गुरुवार, 23 सितंबर 2021

उत्तराखंड : ‘शक्तिमान’ प्रकरण में कैबिनेट मंत्री जोशी बरी

देहरादून, 23 सितंबर (भाषा) पांच साल पहले एक रैली के दौरान उत्तराखंड पुलिस के घोडे़ शक्तिमान के घायल होने के मामले में आरोपी प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को देहरादून की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को बरी कर दिया।

देहरादून के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्ष्मण सिंह ने मामले में कोई पुख्ता प्रमाण न होने के आधार पर जोशी तथा अन्य आरोपियों को बरी कर दिया।

वर्ष 2016 में राज्य की तत्कालीन कांग्रेस सरकार की नीतियों के खिलाफ भाजपा की रैली के दौरान शक्तिमान की एक टांग टूट गई थी। काफी उपचार के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका था।

मामले में पुलिस ने जोशी के खिलाफ अन्य अधिनियमों के अलावा पशु क्रूरता अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया था।

अदालत से बरी होने के बाद जोशी ने कहा कि वह शुरू से ही कहते आ रहे हैं कि वह इस मामले में दोषी नहीं हैं और आज सत्य की विजय हुई है।



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पाकिस्तानी सेना प्रमुख को 'प्रा' बुलाने पर हरीश रावत पर बरसे अनिल बलूनी, 'यह कैसी तुष्टिकरण की राजनीति'

देहरादून कांग्रेस नेता हरीश रावत के पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को 'प्रा' (बड़ा भाई) कहकर बुलाने पर बीजेपी सांसद अनिल बलूनी ने निशाना साधा है। इसके बाद दोनों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य और बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ऐसे व्यक्ति को भाई कहा जा रहा है जिसके हाथ भारतीयों और उत्तराखंड के वीर जवानों के खून से रंगे हैं। बलूनी ने रावत पर हमला करते हुए कहा, ‘आप देवभूमि के रहनेवाले हैं। यहां के प्रत्येक घर से कोई न कोई सेना में है। इस तरह का बयान देकर आप तुष्टीकरण की किस तरह की राजनीति कर रहे हैं, किस तरह के वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं।’ बीजेपी सांसद ने कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की प्रशंसा करने को लेकर भी रावत आलोचना की। बलूनी ने कहा, ‘आप सिद्धू के बयानों को उचित ठहरा रहे हैं जबकि आपकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह उन्हें देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक बता रहे हैं।’ दरअसल हरीश रावत ने हाल में एक ट्वीट में बाजवा को 'प्रा' कहते हुए इस्लामाबाद में इमरान खान के शपथग्रहण समारोह के दौरान सिद्धू के उन्हें गले लगाने को उचित ठहराया था और कहा था कि एक पंजाबी का दूसरे पंजाबी 'प्रा' को गले लगाना कैसे देशद्रोह हो सकता है। रावत ने कहा, ‘विभाजन के बाद पंजाब का जो हिस्सा पाकिस्तान में रह गया, उसे भी पंजाब ही कहा जाता है और वहां रहने वालों को पंजाबी ही कहा जाता है। सिद्धू यदि दूसरे पंजाबी व्यक्ति से, जो पाकिस्तान का जनरल है, उससे गले मिले तो...श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर को खोलने के विषय में मिले।’ उन्होंने कहा कि इसमें बीजेपी को राजनीति नजर आती है। उत्तराखंड के पूर्व सीएम ने कहा कि उन्हें तो तब भी राजनीति नजर नहीं आई थी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना बुलाए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर चले गए थे और वहां उनसे गले मिले थे और वहां बिरयानी का लुत्फ उठाया था। उन्होंने बलूनी से कहा, ‘‘सेना में मेरे परिवार, रिश्तेदारी-नातेदारी के लोग सिपाही से लेकर ब्रिगेडियर रैंक तक विभिन्न पदों पर हैं, इसलिए अपने लेक्चर को वह (बलूनी) सुरक्षित रखें।’


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पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक फसलों, खानपान की आदतों पर मौसम के प्रभाव को लेकर अध्ययन

पिथौरागढ़, 23 सितंबर (भाषा) उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक फसलों और लोगों के खान-पान की बदलती आदतों पर बदलते मौसम के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए सर्वोदय मंडल टिहरी और बीज बचाओ आंदोलन ने एक अध्ययन शुरू किया है।

ग्राम उत्पादों और पारंपरिक बीजों को बढ़ावा देने के लिए काम करनेवाले दोनों संगठनों ने बुधवार को इस अभियान के तहत पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट गांव से एक अध्ययन यात्रा शुरू की जो 25 दिन बाद उत्तरकाशी जिले के आराकोट गांव में संपन्न होगी।

सर्वोदय कार्यकर्ता और बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता विजय जरदारी ने बताया कि उनकी टीम पर्वतीय गांवों में जल, जंगल और जमीन की वर्तमान दशाओं, उनके बदलते स्वरूप और उस बदलाव के कारणों का अध्ययन करेंगी।

ये टीम यात्रा के दौरान प्रदेश के बागेश्वर, अल्मोड़ा, चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी जिलों से होकर गुजरेंगी और इनका उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं तथा किसानों को विकास कार्यों के कारण मौसम के बदलते स्वरूप के प्रभाव और उससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना है।

अभियान के प्रवक्ता रघुभाई जरदारी ने बताया कि इस दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में उगाए जाने वाले 12 पारंपरिक अनाजों के बारे में भी अध्ययन किया जाएगा ।



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बाजवा को 'प्रा' कहने पर बलूनी और रावत में जुबानी जंग

देहरादून, 23 सितंबर (भाषा) कांग्रेस महासचिव एवं पंजाब प्रभारी हरीश रावत द्वारा हाल में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को 'प्रा' (पंजाबी भाषा में भाई) कहे जाने पर भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने कड़ी आपत्ति जताई है और इससे दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है।

उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने एक वीडियो जारी कर कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ऐसे व्यक्ति को भाई कहा जा रहा है जिसके हाथ भारतीयों और उत्तराखंड के वीर जवानों के खून से रंगे हैं।

उन्होंने रावत से कहा, ‘‘आप देवभूमि के रहनेवाले हैं। यहां के प्रत्येक घर से कोई न कोई सेना में है। इस तरह का बयान देकर आप तुष्टीकरण की किस तरह की राजनीति कर रहे हैं, किस तरह के वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं।’’

भाजपा सांसद ने कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की प्रशंसा करने को लेकर भी रावत आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘‘आप सिद्धू के बयानों को उचित ठहरा रहे हैं जबकि आपकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह उन्हें देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक बता रहे हैं।’’

अगले साल की शुरुआत में उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की प्रचार समिति के प्रमुख बनाए गए रावत ने हाल में एक ट्वीट में बाजवा को 'प्रा' कहते हुए इस्लामाबाद में इमरान खान के शपथग्रहण समारोह के दौरान सिद्धू के उन्हें गले लगाने को उचित ठहराया था और कहा था कि एक पंजाबी का दूसरे पंजाबी 'प्रा' को गले लगाना कैसे देशद्रोह हो सकता है।

रावत ने कहा था, ‘‘विभाजन के बाद पंजाब का जो हिस्सा पाकिस्तान में रह गया, उसे भी पंजाब ही कहा जाता है और वहां रहने वालों को पंजाबी ही कहा जाता है। सिद्धू यदि दूसरे पंजाबी व्यक्ति से, जो पाकिस्तान का जनरल है, उससे गले मिले तो...श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर को खोलने के विषय में मिले।’’ उन्होंने कहा कि इसमें भाजपा को राजनीति नजर आती है।

रावत ने कहा कि उन्हें तो तब भी राजनीति नजर नहीं आई थी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना बुलाए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर चले गए थे और वहां उनसे गले मिले थे तथा वहां बिरयानी का लुत्फ उठाया था।

उन्होंने बलूनी से कहा, ‘‘सेना में मेरे परिवार, रिश्तेदारी-नातेदारी के लोग सिपाही से लेकर ब्रिगेडियर रैंक तक विभिन्न पदों पर हैं, इसलिए अपने लेक्चर को वह (बलूनी) सुरक्षित रखें।’’



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बुधवार, 22 सितंबर 2021

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने जासूसी मामले में पाकिस्तानी नागरिक को बरी करने के आदेश को पलटा

नैनीताल, 22 सितंबर (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पाकिस्तानी नागरिक को भारत में जासूसी के आरोप से बरी करने के निचली अदालत के आदेश को बुधवार को खारिज कर दिया और उसे दोषी करार देते हुए उसकी गिरफ्तारी के आदेश दिए ।

पाकिस्तानी नागरिक को सत्र अदालत ने बरी कर दिया था और वह रूड़की में रह रहा था। पासपोर्ट सहित जरूरी यात्रा दस्तावेजों के अभाव में वह पाकिस्तान वापस नहीं जा सका ।

पाकिस्तानी नागरिक को बरी किए जाने के निर्णय को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी ने कहा कि लाहौर निवासी आबिद अली उर्फ असद अली उर्फ अजित सिंह के खिलाफ भारत में जासूसी करने के पर्याप्त साक्ष्य हैं ।

न्यायाधीश ने कहा कि अली के मुचलके रद्द किए जाने चाहिए और उसे हिरासत में लिया जाना चाहिए।

पाकिस्तानी नागरिक को उत्तराखंड पुलिस ने हरिद्वार महाकुंभ के दौरान रूड़की से सरकारी गोपनीयता कानून, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत 25 जनवरी 2010 को गिरफ्तार किया था ।

अली के कब्जे से मेरठ, देहरादून और रूड़की में स्थित सैन्य संस्थानों के मानचित्रों के अलावा कई संदिग्ध और गोपनीय दस्तावेज तथा पेनड्राइव आदि भी बरामद हुए थे । उसके आवास से बिजली की फिटिंग के बोर्ड तथा एक दर्जन सिम कार्ड भी मिले थे ।

मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और मुकदमे के बाद दिसंबर, 2012 में एक निचली अदालत ने पाकिस्तानी नागरिक को कई आधारों पर दोषी ठहराया और उसे सात साल की कैद की सजा सुनाई ।

सजा के खिलाफ पाकिस्तानी नागरिक की ओर से एक अपील दायर की गई जिस पर सुनवाई करते हुए हरिद्वार के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (द्वितीय) ने जुलाई 2013 में उसे बरी करने के आदेश दे दिए ।

इस बीच, सरकार ने निचली अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जिसने उसे दोषी ठहराते हुए हिरासत में लेने के आदेश दिए ।



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Haridwar News: युवा भारत साधु समाज ने आनंद गिरि को अंतरराष्ट्रीय अध्‍यक्ष पद से हटाया, महंत नरेंद्र गिरि को दी श्रद्धांजल‍ि

देवेश सागर, हरिद्वार धर्मनगरी हरिद्वार स्थित गरीब दासी आश्रम में बुधवार को के संतों ने दिवंगत अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रद्धांज‍लि दी। इसके बाद गरीब दासी आश्रम में युवा भारत साधु समाज समिति के पदाधिकारियों ने आपात बैठक की। इसमें स्वामी आनंद गिरि को समिति के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया। युवा भारत साधु समाज के पदाधिकारियों के अनुसार, अब आनंद गिरि का समिति से कोई संबंध नहीं है। दरअसल अख‍िल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष दिवंगत महंत नरेंद्र गिरि ने 20 स‍ितंबर को प्रयागराज स्थित बाघंबरी पीठ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या से पहले सूइसाइड नोट भी लिखा है। इसकी फॉरेंसिक जांच चल रही है। सूइसाइड नोट में दिवंगत महंत नरेंद्र गिरि ने अपने शिष्य आनंद गिरि, मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और आद्या तिवारी के पुत्र संदीप तिवारी को आत्महत्या का जिम्मेदार बताया है। इसके बाद तीनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। युवा भारत साधु समाज हरिद्वार के अध्यक्ष महंत शिवानंद महाराज ने बताया क‍ि आनंद गिरि का सूइसाइड नोट में नाम आने और उसकी हरिद्वार से गिरफ्तारी के बाद युवा भारत साधु समाज के पदाधिकारियों ने एक मत होकर उनको अंतरराष्ट्रीय पद से बर्खास्त कर दिया है। महंत रविदास शास्त्री का कहना है कि स्वामी महंत नरेंद्र गिरि का आकस्मिक चले जाना संत समाज के लिए बड़े दुख और खेद का विषय है। महंत नरेंद्र गिरि सनातन परंपराओं का विश्व स्तरीय चेहरा थे। पूरा संत समाज उनके आकस्मिक निधन से आहत है।


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कांग्रेस ने पुरोला विधायक को अयोग्य घोषित करने की मांग की

देहरादून, 22 सितंबर (भाषा) हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पुरोला से कांग्रेस विधायक राजकुमार को पार्टी ने राज्य विधानसभा से दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग की है।

उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने बुधवार को राज्य विधानसभा सचिव मुकेश सिंघल के माध्यम से अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल को इस संबंध में एक पत्र सौंपा।

पत्र में कहा गया है कि 2017 में कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर जीतने वाले राजकुमार को दल-बदल कानून के तहत विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने गत 12 सितंबर को स्वेच्छा से कांग्रेस की सदस्यता छोड़ दी है।

सिंह ने यह भी कहा कि इस संबंध में कार्रवाई होने तक राजकुमार पर विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने की अनुमति ना दी जाए।



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