शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2021

आईआईटी रूडकी के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निचली अदालत का आदेश खारिज

नैनीताल, एक अक्टूबर (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रूड़की के निदेशक और अन्य अधिकारियों के खिलाफ गबन के एक मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से संबंधी रूड़की के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे ने निचली अदालत के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि एक मामले में दो प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती। मामला आईआईटी के कनिष्ठ अधीक्षक धीरज उपाध्याय से संबंधित है जिनके खिलाफ दिसंबर 2020 में आईआईटी प्रशासन ने ढाई करोड़ रुपये के गबन में संलिप्तता के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आईआईटी प्रशासन ने उनकी सेवाएं भी समाप्त कर दी थीं।

इसके बाद संस्थान के एक पूर्व कर्मचारी मनपाल शर्मा ने रूड़की के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक याचिका दायर कर संस्थान के निदेशक अजित चतुर्वेदी, सहायक रजिस्ट्रार जितेंद्र डिमरी और डीन मनीष श्रीखंडे के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराने का अनुरोध किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।

निचली अदालत के इस आदेश को प्राथमिकी में नामजद अधिकारियों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। बुधवार को मामले में सुनवाई के दौरान चतुर्वेदी की तरफ से पेश अधिवक्ता विपुल शर्मा ने टेलीविजन एंकर अर्नब गोस्वामी के मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश का जिक्र करते हुए दलील दी कि एक ही मामले में दो बार प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती।

शर्मा ने कहा कि मामले में आईआईटी द्वारा आरोपी के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है, ऐसे में दूसरी प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई जा सकती।



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