गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021

यूज्ड कारों से 70 हजार से 300 करोड़ बनाए, कोहली, प्रीति जिंटा भी हैं ग्राहक

बिग बॉय टॉयज (BBT, बीबीटी) के फाउंडर जतिन आहूजा ने अपने पिता से 70,000 रुपए की उधारी लेकर फिएट पालियो (Fiat Palio) से प्री-ओन्ड कारों के बिजनेस की शुरूआत की.

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Haridwar Kumbh Mela: धर्मध्वजा स्थापित करने के लिए बैरागी कैम्प पहुंचीं लकड़ियां, मेलाधिकारी रहे मौजूद

करन खुराना, हरिद्वार समय बीतने के साथ कुंभ की तैयारियां भी जोड़ पकड़ रही हैं। गुरुवार को बैरागी कैम्प में मेलाधिकारी और साधु संतों की मौजूदगी में धर्मध्वजा की लकड़ियां मौके पर पहुंचीं।कुंभ स्नान के दौरान धर्मध्वजा स्थापित होना एक परंपरा है। धर्मध्वजा का स्थापित होना ही कुंभ की शुरुआत मानी जाती है। कोविड कारणों से भले ही कुंभ स्नान में देरी हो रही हो, लेकिन कुंभ की शुरुआत धर्म ध्वजा के स्थापना से ही मानी जाती है। आपको बता दें कि कुछ दिन पूर्व साधु संत, मेलाधिकारी दीपक रावत के साथ छिद्दरवाला जंगल पहुंचे थे, जहां ध्वजा के लिए लकड़ियों का चयन किया गया और गुरुवार को अखाड़े के अनुसार लकड़ियां बैरागी कैम्प पहुंचीं। मान्यता के अनुसार 52 गज की लकड़ी को ध्वजा के रूप में स्थापित किया जाता है। 25 फरवरी को निकलेगी शोभा यात्रा गौरतलब है कि 25 फरवरी को गंगा सभा के द्वारा धर्मध्वजा के साथ कुशाघाट से हर की पौड़ी तक शोभायात्रा निकाली जाएगी और उसी के साथ हर की पौड़ी के प्रांगण में धर्मध्वजा स्थापित की जाएगी। इसके बाद 3 मार्च को जूना अखाड़े में धर्मध्वजा स्थापित की जाएगी। अन्य अखाड़ों ने भी ध्वजा स्थापित करने की तिथियां घोषित कर चुके हैं। गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा,महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने मेलाधिकारी दीपक रावत से मुलाकात कर उनको इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया। मेलाधिकारी दीपक रावत ने सहर्ष आमंत्रण स्वीकर किया।


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उत्तराखंड : वाहन मालिकों ने टोल प्लाजा खोलने का विरोध किया

देहरादून, 18 फरवरी (भाषा) टोल शुल्क से छूट की मांग को लेकर वाहन मालिकों के विरोध प्रदर्शन के बीच देहरादून-हरिद्वार राजमार्ग पर लच्छीवाला टोल प्लाजा का संचालन बृहस्पतिवार को शुरू हो गया। कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल के समर्थन के साथ करीब 250 टैक्सी ड्राइवरों ने टोल प्लाजा पर प्रदर्शन किया, जिससे लंबा जाम लग गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन खत्म करने के लिए समझाया। वहीं, विरोध में कांग्रेस नेता भारत भूषण कौशल ने अपना सिर मुंडवा लिया। दोईवाला एसडीएम लक्ष्मी राज चौहान और सर्किल ऑफिसर अनुज कुमार ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर गौर किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिस राजमार्ग के लिए स्थानीय लोगों ने अपनी जमीन दी उसका काम पूरा नहीं हुआ है लेकिन स्थानीय लोगों के मुद्दों पर विचार किए बिना टोल संग्रह की शुरुआत कर दी गयी।


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मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

टाटा जिन स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं, उसके पीछे इस नौजवान का है दिमाग

दिग्गज बिजनेस लीडर और टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा के पर्सनल निवेश का काम संभालते हैं 28 साल के शांतनु नायडू. उनका काम रतन टाटा को स्टार्टअप निवेश में मदद के साथ एग्जिक्यूटिव असिस्टेंस देना है.

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Kedarnath Tragedy: 'मुझे अब भी इंतजार'...उम्मीद जिंदा! हर साल वह कानपुर से आता है केदारनाथ

प्रशांत झा, नैनीतालसौरभ भट्ट की उम्मीद अभी जिंदा है। 500 किमी की दूरी तय करके हर साल वह कानपुर से केदारनाथ आते हैं। 2013 से हर साल वह ऐसा कर रहे हैं। यह वही खौफनाक साल था, जब सौरभ अपनी पत्नी रश्मि और 9 साल की बेटी आस्था के साथ चार धाम यात्रा के रास्ते में थे। उसी वक्त जलप्रलय आई और अपने साथ हजारों जिंदगियों को बहा ले गई। अब तक सौरभ को पता नहीं है कि उनके परिवार का क्या हुआ। इसलिए वह हर साल अपने परिवार की तलाश में यहां पहुंच जाते हैं। कानपुर से हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को सौरभ ने बताया, 'अपने परिवार को खोना बहुत बड़ा सदमा होता है। लेकिन उनके साथ क्या हुआ अगर यह नहीं जानना मुझे तोड़ देता है।' भट्ट पुलिस थानों और जिले के दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं। वह स्थानीय लोगों से किसी सुराग की आस में बात करते हैं। सौरभ बताते हैं, 'मैं केवल उन पर छोड़ नहीं सकता।' भट्ट की ही तरह सैकड़ों लोग तकरीबन 8 साल पहले आई उस त्रासदी के बाद अनिश्तितता के भंवर में फंसे हुए हैं। 2014 में उत्तराखंड हाई कोर्ट में एक पीआईएल (जनहित याचिका) दाखिल की गई थी। इसमें राज्य सरकार को लापता शवों की सुनिश्चितता के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। अनुमान के मुताबिक तकरीबन 4 हजार लापता लोगों को मृत मान लिया गया था। 2018 में हाई कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से लापता लोगों के शव मिलने पर डीएनए सैंपल इकट्ठा करने और उनके दाह संस्कार के निर्देश दिए थे। भट्ट कहते हैं, 'मैं अपने डीएनए सैंपल मुहैया कराए थे लेकिन परिवार के बारे में कोई खबर नहीं मिली।' 2019 में भट्ट ने घोषणा की कि जो भी उनकी पत्नी और बेटी के बारे में जानकारी देगा, उसे 5 लाख रुपये का इनाम देंगे। भट्ट कहते हैं, 'मुझे अब भी इंतजार है।' 900 से ज्यादा परिवारों ने जिला प्रशासन को अपने डीएनए सैंपल मुहैया कराए हैं लेकिन उनमें से बहुत कम ही मैच हुए हैं। इस बीच लापता शवों का पता लगाने को लेकर राज्य सरकार की प्रगति बहुत धीमी है। पिछले साल अक्टूबर तक सिर्फ 700 से ज्यादा शवों का पता चल पाया है। इस आंकड़े के आधार पर अभी 3300 से ज्यादा लोग लापता हैं। सिर्फ 2019 को छोड़कर हर साल लापता लोगों की तलाश में टीमें भेजी गईं। 2013 में 545 शवों का पता चला। वहीं, 2014 में सर्च टीम को 63 लापता लोगों के शव मिले। लेकिन अगले साल सिर्फ 3 शव मिले। 2016 में सर्च के दौरान 60 लापता लोगों के शव मिले। वहीं 2017 में सिर्फ 7 लापता लोगों के शव का पता चल पाया। अगले साल यानी 2018 में 21 लापता लोगों के शव बरामद हुए। 2019 में ऐसा कोई सर्च ऑपरेशन नहीं चलाया गया। वहीं, पिछले साल सिर्फ 4 लापता लोगों की डेड बॉडी मिली।


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Uttarakhand Floods 2021: उत्‍तराखंड में हर रोज मिल रहे सड़े-गले शव, मृतकों की पहचान करने में आ रही समस्‍या

देहरादून उत्‍तराखंड आपदा को आए 10 दिन बीत चुके हैं। दिन बीतने के साथ ही बचावकर्मियों को लोगों के शव भी लगातार मिलते जा रहे हैं। अब तक चमोली, तपोवन और रैणी में कुल मिलाकर 58 शव मिल चुके हैं। बचाव में जुटे एनडीआएफ और एसडीआएफ की टीम के सामने सबसे बड़ी समस्‍या इन शवों की पहचान करने की आ रही है। मलबे से जो शव निकाले जा रहे हैं, वे या तो इतने क्षत विक्षत हैं या फिर सड़ने की कगार पर हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। तपोवन सुरंग में जब भी कोई शव मिलता है, तब बचाव अभियान को कुछ देर रोकना पड़ता है जिससे क्षत-विक्षत शव को और ज्यादा नुकसान न पहुंचे। गौरतलब है कि इस दैवीय आपदा में कुल 206 लोग गायब हैं। आशंका जताई जा रही है कि इनमें से अधिकतर लोगों की जान जा चुकी है। इस बीच, एनडीआरएफ के कमांडेंट पीके तिवारी कहना है कि आपदा प्रभावित जलविद्युत परियोजना स्थलों पर तलाश और बचाव अभियान अंतिम पीड़ित तक पहुंचने तक जारी रहेगा क्योंकि ‘चमत्कार होते हैं।’ आपदा में लापता या फंसे लोगों के जीवित बचने की संभावनाओं के संबंध में पूछे जाने पर कमांडेंट तिवारी ने कहा कि इस बारे में वह विश्वास से कुछ नहीं कह सकते लेकिन ‘चमत्कार होते हैं।’ 'हिमाचल में 10 दिन बाद मिला था जीवित शख्‍स' कमांडेंट तिवारी ने बताया, ‘हिमाचल प्रदेश में इसी तरह की एक त्रासदी में हमें 10 वें दिन एक जीवित व्यक्ति मिला था। चमत्कार होते हैं। सुरंग में लाखों मीट्रिक टन गाद भरी हुई है। लेकिन एक सिपाही और एक बचावकर्मी के रूप में मैं केवल इतना कह सकता हूं कि अंतिम पीड़ित तक पहुंचने तक अभियान जारी रहेगा।’ एनटीपीसी के क्षतिग्रस्त 520 मेगावॉट तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की तपोवन सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए जारी तलाश और बचाव को अनोखा बताते हुए तिवारी ने कहा कि गाद और मलबा साफ करने की कवायद में अगर एक साल नहीं तो कम से कम महीनों लग सकते हैं। '4 किमी लंबी सुरंग में 165 मीटर तक ही पहुंचे हैं बचाव दल' एनडीआरएफ के कमांडेंट ने कहा-‘सुरंग चार किलोमीटर लंबी है। हम इसके अंदर 160-165 मीटर तक पहुंचे हैं और उसके आगे जाना है। निर्माण में आठ-दस साल लेने वाली सुरंग से मलबा साफ करने में एक साल नहीं तो महीनों तो लग ही सकते हैं।’ इनटेक आडिट टनल के समानांतर स्थित निचली सुरंग में छेद करने के बारे में तिवारी ने कहा कि कैमरे की मदद से फंसे हुए लोगों को ढूंढने की उम्मीद में छेद किया जा रहा था। इनटेक आडिट टनल से ही शव बरामद हो रहे हैं। तिवारी ने कहा कि हालांकि बाद में यह अहसास हुआ कि जिस सुरंग में 25-35 व्यक्तियों के फंसे होने की आशंका है, वह भी गाद और मलबे से बुरी तरह भरी पड़ी है।


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चमोली हादसा: सुरंग में 4 दिन तक जिंदा थे लोग? जानें वायरल खबर का सच

करन खुराना,चमोली उत्तराखंड के चमोली जनपद में 7 फरवरी को आई जलप्रलय में सैकड़ो लोगों की जान चली गई। कुछ के शव बरामद हो गये वहीं राहत और बचाव टीम अभी भी जिंदगी की आस में तलाश जारी रखे हुए है। वहीं आपदा के दिन से अब तक परिजन आस में सुरंग के बाहर खड़े थे कि किसी तरह सुरंग में फंसे हुए व्यक्ति बाहर आ जाएं, लेकिन नियति को यह मंजूर न था। इसी बीच शवों के पोस्टमॉर्टम से जुड़ी एक फेक न्यूज का उत्तराखंड पुलिस की तरफ से खंडन किया गया है। दरअसल इसी क्रम में एक झूठी खबर फैल गई जिसमें यह बताया गया कि शवों के पोस्टमार्टम में यह स्पष्ट हुआ है कि सुरंग में दबे हुए व्यक्ति मलबे में दबने के बाद भी 5 से 7 दिन तक जीवित थे। इस संदेश के बाद डीआईजी रेंज नीरू गर्ग ने खण्डन जारी करने के आदेश जारी किए जिसके बाद चमोली पुलिस ने इस खबर का खंडन जारी किया और बताया कि यह खबर झूठी है। पुलिस प्रशासन की तरफ से किया गया खंडन डीआईजी गढ़वाल से जब एनबीटी ऑनलाइन ने बात की तो नीरू गर्ग ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को लेकर एक झूठी खबर फैला दी गई थी। मामला संज्ञान में आते ही खबर का खंडन जारी करने के आदेश दिए है। डीआईजी नीरू गर्ग ने यह भी बताया कि सीएमओ चमोली डॉ राणा ने बताया है की उनके द्वारा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का अवलोकन किया गया है जिसमे यह स्पष्ट हुआ है कि मृत्यु का कारण पेट और फेफड़ो में अत्यधिक पानी और मलबा का होना है और डॉ राणा का यह भी कहना है कि ऐसी स्थिति में मृत्यु आधे घण्टे में होनी तय है।


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