वेदी, डीन मनीष श्रीखंडे और सहायक रजिस्ट्रार जितेंद्र डिमरी के खिलाफ प्राथमिकी नही दर्ज करने का पुलिस को निर्देश देते हुए राज्य सरकार से इस मामले में तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। इससे पहले, रूडकी में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने इन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए थे। इन अधिकारियों ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। संस्थान के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने रूडकी के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक याचिका दायर करके आईआईटी रूडकी के निदेशक, डीन और सहायक रजिस्ट्रार पर संस्थान में एक करोड पांच लाख रुपये का गबन करने का आरोप लगाया था। यह सेवानिवृत्त कर्मचारी संस्थान में कर्मचारी संगठन का एक पदाधिकारी भी रह चुका है। इस मामले में विभागीय जांच के आधार पर गबन के के दोषी पाए गए वरिष्ठ सहायक धीरज उपाध्याय को बर्खास्त किये जाने के बाद मनपाल शर्मा नाम का यह व्यक्ति ने इन आरोपों के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अधिकारियों के वकील विपुल शर्मा ने दलील दी कि एक ही अपराध के लिए कई प्राथमिकियां दर्ज करना कानून के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अगर मामले में अन्य लोग भी लिप्त पाए जाते हैं तो उनके नाम प्राथमिकी में बाद में जोडे जा सकते हैं। वकील शर्मा ने यह भी कहा कि ये आरोप आधारहीन, अप्रमाणित और बिना किसी सबूत के लगाए गए हैं और प्रतिष्ठित संस्थान की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।


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