पुलकित शुक्ला, देहरादून कोरोना काल में 23 सितंबर से शुरू होने वाला उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र चुनौतियों से भरा होगा। इसके लिए सरकार कई सावधानियां बरत रही है। बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने विधानसभा पहुंचकर व्यवस्थाओं को परखा। अब तक कई मंत्री और विधायक कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। कोरोना के खतरे के मद्देनजर इस बार विधायकों को कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट दिखाने के बाद ही विधानसभा में एंट्री दी जाएगी। इसके अलावा उम्र दराज विधायकों को सत्र से वर्चुअल जोड़ने की भी व्यवस्था की गई है। अन्य विधायक भी जो वर्चुअली सत्र में प्रतिभाग करना चाहते हैं वे कर सकते हैं। विधानसभा के मुख्य मंडप में 43 विधायकों के बैठने की व्यवस्था है बाकी विधायक दर्शक दीर्घा और पत्रकार दीर्घा में बैठेंगे। विधायकों के साथ किसी को भी आने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा विधायकों के विधानसभा में प्रवेश करने पर तीन जगहों पर स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन किया जाएगा। विधायकों के सवालों के लगे अम्बार गौरतलब है कि प्रदेश में कोरोना का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, विधायक सुरेश राठौर कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इससे पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बंशीधर भगत भी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। ऐसे में विधानसभा का मॉनसून सत्र आहूत करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि सरकार की ओर से व्यवस्थाएं दुरुस्त की गई है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल का कहना है कि में कई महत्वपूर्ण चर्चा होनी है। प्रश्नकाल को पूरा चलाने का निर्णय लिया गया है। अब तक 23 विधायकों की ओर से कुल 1 हजार से अधिक प्रश्न विधानसभा को मिल चुके हैं।
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