बिहार के सीतामढ़ी जिले की रहने वाली शैल देवी की कहानी संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता की मिसाल है. पति की बीमारी और फिर उनकी मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट टूट पड़ा, लेकिन शैल देवी ने हार मानने के बजाय खेती को ही अपनी ताकत बना लिया. जीविका समूह से मिले सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने आधुनिक तकनीकों से खेती शुरू की और आज महज 10 कट्ठे जमीन में सब्जियों की मिश्रित खेती और पशुपालन के जरिए सालाना 5 से 6 लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं. उनकी यह सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है. रिपोर्ट- भरत कुमार चौबे
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