देहरादून उत्तराखंड की आईआईटी रुड़की ने एम्स ऋषिकेश के सहयोग से कम लागत वाला एक ऐसा पोर्टेबल वेंटिलेटर विकसित किया है, जो कोविड-19 रोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में उपयोगी साबित हो सकता है। इस अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित पोर्टेबल वेंटिलेटर को 'प्राण-वायु' नाम दिया गया है। इसकी अनुमानित निर्माण लागत 25 हजार रुपये के आसपास होगी। यह पोर्टेबल वेंटिलेटर मरीज को आवश्यक मात्रा में हवा पहुंचाने के लिए प्राइम मूवर के नियंत्रित ऑपरेशन पर आधारित है। इस पोर्टेबल वेंटिलेटर को काम करने के लिए कंप्रेस्ड हवा की जरूरत नहीं होगी। इसे अस्पताल के किसी भी वॉर्ड में या खुले में लगाया जा सकता है। अब किसी कंपनी या संस्था को वेंटिलेटर के निर्माण के लिए आगे आना होगा ताकि इसे अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके। वेंटिलेटर में ऐसी व्यवस्था भी है, जो टाइडल वॉल्यूम और प्रति मिनट सांस को नियंत्रित कर सकती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि वेंटिलेटर सांस नली के बड़े अवरोधों में उपयोगी होने के साथ ही सभी आयुवर्ग के रोगियों, खासकर बुजुर्गों के लिए विशेष लाभदायी है। प्रोटोटाइप का परीक्षण सामान्य और सांस के विशिष्ट रोगियों के साथ सफलतापूर्वक किया गया। यह तब विशेष उपयोगी हो सकता है, जब अस्पताल के किसी वॉर्ड या खुले क्षेत्र को आइसीयू में परिवर्तित करना जरूरी हो। रियल टाइम स्पायरोमेट्री और अलार्म से सुसज्जित होने के कारण यह सुरक्षित और विश्वसनीय है, जो स्वचालित रूप से एक अलार्म सिस्टम के साथ उच्च दबाव को सीमित कर सकता है। यह भी पढ़ेंः कोविड-19 रोगियों के लिए उपयोगी आईआईटी रुड़की की टिंकरिंग प्रयोगशाला के समन्वयक के अनुसार प्राण-वायु को विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के लिए डिजाइन किया गया है। यह कम लागत वाला, सुरक्षित और विश्वसनीय मॉडल है, जिसका निर्माण तेजी से किया जा सकता है। आइआइटी रुड़की के प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि वे लोग महामारी से निपटने में सरकार के प्रयासों को तेज करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कम लागत वाला यह वेंटिलेटर कोविड-19 के रोगियों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है। प्रफेसर ने कहा कि यह क्लोज्ड लूप वेंटिलेटर विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के इलाज के लिए ही डिजाइन किया गया है। इसका निर्माण भी तेजी से किया जा सकता है। देश में कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसकी ज्यादा जरूरत है।
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