मंगलवार, 28 अप्रैल 2020

राजाजी की जमीन अस्थायी तौर पर कुंभ मेला समिति को स्थानांतरित करने की तैयारी

देहरादून, 28 अप्रैल (भाषा) राजाजी बाघ अभयारण्य और नरेंद्रनगर वन प्रभाग के खाली पडे विशाल भूखंड को उत्तराखंड वन विभाग अस्थायी रूप से कुंभ मेला समिति को हस्तांतरित करने की तैयारी कर रहा है ताकि वहां श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित की जा सकें। हांलांकि, इससे पर्यावरणविदों और वन्यजीव प्रेमियों की चिंता बढ गयी है। प्रदेश के अतिरिक्त प्रमुख मुख्य वन संरक्षक डीजीके शर्मा ने बताया कि राजाजी बाघ अभयारण्य और नरेंद्र नगर वन प्रभाग की 778 हेक्टेयर जमीन को नौ माह के लिए कुंभ मेला समिति को हस्तांतरित किए जाने की अनुमति लेने के लिए केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है । इस जमीन पर श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी प्रकृति के शिविर और पार्किंग सुविधाएं विकसित की जाएगीं । उन्होंने बताया, ‘‘अगले साल जनवरी में शुरू होने वाले कुंभ मेले में करीब 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है और उनके लिए सुविधाएं विकसित करना हमारा दायित्व है। इसलिए हमने केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय से अस्थायी तौर पर कुंभ मेला समिति को जमीन हस्तांतरित करने के लिए मंजूरी मांगी है।’’ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान नियम राज्य वन विभाग को अस्थायी तौर पर 15 दिन के लिए जमीन हस्तांतरित करने की अनुमति तो देते हैं लेकिन कुंभ मेला समिति को एक सितंबर 2020 से 31 मई 2021 तक नौ माह के लिये जमीन दिये जाने के कारण केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी आवश्यक है । हांलांकि, पर्यावरणविद और वन्यजीव प्रेमी वन विभाग के इस प्रस्ताव को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और वन संरक्षण अधिनियम 1980 का उल्लंघन बताते हुए इसके जबरदस्त विरोध में हैं। इसके अलावा, इस धार्मिक मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिये सुविधाओं का निर्माण होने से वन्यजीवों का प्राकृतिक वासस्थल नष्ट होगा और वहां ध्वनि प्रदूषण और प्लास्टिक कूड़े की समस्या पैदा हो जाएगी । ऋषिकेश की युवा पर्यावरणविद रिद्धिमा पांडे ने कहा, ‘‘अधिकारियों को पर्यावरण और जंतु जगत की चिंता ही नहीं है । उनका एकमात्र एजेंडा राजस्व पैदा करना है । हर साल कांवड़ मेले के दौरान एक माह में पर्यावरण को होने वाला नुकसान किसी से छिपा नहीं है जबकि कुंभ मेला तो कहीं बडे पैमाने पर आयोजित होता है।’’ उन्होंने कहा कि मानवीय गतिविधियों के बढ़ने से राजाजी में जानवरों का प्राकृतिक वासस्थल नष्ट हो जायेगा । राजाजी में बाघों की अच्छी खासी संख्या है । पर्यावरणविदों के विरोध पर वन अधिकारी ने कहा कि बाघ अभयारण्य और वन प्रभाग के केवल कम वनस्पति वाले क्षेत्रों को कुंभ मेले के लिये दिया जाएगा और इसमें कुंभ मेला समिति द्वारा पेडों को नहीं काटा जाएगा या हरित क्षेत्र को कोई नुकसान नहीं होगा।


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