शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

विहिप ने केंद्र से लव जिहाद पर प्रभावी कानून बनाने की मांग की

हरिद्वार, नौ अप्रैल (भाषा) विश्व हिन्दू परिषद ने शुक्रवार को केन्द्र सरकार से लव जिहाद पर प्रभावी कानून बनाए जाने की मांग की।

यहां परमधाम आश्रम में आयोजित विहिप की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में विहिप ने आक्रोश प्रकट करते हुए आरोप लगाया कि लव जिहाद एक सोची समझी साजिश है, जिसके खिलाफ केन्द्र सरकार प्रभावी कानून बनाए।

विहिप के उपवेशन में उपस्थित संतों ने उत्तराखंड सरकार द्वारा अधिग्रहित मंदिरों को भी सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया।

संतों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के द्वारा मंदिरों का अधिग्रहण नहीं होना चाहिए। बैठक में इस विषय पर जनजागरण अभियान चलाने का संकल्प भी लिया गया।

इस मौके पर मौजूद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने चार धाम देवस्थानम बोर्ड के विषय में संत समाज को आश्वासन देते हुए कहा कि इस विषय पर पुनर्विचार किया जाएगा।

जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महाराज की अध्यक्षता में हुए उपवेशन की प्रस्तावना रखते हुए विहिप के महामंत्री मिलिन्द परांडे ने रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किये जाने, देश के सभी मठ-मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से बाहर करने, देश की एकता एवं अखंडता को खतरा पैदा करने वाली धर्मांतरण एवं सामाजिक विद्वेष उत्पन्न करने वाले विषयों पर चर्चा कर समाधान करने का प्रयास किए जाने संबंधी प्रस्ताव रखे।

मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा पलनीय के कार्तिकेय मंदिर के संदर्भ में भक्तों का ट्रस्ट बनाकर मंदिर में पूजा-अर्चना करने तथा उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर के परिसर में उत्खनन के आदेशों के स्वागत का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया।

अयोध्या में निर्माणाधीन भगवान श्रीराम के मंदिर की प्रगति एवं वर्तमान स्थिति के बारे में विहिप के केन्द्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय ने जानकारी दी।

पाकिस्तान से आने वाले हिन्दुओं को भारत में शरण मिलने की भी संत समाज ने जरूरत बताई और कहा कि वहां हिन्दुओं की जो दुर्दशा हो रही है वह हिन्दुत्व के ही नहीं बल्कि मानवता के लिए भी चिंता का विषय है।

बैठक में स्वामी चिदानंद मुनि, स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती आदि संतगणों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि मंदिरों का अधिग्रहण समाप्त हो, देश की भूमि पर बढ़ती जा रही कब्रगाहों, मजारों पर प्रतिबंध लगे तथा देश में मठ-मंदिरों पर सरकारी करों को समाप्त किया जाए।

बैठक में गाय और गंगा की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।



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