बुधवार, 13 नवंबर 2019

हरीश रावत 14 नवंबर को करेंगे ऋषिकेश के टिहरी डैम मुख्यालय में सांकेतिक उपवास

देहरादून के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि केंद्र और राज्य सरकार को बेचने की साजिश रच रही है। हरीश रावत ने इसके खिलाफ 14 नवंबर को ऋषिकेश के टिहरी डैम मुख्यालय में उपवास करने का भी ऐलान किया है और लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर हरीश रावत ने लिखा है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सरकारी उपक्रमों और संस्थाओं की नींव डालकर आज के भारत के निर्माण की इमारत खड़ी की और दूसरी तरफ आज की सत्ता सरकारी उपक्रमों को एक-एक कर पूंजीपतियों के हाथ में बेच रही है। अब उत्तराखंड के सपनों का सागर टिहरी सागर को भी बेचा जा रहा है। हमारा नारा है, नेहरू के सपनों को मिटने नहीं देंगे। उत्तराखंड की संपत्तियों को बिकने नहीं देंगे। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा, 'नेहरू जी () के जन्मदिन पर टिहरी डैम को को बेचे जाने की साजिश के खिलाफ सांकेतिक उपवास उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।'


from Uttarakhand News in Hindi, Uttarakhand News, उत्तराखंड समाचार, उत्तराखंड खबरें| Navbharat Times https://ift.tt/350dBNL

अयोध्या पर उच्चतम न्यायालय का फैसला स्वर्णाक्षरों में लिखा जाने वाला : योगी

ऋषिकेश, 13 सितम्बर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या मसले पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय को विश्व इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाने वाला बताते हुए कहा बुधवार को कहा कि अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा । यहां जौलीग्रांट स्थित स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत के बाद मीडिया से बातचीत में योगी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि अयोध्या में अब भव्य मंदिर का निर्माण होगा। योगी ने कहा कि 500 वर्षों से लंबित इस मामले को उच्चतम न्यायालय ने सर्वसम्मति से सुलझाया है। इस मामले पर फैसला सुनाते हुए इसे 50 मिनट में निपटा देना न्यायपालिका और लोकतंत्र के प्रति दुनिया और देश के विश्वास को और पुष्ट करता है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में जन भावनाओं के अनुरूप भगवान श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण होगा जो शांति और सदभाव की मिसाल होगा।


from Uttarakhand News in Hindi, Uttarakhand News, उत्तराखंड समाचार, उत्तराखंड खबरें| Navbharat Times https://ift.tt/2XbkuJi

उत्तराखंड: सीएम रावत की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में लिए गए कई निर्णय

देहरादून उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संपन्न मंत्रिमंडल की बैठक में बुधवार को कई मामलों में निर्णय किए गए। बैठक में भारतीय वनअधिनियम 1927 में संशोधन के अंतर्गत उत्तराखंड राज्य ने उपसमिति का गठन करने का निर्णय किया गया। इस समिति में विभागीय मंत्री , अध्यक्ष, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय होंगे। समिति अपनी रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत करेंगी। मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार उपनल आउटसोर्सिंग, कार्मिक के यात्रा भत्ता में जीएसटी लागू हो जाने के कारण सर्विस चार्ज नहीं लिया जाएगा। इस बैठक में वैट और केन्द्रीय ब्रिकी कर सेस जमा करने के लिए अलग खाता, नया शीर्षक सृजित किया गया। मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार राज्य में आपदा नियंत्रण हेतु आपदा संवेदनशील भवनों के लिये 3 करोड़ 73 लाख का बजट आवंटन किया जाएगा। उच्च भूकंप न्यूनीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत एकीकृत सुरक्षा कार्यक्रम बनाने और सामुदायिक रेडियो स्टेशन की अनुदान राशि 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने का भी निर्णय मंत्रिमंडल ने लिया। राज्य अधीन डी.एम.एम.सी. का विलय यू.एस.डी.एम.ए. के पदों में करने का भी निर्णय लिया गया। इन निर्णयों समेत कुल 27 मामलों पर मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है।


from Uttarakhand News in Hindi, Uttarakhand News, उत्तराखंड समाचार, उत्तराखंड खबरें| Navbharat Times https://ift.tt/2rGxFX6

आइएएस अकादमी में तीरंदाजी का कोर्स

देहरादून, 13 नवंबर :भाषा: मसूरी स्थित प्रतिष्ठित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में सिविल सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों के लिये पहली बार, आज से तीन दिन का तीरंदाजी कोर्स शुरू हुआ । सिविल सेवा के प्रशिक्षणार्थियों को एकाग्रता बनाने और भविष्य की जिम्मेदारियों के बारे में तैयार होने में मदद करने के मकसद से यह कोर्स शुरू किया गया है। तीन बार के राष्ट्रीय तीरंदाजी चैंपियन और इस कोर्स का संचालन करने वाले दिनेश भील ने बताया कि यह पहली बार है जब आइएएस, आइपीएस और आइएफएस प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अकादमी में तीरंदाजी का कोर्स चलाया जा रहा है । भील ने बताया कि प्रशिक्षणार्थियों को इस खेल की मूल बातें सिखायी जा रही हैं जिससे उन्हें बेहतर नतीजों के लिये धैर्य रखने और लक्ष्य पर ध्यान लगाने में सहायता मिले । गुजरात में स्पोर्ट्स अथारिटी आफ इंडिया के तीरंदाजी कोच भील ने कहा कि हांलांकि, तीरंदाजी की मूल बातें सीखने के लिये कम से कम छह माह की जरूरत है लेकिन केवल तीन दिनों की इस बहुत छोटी अवधि में भी प्रशिक्षुओं को यह सिखाया जायेगा कि चुनौतीपूर्ण स्थितियों में भी कैसे शांत रहा जा सकता है और बेहतर एकाग्रता और ध्यान लगाकर सर्वश्रेष्ठ नतीजे हासिल किये जा सकते हैं ।


from Uttarakhand News in Hindi, Uttarakhand News, उत्तराखंड समाचार, उत्तराखंड खबरें| Navbharat Times https://ift.tt/2X9pq1k

मंगलवार, 12 नवंबर 2019

बेड के नीचे छिपा था तेंदुआ, दहाड़ सुन परिवार के उड़े होश

देहरादून सोचिए कोई जंगली जानवर आकर आपके बेड के नीचे छिप जाए। जब आप आराम से बैठे हों, तब आपको उसकी आहट सुनाई दे तो आपका और आपके परिवार का क्या हाल होगा, इसकी कल्पना ही की जा सकती है। ऐसा ही कुछ देहरादून के काल्सी फॉरेस्ट डिविजन के एक घर में मंगलवार सुबह हुआ। मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों को तेंदुए को पकड़ने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। जावनरों को ट्रैंक्युलाइज करने में एक्सपर्ट और पशु चिकित्सक अदिति शर्मा ने बताया, ' डबल बेड के नीचे छिपा था, जिस वजह से उसे पकड़ने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। यह एक आठ महीने का नर शावक था और बेहद डरा हुआ था। ऐसे में वह परिवार पर हमला भी कर सकता था।' मोहम्मद अख्तर का परिवार मंगलवार सुबह नमाज के लिए गया हुआ था। उसी वक्त यह तेंदुआ उनके घर में घुस आया। उन्होंने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया से बताया, 'हमें जरा सा भी अंदाजा नहीं था कि हमारे बेडरूम में तेंदुआ है। हमने जब उसकी सुनी तब हम चौंके। तभी पड़ोसियों ने भी बताया कि उन्होंने एक जानवर को घर के अंदर जाते देखा था। इसके बाद हमारे रोंगटे खड़े हो गए।' किचन के रास्ते घर में घुसा था तेंदुआ फॉरेस्ट रेंजर एडी सिद्दीकी ने बताया कि उनकी टीम को सुबह 6 बजे इसकी सूचना मिली। मौके पर तुरंत टीम भेजी गई, जिसने उसे पकड़ने का काम शुरू किया। सिद्दीकी ने कहा, 'हमें उसे पकड़ने में करीब 3-4 घंटे लगे। पड़ोसियों ने बताया कि वह किचन के रास्ते घर में घुसा था। इसके बाद वह बेडरूम में गया और बेड के नीचे छिप गया।' तेंदुए को सफलतापूर्वक पकड़ने के बाद वन विभाग की टीम ने उसे जंगल में छोड़ दिया।


from Uttarakhand News in Hindi, Uttarakhand News, उत्तराखंड समाचार, उत्तराखंड खबरें| Navbharat Times https://ift.tt/2KhQ4zN

उत्‍तराखंड की इस विलुप्‍त होती भाषा को बचाने में वॉट्सऐप बना मददगार

इशिता मिश्रा, देहरादून दीवान सिंह गर्ब्‍याल केा अकसर अपनी बात लोगों को समझाने में मेहनत करनी पड़ती है। के उनके शहर धारचूला में गिनती के लोग ही उनकी भाषा समझ पाते हैं। 84 साल के दीवान सिंह प्राचीन स्‍थानीय समुदाय के सबसे उम्रदराज लोगों में से एक हैं। 'रंग' नामके इस समुदाय की मातृभाषा '' कहलाती है। इस प्राचीन भाषा की कोई लिपि नहीं है यह सिर्फ बोलने के जरिए ही चलन में है। दीवान सिंह की ही तरह दिल्‍ली के जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय (जेएनयू) में भाषा की प्रफेसर संदेशा रायापा गर्ब्‍याल भी इस समस्‍या से परेशान हैं। वह भी रंग समुदाय की हैं, लेकिन रंग समुदाय पर छपे एक लेख को पढ़ने के बाद वह इतनी व्‍याकुल हुईं कि उन्‍होंने इस भाषा को फिर से जीवित करने का बीड़ा उठा लिया। और सोशल मीडिया पर आए लोग संदेशा कहती हैं, 'उस लेख में रंग समुदाय और उनकी संस्‍कृति के बारे में गलत तथ्‍य दिए हुए थे। ऐसे पलों में हमें दस्‍तावेजों की अहमियत का अहसास होता है।' इसके बाद संदेशा ने समुदाय के दूसरे लोगों से आपस में जुड़ने की अपील की। जल्‍द ही कई वॉट्सऐप ग्रुप बन गए जहां लोग लोग रंगलो भाषा में ऑडियो रिकॉर्डिंग पोस्‍ट करने लगे। कुछ लोग ट्विटर और फेसबुक पर रंगलो में पोस्‍ट लिखने लगे। कहानियां, कविताएं, गाने होते हैं पोस्‍ट धारचूला के एक व्‍यवसायी हैं कृष्‍ण गर्ब्‍याल, वह चार वॉट्सऐप ग्रुप चलाते हैं जिनमें कुल मिलाकर 1,000 सदस्‍य हैं। ये लोग रंगलो में कहानियां, कविताएं और गाने पोस्‍ट करते हैं। कृष्‍ण कहते हैं, 'हम भाषा सिखाने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए इसका अभ्‍यास तो होता ही है कोई संदेह भी हो तो वह भी दूर हो जाता है। यह एक ऐसी कक्षा की तरह है जहां हर व्‍यक्ति शिक्षक और छात्र दोनों है।' एक और वॉट्सऐप ग्रुप की संस्‍थापक हैं वैशाली गर्ब्‍याल (22)। वैशाली को पता है कि यह कितना मुश्किल काम है। वह कहती हैं, 'मेरे 16 साल के भाई को रंगलो बिल्‍कुल नहीं आती। अगर इन ग्रुपों की कोशिश से कुछ लोगों में ही सही पर रंगलो सीखने की चाह पैदा होती है तो हमारा मकसद पूरा हो जाएगा।' कुल 10,000 सदस्‍य बचे हैं इस समुदाय में रंग कल्‍याण संस्‍थान के अध्‍यक्ष बीएस बोनल कहते हैं, 'रंग समुदाय में करीब 10, 000 सदस्‍य हैं जिनमें से अधिकांश उत्‍तराखंड के पिथौरागढ़ जिले और नेपाल के कुछ हिस्‍सों में रहते हैं।' भारत में रंग को भोटिया जनजाति की उप जाति के रूप में अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला हुआ है। बोनल की उत्‍पत्ति को एक किंवदंती से जोड़ते हुए बताते हैं, 'जब पांडव हिमालय यात्रा पर थे तो वे कुटी गांव पहुंचे जहां रंग कबीले ने उनका स्‍वागत किया था। उनकी मां कुंती के नाम पर ही गांव का नाम कुटी पड़ा।' कोई लिपि न होना बड़ी चुनौती साल 2018 में ओएनजीसी ने रंगलो के संरक्षण के लिए रायापा के प्रोजेक्‍ट को फंड दिया था। किसी भी भाषा के संरक्षण में सबसे बड़ी समस्‍या होती है उसका लिपिबद्ध न होना। लेकिन लिपि तैयार करना भी आसान नहीं है। रायापा कहती हैं, 'पहली चुनौती है इस भाषा के लिए लिपि का चुनाव। इसके बाद समुदाय के लोगों से बात करके इसका शब्‍दकोश तैयार करना है। युवा लोग इसे रोमन में लिखने की मांग कर रहे हैं जबकि बुजुर्ग इसे देवनागरी लिपि में तैयार करने पर जोर दे रहे हैं। लेकिन लोग फिलहाल दोनों तरीकों का इस्‍तेमाल कर रहे हैं।'


from Uttarakhand News in Hindi, Uttarakhand News, उत्तराखंड समाचार, उत्तराखंड खबरें| Navbharat Times https://ift.tt/2Xe9g6P

हरिद्वार में कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर उमड़े श्रद्धालु

तीर्थनगरी हरिद्वार में पर गंगाघाटों पर स्नानार्थियों की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देख हर की पैड़ी समेत शहर भर में पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की हुई थी। में भी कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर त्रिवेणी घाट सहित लक्ष्मण झूला स्वर्ग आश्रम और अन्य गंगा तटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं ने आस्‍था की डुबकी लगाई। सर्दी के बावजूद बाहर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां गंगा स्नान के लिए पहुंचे । कार्तिक पूर्णिमा का स्नान गंगा स्नान में विशेष माना जाता है। तड़के से ही हरिद्वार में आस्था के वशीभूत लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। बीती रात से ही पूर्णिमा का पुण्यकाल शुरू हो गया था। इसलिए सोमवार से ही लोग हरिद्वार पहुंचने लगे थे। रात भर से लोग हरकी पैड़ी की ओर बढ़ते रहे। ब्रह्म मुहूर्त से स्नान शुरू हुआ। दिन चढ़ने के साथ भीड़ बढ़ने लगी। स्नान के चलते हरकी पैड़ी, सर्वानंद घाट, बिरला घाट, लवकुश घाट, विश्वकर्मा घाट, प्रेमनगर आश्रम घाट आदि घाटों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा रहा। सनातनी मान्यता के अनुसार श्रद्धालुओं ने गंगा पूजन और गंगा अभिषेक भी किया। स्नान के बाद हरिद्वार के मंदिरों के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी।


from Uttarakhand News in Hindi, Uttarakhand News, उत्तराखंड समाचार, उत्तराखंड खबरें| Navbharat Times https://ift.tt/2NENTbQ