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कृषि कानूनों को वापस लेने के केंद्र के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए रावत ने कहा, ‘‘लोकतंत्र आखिरकार जीत गया। किसानों का सामूहिक और लगातार संघर्ष जीत गया।’’
उन्होंने कहा कि यह राहुल गांधी के नेतृत्व में लोकतांत्रिक प्रतिपक्ष की भी जीत है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी वह पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने इन्हें काला कानून बताया था और विरोध में पंजाब और हरियाणा में ट्रैक्टर रैलियां निकाली थीं।
रावत ने कहा कि केंद्र का यह तर्क कि ये कानून इसलिए वापस लिए जा रहे हैं क्योंकि वह किसानों को समझा नहीं सका, उसके अहंकार को दिखाता है।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष रावत ने कहा कि कानूनों की वापसी ने पंजाब और उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत की संभावनाओं को और मजबूत कर दिया है।
यह पूछे जाने पर कि क्या इस निर्णय से भाजपा को मदद मिलेगी, रावत ने कहा कि अब भाजपा को इससे राहत मिलने का कोई मौका नहीं है क्योंकि निर्णय बहुत देर से आया है।
रावत ने केंद्र से उन किसान परिवारों से क्षमा मांगने को कहा जिन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में अपने प्रियजनों को खोया है। उन्होंने संघर्ष के दौरान मारे गए किसानों को शहीद का दर्जा देने की भी केंद्र से मांग की।
कुमाऊं के पुलिस उपमहानिरीक्षक नीलेश आनंद भरणे ने यहां बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में चंदन सिंह लोधियाल (27), उमेश मेहता (30), कृष्ण सिंह बिष्ट और राजकुमार मेहता (29) शामिल हैं। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए एक आरोपी के पास से एक पिस्तौल और एक मैगजीन भी बरामद हुई है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि चारों आरोपी कांग्रेस नेता के मकान पर उनका पुतला जलाने और उनके खिलाफ नारे लगाने गए थे। आरोपियों ने पूछताछ में दावा किया कि खुर्शीद के मकान में रहने वाले एक सहायक से झगड़े के बाद स्थिति बिगड़ गयी और वहां तोड़फोड़ और आगजनी की गई। भरणे ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और हथियार कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
खुर्शीद की किताब ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ में कथित तौर पर हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों से किए जाने पर विवाद के बीच सोमवार को नैनीताल से करीब 15 किलोमीटर दूर सतकोल में स्थित उनके घर पर हमला कर तोड़फोड़ और आगजनी की गयी। नारे लगाते हुए हमलावरों ने खुर्शीद के घर के बाहर उनका पुतला फूंका और उसके बाद घर के शीशों को क्षतिग्रस्त करते हुए लकड़ के एक दरवाजे में आग भी लगा दी।
पिथौरागढ के वन प्रभागीय अधिकारी विनय भार्गव ने बताया, ‘‘ ये कैमरे उन शिकारियों पर निगाह रखेंगे जो कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्रों से जानवरों के नीचे घाटियों में आते ही सक्रिय हो जाते हैं ।’’
उन्होंने बताया कि ये कैमर जिले की व्यास, चौदास, मिलम, दारमा, चिपलाकोट, चिपका केदार, हांसलिंग ओर नगीनीधुरा घाटियों में लगाए गए हैं ।
वन अधिकारी ने बताया, ‘‘इन सौर शक्ति युक्त उच्च गुणवत्ता वाले कैमरों को स्थापित करने के अलावा, हमने वन विभाग की अपनी टीम को भी शिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दिन के समय क्षेत्र में गश्त करने के निर्देश दिए हैं ।’’
इन क्षेत्रों में काला और भूरा हिमालयी भालू, कस्तूरी मृग, मोनाल पक्षी, तिब्बती भेडिया, लाल लोमडी, आइबैक्स और सुनहरा गिद्ध जैसी बीसियों दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें से कई का अस्तित्व खतरे में है ।
चारधाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत समिति की यहां आम बैठक के बाद उसके अध्यक्ष कृष्णकांत कोटियाल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ हम प्रदेश में 15 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेंगे लेकिन वे रणनीतिक रूप से कई सीटों के परिणाम पर अपना प्रभाव डालेंगे ।’’
उन्होंने बताया कि समिति पत्राचार अभियान चलाकर जनता को भी देवस्थानम बोर्ड के बारे में जागरूक करेगी । उन्होंने कहा, ‘‘ हम यजमानों को बताएंगे कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने कैसे ढाई हजार साल पुरानी सर्वमान्य परम्परा को समाप्त कर हम पर देवस्थानम एक्ट थोपा है ।’’
कोटियाल ने यह भी कहा कि अगर सरकार ने देवस्थानम बोर्ड को जल्द समाप्त नही किया तो गैरसैंण में होने वाले आगामी सत्र में विधानसभा का घेराव भी किया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में गठित चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को भंग किए जाने की मांग को लेकर चारों हिमालयी धामों—बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री, के तीर्थ पुरोहित लंबे समय से आंदोलनरत हैं।
उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उत्तरकाशी में एक जनसभा के दौरान यह घोषणा की । सिसोदिया ने कहा कि इसी के साथ पवित्र गंगा नदी के उद्गम स्थल गंगोत्री से उत्तराखंड में स्वच्छ राजनीति के युग की शुरूआत होगी ।
उत्तराखंड में सत्ता में अब तक रहीं कांग्रेस और भाजपा की सरकारों को अपने वादे पूरा न करने का दोषी ठहराते हुए आप नेता ने कर्नल कोठियाल के लिए प्रदेश की जनता से एक मौका मांगा ।
गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि के होने के बावजूद कोठियाल प्रदेश में काफी लोकप्रिय हैं जिन्होंने 2013 में आई केदारनाथ आपदा के बाद अपने सैन्य अनुभव को स्थानीय लोगों की मदद के लिए इस्तेमाल किया । वह पहले उत्तरकाशी में नेहरू पर्वतरोहण संस्थान के प्राचार्य भी रह चुके हैं ।
गंगोत्री का चुनावी इतिहास बहुत दिलचस्प है और यहां से जिस पार्टी का उम्मीदवार विजयी होता है, प्रदेश में सरकार उसी की बनती है।
राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि कोठियाल को गंगोत्री सीट से चुनावी समर में उतारने का निर्णय चारों धामों के तीर्थ पुरोहितों में देवस्थानम बोर्ड को लागू करने से भाजपा सरकार के प्रति उपजी नाराजगी को आप के पक्ष में भुनाने का प्रयास भी है ।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल के दौरान गठित देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की तीर्थ पुरोहित लंबे समय से मांग कर रहे हैं और उनका मानना है कि यह उनके पारंपरिक अधिकारों का हनन है ।