बुधवार, 6 मई 2020

अमनमणि त्रिपाठी: यूपी पुलिस के ऐक्शन से उत्तराखंड सरकार पर उठे सवाल

देहरादून यूपी पुलिस ने यूपी के विधायक अमनमणि त्रिपाठी को सबक सिखा दिया । अमनमणि को बिजनौर में गिरफ्तार करके सारी रात हवालात में रखा गया तो उत्तराखंड के शासन से लेकर जिलों में तैनात अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए। उत्तराखंड सरकार को इस मामले में फजीहत के बाद जवाब देते नहीं बन रहा। सरकार के शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि यूपी के विधायक अमनमणि त्रिपाठी के मामले में चूक हुई है। हम पूरी तरह से अलर्ट हैं और अलर्ट रहे हैं तभी तो प्रशासन ने अमनमणि और उनके साथियों को कर्णप्रयाग से वापस लौटाया। मामले के सार्वजनिक होने के बाद लॉकडाउन में फंसे लोगों के भी निशाने पर राज्य की मशीनरी आ गई है । वामपंथी संगठनों ने राज्य में 5 मई को दिए धरने के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री को भेजे गए 16 सूत्रीय ज्ञापन में मांग की है कि आपदा अधिनियम का उल्लंघन करने और अपने पद का दुरुपयोग करने के लिए केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ओमप्रकाश के खिलाफ कार्रवाई करे। साथ ही प्रदेश सरकार को निर्देश दिया जाए कि ओमप्रकाश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाय। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता का तर्पण बद्रीनाथ में करने के नाम पर महाराजगंज के विधायक अमनमणि त्रिपाठी को केंद्र सरकार के लॉकडाउन निर्देशों का उल्लंघन करते पाया गया था। तीन वाहनों के काफिले के साथ बिना पट खुले बदरीनाथ जाने की अनुमति उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश की ओर से दिलवाने का ज़िक्र कर प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में किया गया है। यह भी बताया जा रहा है की यूपी के दबंग विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने रात श्रीनगर लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में भी बिताई थी। यहां विधायक और साथ आए लोगों ने जमकर उत्पात मचाया। यहां तक कि गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को भी धमकाया गया। कर्मचारियों ने बताया कि बिना परमिट गेस्ट हाउस में विधायक और उनके समर्थक घुसे। परमिट मांगने पर डराने धमकाने लगे। हालांकि दूसरे दिन आने पर जब कर्मचारियों ने परमिट लाने और पुलिस को सूचना देने की बात कही तो विधायक निकलते बने। यह सवाल भी उत्तराखंड के कई दलों ने उठाना शुरू कर दिया है कि केदरनाथ धाम में जब महाराष्ट्र के नांदेड में शिविर से आए रावल बिना क्वारंटीन हुए नहीं जा सके तो विधायक को लाव-लश्कर के साथ कैसे अनुमति दी गई। बदरीनाथ के कपाट अभी खुले तक नहीं तो इस विधायक को वहां जाने की अनुमति यूपी सीएम के पिता के पितृ कार्य की आड़ लेकर कैसे दी गई । इनके लिए जिम्मेदार माने जा रहे शासन के शीर्ष अधिकारी ओमप्रकाश पर अब कार्रवाई की मांग चारों तरफ से होने लगी है लेकिन सरकार इसे एक चूक मात्र बताने पर तुली है। शासन के शीर्ष अधिकारी के संरक्षण से इस दबंग विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने यूपी से हरिद्वार जिले में प्रवेश किया। लेकिन यहां विधायक को न तो पुलिस और न ही प्रशासन ने रोका। इसके बाद विधायक देहरादून की सीमा रायवाला और ऋषिकेश पहुंचे। मगर यहां भी विधायक के काफिले को नहीं रोका गया। बात यहीं खत्म नहीं हुई विधायक दबंगई से टिहरी, फिर पौड़ी, रुद्रप्रयाग की सीमा से होते हुए चमोली जिले में दाखिल हुए। लेकिन इस बीच पुलिस बैरियर से लेकर कोरोना जांच में जुटी टीम विधायक का आदर-सत्कार करने में सरेंडर दिखी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो नियम अनुसार विधायक के खिलाफ यहां मुकदमा क्यों नहीं हुआ। लेकिन विधायक चमोली जिले में घुसे तो कर्णप्रयाग के एसडीएम ने नियम का हवाला दिया। इसके बाद तो एसडीएम ने विधायक को जबरन वापस लौटा दिया। इसकी सूचना शासन और पुलिस के उच्चाधिकारियों तक पहुंची तो मजबूरन कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद विधायक रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी, देहरादून और हरिद्वार की सीमा पर पहुंचे। लेकिन मुकदमे की कार्रवाई सिर्फ टिहरी पुलिस ने की। इससे स्पष्ट है कि अन्य ज़िलों के अफसर या तो सरेंडर दिखे या फिर कोई दूसरा कारण रहा होगा। उत्तराखंड सरकार के डीजी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार अब कह रहे हैं कि अमनमणि त्रिपाठी मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है। आगे विवेचना में यदि किसी तरह के नियम उल्लंघन की बात सामने आई तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अन्य ज़िलों में काफिला क्यों नहीं रोका गया, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। नियम जो भी तोड़ेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस सबके बावजूद ऐसे लोगों की कमी नहीं है कि जो ये मानकर चल रहे हैं कि इस मामले में लीपापोती कर सरकार जिम्मेदार शीर्ष अधिकारी को बचाने के लिए ही इस मामले को एक चूक बताने में लग गई है ।


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