गुरुवार, 3 सितंबर 2020

उत्तराखंड: 3 साल से नहीं हुई PCS परीक्षा, हाईकोर्ट ने सरकार और आयोग से 2 हफ्तों में मांगा जवाब

पुलकित शुक्ला, नैनीताल उत्तराखंड में 2016 के बाद से नहीं कराने के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और लोक सेवा आयोग को 2 सप्ताह में जवाब दाख़िल करने के निर्देश दिए हैं। देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ये निर्देश दिए। इसके तहत कहा गया है कि 2002 में सरकार ने तय किया था की पीसीएस अफसरों की भर्ती के लिए हर साल उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को अधियाचन भेजा जाएगा। दरअसल राज्य गठन के दो दशक बाद आयोग ने मात्र परीक्षाओं का आयोजन किया है। वहीं पिछली पीसीएस परीक्षा 2016 में कराई गई थी। सरकार और आयोग ने कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। मामले में सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि कुमार मलिमथ और न्यायमूर्ति रमेश खुल्बे की खंडपीठ ने सरकार और आयोग को 2 सप्ताह में जवाब दाख़िल करने के निर्देश दिए हैं। हजारों युवा करते हैं कोचिंगअफसर बनने का सपना लिए हर साल हजारों युवा पीसीएस की परीक्षा का इंतजार करते हुए कोचिंग लेते हैं। लेकिन परीक्षा ना होने से उन्हें निराश हाथ लगती है। प्रदेश में पीसीएस अफसरों की भारी कमी है। कई अधिकारी ऐसे हैं जिन पर अनेकों प्रभार हैं। इसकी वजह से ना सिर्फ सरकारी कामकाज प्रभावित होता है बल्कि बेरोजगार युवाओं में लिए रोज़गार के दरवाज़े खुलने से रह जाते हैं। युवाओं को है बेसब्री से इंतजार देहरादून के एक कोचिंग सेंटर में पीसीएस की तैयारी करने वाले युवा अंकित नेगी का कहना है कि सरकार को पीसीएस की परीक्षा आयोजित करानी चाहिए। लोक सेवक बनने के लिए तैयारी कर रहे हजारों युवा इसका इंतजार कर रहे हैं। एक अन्य अभ्यर्थी प्रियंका भारद्वाज ने कहा कि पीसीएस की परीक्षा को लंबा समय गुजर गया है। इसकी तैयारी में जुटे युवा सालों से इंतजार कर रहे हैं और सरकार को जल्द से जल्द परीक्षा करानी चाहिए।


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