बुधवार, 22 दिसंबर 2021

उत्तराखंड में ओमीक्रोन का पहला मामला सामने आया

देहरादून, 22 दिसंबर (भाषा) उत्तराखंड में कोरोना वायरस के नये स्वरूप ओमीक्रोन से संक्रमण का पहला मामला देहरादून में सामने आया है।

उत्तराखंड की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉक्टर तृप्ति बहुगुणा ने बताया कि हाल में स्कॉटलैंड से लौटी एक 23 वर्षीया महिला के नमूने की जांच में उसके ओमीक्रोन से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है।

उन्होंने बताया कि देहरादून के कांवली रोड निवासी महिला आठ दिसंबर को स्कॉटलैंड से दिल्ली लौटी थी जहां हवाई अड्डे पर की गयी उसकी आरटी-पीसीआर जांच निगेटिव आयी थी। उसी दिन महिला शाम को कार से अपने माता—पिता के साथ देहरादून पहुंची जिसके बाद 12 दिसंबर को दोबारा की गयी जांच में उसके ओमीक्रोन से संक्रमित होने की पुष्टि हुई।

डॉक्टर बहुगुणा ने बताया कि महिला को गृह-पृथकवास में रखा गया है जहां उसे मेडिकल किट उपलब्ध करा दी गयी है। उससे संबंधित प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।

जिला सर्विलांस इकाई द्वारा महिला की लगातार निगरानी की जा रही है। उसके माता—पिता के नमूने भी जांच और जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं।



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कांग्रेस नेता हरीश रावत का संगठन पर असहयोग का आरोप, सियासी हलकों में मचा हडकंप

देहरादून, 22 दिसंबर (भाषा) अगले साल की शुरूआत में प्रस्तावित उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस महासचिव हरीश रावत ने बुधवार को यह कहते हुए सियासी हलकों में हडकंप मचा दिया कि पार्टी संगठन उनके साथ कथित तौर पर असहयोग कर रहा है और उनका मन सब कुछ छोडने को कर रहा है।

प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने ट्वीट किया, ‘‘ है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है ।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं और जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत, अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिए, अब विश्राम का समय है ।’’

हांलांकि, रावत ने कहा, ‘‘फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है कि "न दैन्यं न पलायनम्" । बड़ी उहापोह की स्थिति में हूं, नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे ।’’

जब इस ट्वीट के बारे में रावत के मीडिया सलाहकार सुरेंद्र कुमार से संवाददाताओं ने पूछा तब उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर की कुछ ताकतें उत्तराखंड में पार्टी की संभावनाओं को प्रभावित करने के लिए भाजपा के हाथों में खेल रही हैं ।

उन्होंने कहा, ‘‘उत्तराखंड में हरीश रावत का कोई विकल्प नहीं है । वह प्रदेश में सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं जिन्होंने पार्टी के झंडे को उठाकर रखा है । लेकिन कुछ ताकतें राज्य में कांग्रेस की सत्ता में वापसी की संभावनाओं को समाप्त करने के लिए भाजपा के हाथों में खेल रही हैं ।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या रावत की परेशानी का संबंध उत्तराखंड में पार्टी मामलों के प्रभारी देवेंद्र यादव से संबंध है, कुमार ने कहा, ‘‘देवेंद्र यादव हमारे प्रभारी हैं । उनकी भूमिका पंचायती प्रमुख की है । लेकिन पंचायती प्रमुख अगर पार्टी कार्यकर्ताओं के हाथ बांधना शुरू कर देंगे और पार्टी की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाएंगे, तो हाई कमान को इसका संज्ञान लेना चाहिए ।’’

यादव और हरीश रावत के एक दूसरे से अच्छे संबंध नहीं बताए जाते हैं । जहां रावत समर्थकों का कहना है कि 2022 विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में लडे़ जा रहे हैं वहीं यादव यह कहते रहे हैं कि आगामी चुनाव पार्टी सामूहिक नेतृत्व में लडेगी ।



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डिजिटल, सोशल मीडिया भारत में अभी उभर रहे हैं: जोशी

देहरादून, 22 दिसंबर (भाषा) जाने माने गीतकार प्रसून जोशी ने बुधवार को कहा कि भारत में डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफार्म अभी उभर रहे हैं और उन्हें देश हितों को सर्वोपरि रखते हुए ईमानदारी से काम करना चाहिए ।

जोशी ने यहां 'नवभारत नवनिर्माण मंच-उत्तराखंड’ कार्यक्रम में डिजिटल रूप से हिस्सा लेते हुए कहा, ‘‘डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफार्म देश में शुरूआती दौर में हैं । इसके बारे में हमें बस यह सावधानी रखनी होगी कि हम अपनी अंतरात्मा की आवाज को न छोडें और अन्य किसी भी चीज के ऊपर अपने देश के हितों को रखें ।’’

लोगों द्वारा उन्हें 'भक्त' कहे जाने पर जोशी ने कहा कि इसका उन पर कोई प्रभाव नहीं पडता । उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने आलोचकों को गंभीरता से सुनना चाहिए लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हम वह करना बंद कर दें जो हमें सही लगता है।’’

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष जोशी ने ओटीटी प्लेटफार्म के बारे में कहा कि उन्हें अपनी सामग्री के बारे में स्व-नियमन का पालन करने को कहा गया है । उन्होंने कहा कि ओटीटी प्लेटफार्म पर दिखाई जा रही सामग्री से लोगों की भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए ।

यह पूछे जाने पर कि अपने गृह राज्य 'उत्तराखंड' का जिक्र होने पर वह कैसा महसूस करते हैं, गीतकार ने कहा कि इससे उन्हें चमोली और टिहरी की पहाड़ियों में बिताए अपने बचपन की याद आती है ।

उन्होंने कहा कि यह कहना गलत होगा कि उनके बचपन से अब तक वहां कोई विकास नहीं हुआ है । उन्होंने कहा, ‘‘ विकास हुआ है । लेकिन पहाडों में चुनौतियां अलग हैं। यहां पर्याप्त अवसर नहीं हैं । उन्हें राष्ट्रीय मुख्यधारा में लाने की जरूरत है।’’

अपनी सृजन यात्रा के बारे में बात करते हुए जोशी ने कहा कि वह भी मुंबई आजीविका की तलाश में आए थे ।

प्रकृति से निकटता के कारण पह़ाडी क्षेत्रों के लोगों का स्वभाव संवेदनशील होने की बात कहते हुए जोशी ने कहा कि वे लोग संगीत, कविता और फिल्म निर्माण में बेहतर कैरियर बना सकते हैं ।

इस संबंध में उन्होंने रचनात्मक कलाओं में लोगों का कौशल और निखारने के लिए उत्तराखंड में एक संचार संस्थान की स्थापना पर भी बल दिया ।

जोशी ने इस मौके पर हाल में अपनी पत्नी तथा 12 अन्य के साथ तमिलनाडु में एक हैलीकॉप्टर हादसे में मारे गए देश के प्रथम प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को श्रद्धांजलि दी और उन्हें 'उत्तराखंड का गौरव' बताया ।

दिवंगत जनरल रावत उत्तराखंड के पौडी जिले के सैण गांव के रहने वाले थे ।



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Dhami Tweet: BJP नेता बग्गा ने धामी का क्रिकेट खेलते Tweet किया वीडियो, लोग लेने लगे मजे

देहरादून बीजेपी नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का एक वीडियो ट्विटर (Twitter) पर ट्वीट किया है। बग्गा ने वीडियो का कैप्शन धामी में दम है लिखा। वीडियो में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी क्रिकेट मैच खेलते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में पुष्कर सिंह धामी बल्लेबाजी कर रहे हैं। वीडियो पर लोगों ने बड़े मजेदार कमेंट किए हैं। आइए देखते हैं वो कमेंट... हिंदुस्तानी यूजर ने लिखा- वीडियो पर न जाएं, बात किसी और कॉन्टेक्स्ट में कही गयी है। हर हर बग्गा घर घर मग्गा। गौरव शर्मा नाम के ट्वीटर यूजर ने लिखा- इतना दम है कि हर गांव में अब रोड, मेडिकल व्यवस्था और स्कूल खुल गए। लोगों की जिंदगी में चार चांद लग गए। शफाक खान यूजर ने धामी की हाथ में प्लास्टर चढ़ाए एक फोटो शेयर करते हुए कमेंट लिखा- एक चौका लगाएं तो हाथ पर प्लास्टर चढ़ गया... छक्का लगाने पर कहां प्लास्टर चढ़ेगा? हेमंत पाठक ने लिखा- करीब 6 माह पहले मुख्यमंत्री बने धामी जी की बॉडी लैंग्वेज बता रही है कि वो सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कम समय में एक सधी हुई पारी खेल कर अपनी टीम को विजय दिलाना उनकी बैटिंग में साफ देखा जा सकता है। उमा शंकर शर्मा ने लिखा- धामी जी ऐसे ही आप और कांग्रेस को उत्तराखंड से उड़ा दो देवेश नाम के यूजर ने लिखा- पप्पू होता तो छक्का मारता एक अन्य यूजर ने ये लिखा-


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वो कौन शख्स हैं, जिसे लेकर हरीश रावत ने फूंक दिया बगावत का बिगुल

चंडीगढ़ साल 2022 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब समेत सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस जहां यूपी और उत्तराखंड में फिर से सत्ता पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है तो वहीं पंजाब में खुद के नेताओं के बगावती तेवर से कांग्रेस डगमगा रही है। बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने खुलकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आखिर वो कौन सा शख्स है, जिसे लेकर हरीश रावत ने कांग्रेस के खिलाफ बगावती तेवर अख्तियार कर लिया है? हरीश रावत को कांग्रेस ने जब पंजाब का प्रभारी बनाया तो उन्होंने नाराज होकर घर बैठे नवजोत सिंह सिद्धू को सक्रिय कर दिया। सिद्धू के सक्रिय होते ही कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिद्धू की झगड़े की शुरुआत हो गई। मामले को शांत करने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धू को पंजाब का अध्यक्ष भी बनाया, लेकिन इसके बाद भी मामला शांत नहीं हुआ। वहीं, हरीश रावत की ओर से अमरिंदर और सिद्धू का मामला हैंडल न कर पाने की वजह से कांग्रेस हाईकमान नाराज हो गया और उनकी जगह पर हरीश चौधरी को पंजाब की जिम्मेदारी दे दी गई। हरीश चौधरी राजस्थान सरकार में मंत्री रहे हैं। हरीश चौधरी के पंजाब प्रभारी बनाए जाने के बाद हरीश रावत काफी नाराज दिखाई देने लगे। रावत कभी खुलकर तो कभी दूसरे मुद्दों को लेकर अपनी ही पार्टी को घेरने लगे। हरीश रावत ने खुलकर कभी हरीश चौधरी का विरोध नहीं किया, लेकिन कई मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी के खिलाफ हरीश रावत नजर आए। बुधवार को हरीश रावत ने कई ट्वीट कर खुलकर बगावत का बिगुल फूंक दिया। एक ट्वीट में हरीश रावत ने लिखा- सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं। जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि #हरीश_रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है! वहीं, बीजेपी नेता और उत्तराखंड के पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने एनबीटी से बात करते हुए कहा कि हरीश रावत जी हमारे बड़े भाई हैं। वे कांग्रेस के बड़े नेता हैं। उत्तराखण्ड में सीएम रहे, केंद्र में मंत्री रहे, लेकिन आज जिस तरह से कांग्रेस में उनकी हालत दिख रही है और जो वे बयां कर रहे हैं, उससे लगता है कि कांग्रेस की हालत ठीक नहीं है। कांग्रेस बीमार हालत में है और अपने आप में उनका बिखराव है। तीरथ सिंह रावत ने कहा कि जो अपने बड़े नेता का सम्मान न कर पाए वह और का क्या सम्मान करेंगे, वह जनता को क्या इज्जत दे पाएंगे। वे उत्तराखंड या देश का क्या भला कर पाएंगे? बीजेपी नेता ने कहा कि कांग्रेस में बुरी तरह बिखराव साफ दिखता है। इसका लाभ निश्चित तौर पर बीजेपी को मिलेगा और बीजेपी फिर अपना परचम लहराएगी। एनबीटी के यह पूछने पर कि हरीश रावत ने कांग्रेस के अंदर मगरमच्छों का जिक्र किया है, कौन हैं ये मगरमच्छ? तीरथ सिंह रावत ने कहा कि ये उनका अंदरूनी मामला है। ये तो वही बता सकते हैं, लेकिन अगर हरीश रावत को ये लगता है तो उन्हें उनके नाम भी बता देने चाहिए।


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कांग्रेस नेता हरीश रावत का पार्टी संगठन पर असहयोग का आरोप

देहरादून, 22 दिसंबर (भाषा) अगले साल की शुरूआत में प्रस्तावित उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस महासचिव हरीश रावत ने बुधवार को पार्टी संगठन पर असहयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका मन सब कुछ छोड़ने को कर रहा है ।

प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष रावत ने एक ट्वीट किया, ‘‘ है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है ।’’

उन्होंने लिखा, ‘‘जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं । मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत, अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिए, अब विश्राम का समय है ।’’

हांलांकि, रावत ने कहा , ‘‘फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है कि "न दैन्यं न पलायनम्"। बड़ी उपापोह की स्थिति में हूं, नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे ।’’



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Harish Rawat: पंजाब संभालते-सभालते बागी क्यों हो गए हरीश रावत?

देहरादून दिसंबर का महीना और बढ़ती ठंड जहां एक ओर लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर रही है तो वहीं दूसरी ओर सियासी गलियारों में माहौल गरम है। बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं उत्तराखंड के पूर्व सीएम ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर सियासी गर्मी बढ़ा दी है। हालांकि, यह हरीश रावत की ओर बगावती तेवर पहली बार नहीं दिया है। हरीश रावत को जब से पंजाब की कमान मिली है, तब से उनके बगावती तेवर दिखाई दे रहे हैं। बगावती तेवर के चलते हरीश रावत को पंजाब प्रभारी के पद से भी कांग्रेस को हटाना पड़ा था। आखिर ऐसा क्यों हैं कि हरीश रावत पंजाब संभालते-संभालते बागी हो गए हैं? साल 2022 में यूपी, उत्तराखंड और पंजाब सहित सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस का फोकस प्रमुख तीन राज्यों में है। इसमें यूपी, उत्तराखंड और पंजाब है। उत्तराखंड में जहां बीजेपी जीत के लिए तीन बार अपने सीएम बदल चुकी है तो वहीं माना जा रहा था कि कांग्रेस हरीश रावत के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी, लेकिन जब हरीश उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया गया तो अटकलों का दौर शुरू हो गया। वहीं, पंजाब देखते-देखते अचानक से हरीश रावत के बगावती वाले बयान आने लगे हैं। हरीश रावत की नाराजगी की वजह हरीश चौधरी को पंजाब का प्रभारी बनाए जाना माना जा रहा है। हरीश रावत कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिद्धू की लड़ाई को संभाल नहीं पाए थे। इससे कांग्रेस हाईकमान उनसे नाराज हो गया था और उनकी जगह पर हरीश चौधरी को जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद से हरीश रावत की नाराजगी उनके बयान में देखी जाती रही है। पंजाब प्रभारी बनते ही हरीश रावत ने नवजोत सिंह सिद्धू को सक्रिय किया था। साथ ही हरीश रावत ने सिद्धू को पंजाब में कांग्रेस का भविष्य बताया था। इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच लड़ाई शुरू हो गई। जब अमरिंदर और सिद्धू का मामला ज्यादा बढ़ा तो हरीश रावत से कांग्रेस हाईकमान नाराज हो गया। इसी के चलते हरीश रावत की जगह हरीश चौधरी को कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब की जिम्मेदारी दे दी। ये फैसला हरीश रावत को अंदर ही अंदर पंसद नहीं आया और हरीश रावत के बगावती तेवर दिखाई देने लगे। हरीश रावत के बगावती बयान अक्सर सामने आते रहे हैं, लेकिन बुधवार को रावत ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर बगावत को पूरी तरह से साफ कर दिया। पूर्व सीएम ने ट्वीट कर लिखा, 'है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। जिस समुद्र में तैरना है।' हरीश रावत यही नहीं रुके। इसके बाद उन्होंने कई ट्वीट किए।


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