हरिद्वार देशभर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का कहर देखा जा रहा है। रविवार को एक लाख 70 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए। उत्तराखंड में भी कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। इस बीच हरिद्वार महाकुंभ में कोरोना के खतरे के बावजूद लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसा तब है जबकि रविवार को हरिद्वार में 400 से ज्यादा नए कोरोना केस सामने आए। हर की पौड़ी पर आज ही पहला शाही स्नान हो रहा है। इससे पहले सुबह श्रद्धालुओं ने गंगा में पवित्र डुबकी लगाई। हालांकि इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती दिखीं। कुंभ मेला आईजी संजय गुंज्याल का कहना है, 'अगर हम सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए सख्ती बरतते हैं तो भगदड़ जैसी स्थिति हो सकती है। इसलिए हम यहां सोशल डिस्टेंसिंग लागू करवाने में असमर्थ हैं। हम लगातार लोगों से कोरोना के मुताबिक व्यवहार की अपील कर रहे हैं लेकिन भारी भीड़ की वजह से चालान काटने पर अमल मुश्किल है।' आईजी संजय गुंज्याल ने बताया, 'आम जनता को सुबह 7 बजे तक स्नान करने की इजाजत दी गई। अब हर की पौड़ी को अखाड़े के साधु-संतों के स्नान के आरक्षित किया गया है।' इस बीच महाकुंभ में अगले तीन दिनों तक लगातार पड़ने वाले विशेष स्नान पर्वों पर हर की पौड़ी ब्रह्मकुंड में आम श्रद्धालु गंगा में डुबकी नहीं लगा सकेंगे । कुंभ मेला आईजी संजय गुंज्याल ने बताया कि 12 अप्रैल को महाकुंभ का सोमवती अमावस्या का दूसरा शाही स्नान, 13 अप्रैल को नव संवत्सर का स्नान और 14 अप्रैल को बैसाखी का तीसरा शाही स्नान है। इनमें सभी 13 अखाडों से जुड़े साधु संत स्नान करते हैं। उन्होंने कहा कि इन पर्वों पर हर की पौड़ी, ब्रह्मकुंड और आसपास के घाटों पर श्रद्धालुओं द्वारा स्नान नहीं किया जा सकेगा , क्योंकि वे साधु-संतों के लिए आरक्षित रहते हैं। गुंज्याल ने श्रद्धालुओं से इन विशेष स्नान पर्वों पर स्नान के लिए नीलधारा जैसे अन्य सुंदर और प्राकृतिक घाटों का उपयोग करने की अपील की। इस साल सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव के मामले रविवार को सामने आए हैं। हरिद्वार में 401 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसमें अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी सहित जूना अखाड़े के करमा गिरी और जूना अखाड़े के नितिन गिरी भी शामिल हैं। महाकुंभ में देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में सभी अखाड़ों के साधु-संत हरिद्वार में डेरा जमाए हुए हैं। कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए मेला स्वास्थ्य विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर कोरोना की टेस्टिंग की जा रही है। उसमें सभी अखाड़ों के साधु-संत भी शामिल हैं।
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