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खरीफ खरीद के संबंध में यहां मंगलवार को आयोजित एक बैठक में खाद्य मंत्री बंशीधर भगत ने कहा कि इस वर्ष के लिए निर्धारित धान खरीद में से 12 लाख मीट्रिक टन कुमाऊं के लिए तथा तीन लाख मीट्रिक टन गढ़वाल क्षेत्र के लिए क्रय किए जाएं।
भगत ने अधिकारियों और क्रय एजेंसियों को किसानों और काश्तकारों के हित में एक अक्टूबर को धान की खरीद शुरू होने से पहले ही सभी क्रय केन्द्रों पर चौकीदार, कम्प्यूटर ऑपरेटर जैसे सामयिक (सीजनल) कर्मियों की नियुक्ति, कंप्यूटर, कांटे लगाने की व्यवस्था पूरी करने के निर्देश दिए ।
उन्होंने एक अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक सरकारी विभागों को धान क्रय करने तथा 15 अक्टूबर से कमीशन एजेंट के माध्यम से किसानों से धान क्रय करवाने के निर्देश दिये।
मंत्री ने कहा कि केंद्र द्वारा धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में पिछले वर्ष के मुकाबले आशातीत वृद्धि की गई है। सामान्य धान का पिछले वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति कुन्तल था जिसे बढ़ाकर इस बार 1940 रुपये प्रति कुन्तल किया गया है तथा ग्रेड-ए धान का मूल्य पिछले वर्ष के 1888 रुपये प्रति कुन्तल से बढ़ाकर 1960 रुपये प्रति कुन्तल किया गया है।
प्रदेश में चार एजेंसियों खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग, नैफेड और राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ को धान खरीद के लिये नामित किया गया है । इस खरीफ सीजन में 240 क्रय केंद्र खोले जाने का भी निर्णय लिया गया जो पिछले वर्ष खोले गए 229 क्रय केन्द्रों से 11 अधिक हैं ।
यहां इस संबंध में सोमवार देर रात मुख्य सचिव डा. सुखबीर सिंह संधु द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि 10 अगस्त की सुबह छह बजे तक कोविड कर्फ्यू प्रभावी रहेगा । इस दौरान पिछली सभी रियायतों को जारी रखा गया है ।
त्रसोमवार से प्रदेश भर में खुले सरकारी और निजी विद्यालयों को शिक्षा विभाग द्वारा जारी मानक प्रचलन विधि (एसओपी) का कडाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है ।
इसी प्रकार, राज्य में आईटीआई, पॉलीटेक्निक, महाविद्यालय, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज तथा विश्वविद्यालयों को खोलने के लिए संबंधित विभाग द्वारा पृथक से कोविड प्रोटोकॉल के प्रावधानों के साथ एसओपी जारी की जाएगी ।
राज्य के सभी पर्यटन स्थलों में सप्ताहांत में भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन को पर्यटकों से कोविड अनुरूप व्यवहार सुनिश्चित कराने तथा उसका उल्लंघन किए जाने पर सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है ।
इसके अलावा, बाहरी राज्यों से आने वाले ऐसे लोगों के लिए आरटी—पीसीआर जांच रिपोर्ट की बाध्यता समाप्त कर दी गयी है जिन्हें कोविड रोधी टीके की दोनों खुराकें लगवाए हुए 15 दिन से ज्यादा हो चुके हैं । अन्य लोगों के लिए 72 घंटे पूर्व की कोरोना मुक्त जांच रिपोर्ट साथ लाने की बाध्यता बनी रहेगी । उत्तराखंड आने वाले लोगों को ई—पोटल पर पंजीकरण करवाने की व्यवस्था को भी जारी रखा गया है ।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश से होकर राज्य के गढवाल और कुमाउं क्षेत्रों के बीच आवागमन करने वाले लोगों को भी यात्रा से पूर्व अपना पंजीकरण करवाना होगा ।
अपने पैतृक गांव आ रहे प्रवासियों को गांव में स्थापित पृथकवास सेंटरों में आवश्यक रूप से सात दिन तक पृथकवास में रहना होगा ।
राज्य में जिम, शापिंग मॉल, सिनेमा हॉल, स्पा, सैलून, तरणताल, मनोरंजन पार्क, थियेटर तथा आडिटोरियम को 50 प्रतिशत क्षमता के साथ खुलेंगे ।
प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालय 100 प्रतिशत क्षमता के साथ खुलेंगे । निजी क्षेत्र के कार्यालय भी पूरी क्षमता से खुल सकेंगे लेकिन वे यथासंभव अपने कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे ।
इस याचिका पर अब चार अगस्त को सुनवाई होगी।
मुख्य न्यायाधीश आर एस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार की पीठ ने पाया कि विद्यालयों को खोलने के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी की गयी एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) को इस याचिका में सटीक ढंग से चुनौती नहीं दी गयी है।
अदालत ने कहा कि यह याचिका 29 जुलाई को दायर की गयी जबकि राज्य सरकार ने विद्यालयों को खोलने के संबंध में 31 जुलाई को एसओपी जारी की।
याचिका को सुधारने की अनुमति देते हुए उच्च न्यायालय ने इसपर अगली सुनवाई की तारीख चार अगस्त तय की।
हरिद्वार निवासी विजयपाल ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि सरकार ने बिना किसी तैयारी या योजना के कोविड महामारी के बीच विद्यालयों को खोलने का निर्णय लिया है।
स्कूलों में कोविड प्रोटोकॉल... जैसे सेनिटाइजेशन, दो गज की दूरी, मास्क लगाना सहित नियमों का कड़ाई से पालन किया गया। हालांकि, पहले दिन स्कूल आने वाले छात्रों की संख्या बहुत कम रही। देहरादून में ज्यादातर निजी स्कूल भी बंद रहे।
गौरतलब है कि राज्य मंत्रिमंडल की 27 जुलाई को हुई बैठक में प्रदेश में कोविड के कारण लंबे समय से बंद स्कूलों में छठी से 12 वीं तक की कक्षाएं शुरू करने का निर्णय किया गया था।
लेकिन, बाद में इस संबंध में जारी मानक संचालन प्रक्रिया में दो अगस्त से नौवीं से 12 वीं और 16 अगस्त से छठी से आठवीं की कक्षाएं शुरू करने का निर्णय किया गया।
'मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना' के लाभार्थी बच्चों के बैंक खातों में तीन—तीन हजार रुपये की सहायता राशि भेजने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बच्चों के जीवन में माता-पिता या संरक्षक की कमी पूरी करना संभव नहीं है, लेकिन राज्य सरकार एक अभिभावक की तरह इनका हमेशा ध्यान रखेगी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत जिलाधिकारी इन बच्चों के सह—अभिभावक के रूप में काम करेंगे और उनका पूरा ध्यान रखेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाव में ही भगवान होते हैं और इन बच्चों के प्रति हमारा स्नेह, प्रेम और उत्तरदायित्व का भाव है।
इन बच्चों का 'मामा' की तरह ध्यान रखने का वादा करते हुए धामी ने कहा, ‘‘वात्सल्य, माता-पिता में अपने बच्चों के लिए होने वाला नैसर्गिक प्रेम है। जिन बच्चों की आंखों में आंसू आए हैं, हम उनके चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास कर रहे हैं ।'
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली ऐसी योजना है जिसमें हम चाहते हैं कि लाभार्थियों की संख्या कभी ना बढ़े और भविष्य में कभी किसी बच्चे को इसकी जरुरत ना पड़े।
पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत डा. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए धामी ने कहा कि अभावों में संघर्ष करने वाले अपनी संकल्प शक्ति से आसमान छूते हैं।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को तीन हजार रुपये प्रतिमाह, निशुल्क राशन और निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। संबंधित जिलों के जिलाधिकारी इन बच्चों की संपत्ति का संरक्षण करेंगे। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के लिए नौकरियों में पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की जा रही है और ऐसा करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना बच्चों को सामाजिक, आर्थिक और मानसिक तौर पर सशक्त बनाएगी।
योजना को सरकार का मानवीय चेहरा बताते हुए उन्होंने कहा कि एक मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 तक कोविड-19 महामारी एवं अन्य बीमारियों के कारण बेसहारा हुए बच्चों के लिए सरकार अभिभावक के रूप में काम करेगी।
इस योजना के तहत प्रदेश में कुल 2,347 बच्चे चिन्हित किए गए हैं जिनमें से प्रथम चरण में 1,062 बच्चों को लाभ मिल रहा है।