देहरादून उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और उनकी पत्नी अमृता रावत को मंगलवार को एम्स ऋषिकेश से घर भेज दिया गया। 31 मई को उन्हें एम्स में भर्ती किया गया था ।उनकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। वहीं दूसरी तरफ मंगलवार को ही मंत्री सतपाल महाराज की नर्सरी में काम करने वाले सिक्किम निवासी 75 वर्षीय माली की मौत से बवंडर मच गया है। आईसीएमआर की नई गाइडलाइंस के तहत कोई लक्षण नहीं होने पर 10 जून को रतन को डिस्चार्ज किया था। स्वास्थ्य विभाग ने माली के शव की कोरोना जांच से इंकार कर दिया। 108 एंबुलेंस भी पुलिस के बुलाने पर नहीं पहुंची। निजी एंबुलेंस भी शव ले जाने के लिए तैयार नहीं हुई। एसओ डालनवाला अमरजीत सिंह रावत ने बताया कि सोमवार सुबह माली के साथियों ने सूचना दी थी कि की नेहरूग्राम स्थित पुष्पवाटिका नर्सरी में रहने वाला माली फोन नहीं उठा रहा है। जिसके बाद जांच के लिए चीता पुलिस को भेजा गया। उन्होंने भी बाहर से काफी आवाज लगाई, लेकिन माली ने फोन नहीं उठाया। पुलिस ने दरवाजा में धक्का मारा, जिससे दरवाजा खुल गया। मंत्री के घर पर ही रहता था माली पुलिस ने देखा कि रतन बहादुर चारपाई में मृत अवस्था में पड़ा है। पुलिस ने वहां मौजूद अन्य माली से जानकारी ली तो यह पता चला कि रतन बहादुर में कुछ दिनों पहले कोरोना की पुष्टि हुई थी। लॉकडाउन में वह डालनवाला स्थित मंत्री सतपाल महाराज के घर पर ही ठहरा था। कोरोना की पुष्टि पर उसे 31 मई को दून अस्पताल में भर्ती कराया था। लक्षण स्पष्ट न होने पर रतन को चार दिन बाद सर्वे चौक स्थित तीलू रौतेली महिला छात्रावास में शिफ्ट किया गया था। 10 जून को किया गया था डिस्चार्ज आईसीएमआर की नई गाइडलाइंस के तहत कोई लक्षण नहीं होने पर 10 जून को रतन को डिस्चार्ज किया था। इस जानकारी के बाद पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग को माली के कोरोना जांच कराने के लिए कहा जबकि स्वास्थ्य विभाग ने इससे यह कहते हुए इंकार कर दिया कि माली की मृत्यु स्वाभाविक है। स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस के कहने के बावजूद एम्बुलेंस तक नहीं भेजी। मृतक माली के शव को कोई हाथ लगाने को तैयार नहीं है।
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