मंगलवार, 3 अगस्त 2021

कभी एक जोड़ी जूते में 3 भाई-बहन करते थे प्रैक्टिस, तोक्यो ओलंपिक में हैट्रिक लगा स्‍टार बनीं वंदना

देवेश सागर, हरिद्वार तोक्यो ओलंपिक-2021 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ की जीत को कौन भूल सकता है। करो या मरो के मैच में हैट्रिक लगाकर इतिहास रचने वाली वंदना कटारिया के शानदार प्रदर्शन से दक्षिण अफ्रीका को हार का मुंह देखना पड़ा था। इस जीत के बाद से लोगों के मन में वंदना कटारिया के बारे में जानने की उत्सुकता दिखाई दी। लोगों ने वंदना कटारिया के बारे में खूब इंटरनेट पर सर्च किया, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत को शानदार जीत दिलाने वाली ये खिलाड़ी उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली है। वंदना कटारिया हरिद्वार के एक छोटे से गांव रोशनाबाद की रहने वाली है। वंदना कटारिया भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान भी रह चुकी हैं। हरिद्वार के रोशनाबाद ग्राम स्थित स्टेडियम में संसाधनों की कमी के बावजूद कड़ी मेहनत कर वंदना कटारिया इस मुकाम तक पहुंची हैं। लोग वंदना कटारिया की जमकर सराहना कर रहे हैं और लड़कियों को पुरुषों कम न होने मिसाल दे रहे हैं। 9 भाई-बहन हैं वंदना कटारिया भेल (Bharat Heavy Electricals Limited) में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का कार्य करने वाले नाहर सिंह कटारिया के घर 15 अप्रैल 1992 को बेटी ने जन्म लिया था। जिसका नाम वंदना कटारिया रखा गया। वंदना कटारिया की माता सुरण देवी एक गृहणी हैं। वंदना कटारिया नौ भाई-बहन हैं। जिनमें वंदना कटारिया सातवें नंबर पर आती हैं। वंदना के पिता नाहर सिंह खुद एक पहलवान थे और गांव में होने वाली कुश्तियों में हिस्सा लेते थे। पिता ने कर्ज लेकर बेटी को लखनऊ खेलने भेजा मध्यवर्गीय परिवार में जन्मी वंदना कटारिया ने 9 साल की उम्र से ही हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। शुरुआत के दिनों में जब वंदना कटारिया रोशनाबाद स्टेडियम में प्रैक्टिस करने जाती थीं तो उनके पास संसाधनों की कमी थी। एक किट से वंदना के भाई पंकज कटारिया, वंदना कटारिया और उनकी बहन रीना कटारिया प्रैक्टिस करते थे। एक जोड़ी जूते से ही तीनो भाई-बहन बारी-बारी से हॉकी का अभ्यास किया करते थे। स्पोर्ट्स स्टेडियम रोशनाबाद में काफी समय प्रैक्टिस करने के बाद वंदना कटारिया लखनऊ के केडी सिंह स्टेडियम में खेलने आ गईं। परिवार की स्थिति खराब होने के कारण वंदना कटारिया के पिता और उनके बड़े भाई ने लोगों से कर्ज लेकर वंदना को लखनऊ भेजा। जूनियर महिला विश्वकप में जीता था कांस्य पदक वंदना कटारिया ने कई देशों में भारत की तरफ से महिला हॉकी टीम में खेल चुकी हैं। वंदना कटारिया ने जर्मनी में 2013 में जूनियर महिला विश्व कप में कांस्य पदक जीतने वाली महिला बनी। वहीं, कॉमनवेल्थ गेम में भी वंदना कटारिया का अपनी टीम की तरफ से शानदार प्रदर्शन रहा। हाल के समय में वंदना कटारिया रेलवे में टीसी के पद पर भी कार्यरत हैं।


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उत्तराखंड में इस खरीफ मौसम में 15 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य

देहरादून, तीन अगस्त (भाषा) उत्तराखंड में इस खरीफ मौसम में एक अक्टूबर से शुरू होने वाली धान खरीद के लिए कुल 15 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो पिछले वर्ष के क्रय लक्ष्य से पांच लाख मीट्रिक टन अधिक है ।

खरीफ खरीद के संबंध में यहां मंगलवार को आयोजित एक बैठक में खाद्य मंत्री बंशीधर भगत ने कहा कि इस वर्ष के लिए निर्धारित धान खरीद में से 12 लाख मीट्रिक टन कुमाऊं के लिए तथा तीन लाख मीट्रिक टन गढ़वाल क्षेत्र के लिए क्रय किए जाएं।

भगत ने अधिकारियों और क्रय एजेंसियों को किसानों और काश्तकारों के हित में एक अक्टूबर को धान की खरीद शुरू होने से पहले ही सभी क्रय केन्द्रों पर चौकीदार, कम्प्यूटर ऑपरेटर जैसे सामयिक (सीजनल) कर्मियों की नियुक्ति, कंप्यूटर, कांटे लगाने की व्यवस्था पूरी करने के निर्देश दिए ।

उन्होंने एक अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक सरकारी विभागों को धान क्रय करने तथा 15 अक्टूबर से कमीशन एजेंट के माध्यम से किसानों से धान क्रय करवाने के निर्देश दिये।

मंत्री ने कहा कि केंद्र द्वारा धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में पिछले वर्ष के मुकाबले आशातीत वृद्धि की गई है। सामान्य धान का पिछले वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति कुन्तल था जिसे बढ़ाकर इस बार 1940 रुपये प्रति कुन्तल किया गया है तथा ग्रेड-ए धान का मूल्य पिछले वर्ष के 1888 रुपये प्रति कुन्तल से बढ़ाकर 1960 रुपये प्रति कुन्तल किया गया है।

प्रदेश में चार एजेंसियों खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग, नैफेड और राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ को धान खरीद के लिये नामित किया गया है । इस खरीफ सीजन में 240 क्रय केंद्र खोले जाने का भी निर्णय लिया गया जो पिछले वर्ष खोले गए 229 क्रय केन्द्रों से 11 अधिक हैं ।



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उत्तराखंड में कोविड कर्फ्यू 10 अगस्त तक बढ़ा

देहरादून, तीन अगस्त (भाषा) उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आने के बावजूद कोई ढिलाई न देते हुए राज्य सरकार ने कोविड कर्फ्यू को 10 अगस्त तक के लिए बढा दिया ।

यहां इस संबंध में सोमवार देर रात मुख्य सचिव डा. सुखबीर सिंह संधु द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि 10 अगस्त की सुबह छह बजे तक कोविड कर्फ्यू प्रभावी रहेगा । इस दौरान पिछली सभी रियायतों को जारी रखा गया है ।

त्रसोमवार से प्रदेश भर में खुले सरकारी और निजी विद्यालयों को शिक्षा विभाग द्वारा जारी मानक प्रचलन विधि (एसओपी) का कडाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है ।

इसी प्रकार, राज्य में आईटीआई, पॉलीटेक्निक, महाविद्यालय, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज तथा विश्वविद्यालयों को खोलने के लिए संबंधित विभाग द्वारा पृथक से कोविड प्रोटोकॉल के प्रावधानों के साथ एसओपी जारी की जाएगी ।

राज्य के सभी पर्यटन स्थलों में सप्ताहांत में भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन को पर्यटकों से कोविड अनुरूप व्यवहार सुनिश्चित कराने तथा उसका उल्लंघन किए जाने पर सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है ।

इसके अलावा, बाहरी राज्यों से आने वाले ऐसे लोगों के लिए आरटी—पीसीआर जांच रिपोर्ट की बाध्यता समाप्त कर दी गयी है जिन्हें कोविड रोधी टीके की दोनों खुराकें लगवाए हुए 15 दिन से ज्यादा हो चुके हैं । अन्य लोगों के लिए 72 घंटे पूर्व की कोरोना मुक्त जांच रिपोर्ट साथ लाने की बाध्यता बनी रहेगी । उत्तराखंड आने वाले लोगों को ई—पोटल पर पंजीकरण करवाने की व्यवस्था को भी जारी रखा गया है ।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश से होकर राज्य के गढवाल और कुमाउं क्षेत्रों के बीच आवागमन करने वाले लोगों को भी यात्रा से पूर्व अपना पंजीकरण करवाना होगा ।

अपने पैतृक गांव आ रहे प्रवासियों को गांव में स्थापित पृथकवास सेंटरों में आवश्यक रूप से सात दिन तक पृथकवास में रहना होगा ।

राज्य में जिम, शापिंग मॉल, सिनेमा हॉल, स्पा, सैलून, तरणताल, मनोरंजन पार्क, थियेटर तथा आडिटोरियम को 50 प्रतिशत क्षमता के साथ खुलेंगे ।

प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालय 100 प्रतिशत क्षमता के साथ खुलेंगे । निजी क्षेत्र के कार्यालय भी पूरी क्षमता से खुल सकेंगे लेकिन वे यथासंभव अपने कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे ।



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सोमवार, 2 अगस्त 2021

उत्तराखंड में विद्यालयों को खोलने के फैसले को चुनौती, अदालत ने याचिका में संशोधन करने को कहा

नैनीताल, दो अगस्त (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने छह से बारह तक की कक्षाओं के लिए विद्यालयों को खोलने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता को सोमवार को अपनी याचिका में संशोधन करने को कहा।

इस याचिका पर अब चार अगस्त को सुनवाई होगी।

मुख्य न्यायाधीश आर एस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार की पीठ ने पाया कि विद्यालयों को खोलने के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी की गयी एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) को इस याचिका में सटीक ढंग से चुनौती नहीं दी गयी है।

अदालत ने कहा कि यह याचिका 29 जुलाई को दायर की गयी जबकि राज्य सरकार ने विद्यालयों को खोलने के संबंध में 31 जुलाई को एसओपी जारी की।

याचिका को सुधारने की अनुमति देते हुए उच्च न्यायालय ने इसपर अगली सुनवाई की तारीख चार अगस्त तय की।

हरिद्वार निवासी विजयपाल ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि सरकार ने बिना किसी तैयारी या योजना के कोविड महामारी के बीच विद्यालयों को खोलने का निर्णय लिया है।



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उत्तराखंड में नौवीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूल खुले

देहरादून, दो अगस्त (भाषा) उत्तराखंड में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए सोमवार से ज्यादातर स्कूल खुल गए।

स्कूलों में कोविड प्रोटोकॉल... जैसे सेनिटाइजेशन, दो गज की दूरी, मास्क लगाना सहित नियमों का कड़ाई से पालन किया गया। हालांकि, पहले दिन स्कूल आने वाले छात्रों की संख्या बहुत कम रही। देहरादून में ज्यादातर निजी स्कूल भी बंद रहे।

गौरतलब है कि राज्य मंत्रिमंडल की 27 जुलाई को हुई बैठक में प्रदेश में कोविड के कारण लंबे समय से बंद स्कूलों में छठी से 12 वीं तक की कक्षाएं शुरू करने का निर्णय किया गया था।

लेकिन, बाद में इस संबंध में जारी मानक संचालन प्रक्रिया में दो अगस्त से नौवीं से 12 वीं और 16 अगस्त से छठी से आठवीं की कक्षाएं शुरू करने का निर्णय किया गया।



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कोविड महामारी के कारण बेसहारा हुए बच्चों के लिए 'वात्सल्य' योजना

देहरादून, दो अगस्त (भाषा) उत्तराखंड में कोविड-19 के कारण माता-पिता, अभिभावक, संरक्षक छिन जाने के कारण बेसहारा हुए बच्चों की उचित देखभाल के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार से ‘वात्सल्य’ योजना शुरू की जिसके तहत 21 साल के होने तक इन बच्चों/किशोरों को प्रतिमाह तीन हजार रुपये की राशि दी जाएगी।

'मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना' के लाभार्थी बच्चों के बैंक खातों में तीन—तीन हजार रुपये की सहायता राशि भेजने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बच्चों के जीवन में माता-पिता या संरक्षक की कमी पूरी करना संभव नहीं है, लेकिन राज्य सरकार एक अभिभावक की तरह इनका हमेशा ध्यान रखेगी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत जिलाधिकारी इन बच्चों के सह—अभिभावक के रूप में काम करेंगे और उनका पूरा ध्यान रखेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाव में ही भगवान होते हैं और इन बच्चों के प्रति हमारा स्नेह, प्रेम और उत्तरदायित्व का भाव है।

इन बच्चों का 'मामा' की तरह ध्यान रखने का वादा करते हुए धामी ने कहा, ‘‘वात्सल्य, माता-पिता में अपने बच्चों के लिए होने वाला नैसर्गिक प्रेम है। जिन बच्चों की आंखों में आंसू आए हैं, हम उनके चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास कर रहे हैं ।'

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली ऐसी योजना है जिसमें हम चाहते हैं कि लाभार्थियों की संख्या कभी ना बढ़े और भविष्य में कभी किसी बच्चे को इसकी जरुरत ना पड़े।

पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत डा. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए धामी ने कहा कि अभावों में संघर्ष करने वाले अपनी संकल्प शक्ति से आसमान छूते हैं।

उन्होंने कहा कि योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को तीन हजार रुपये प्रतिमाह, निशुल्क राशन और निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। संबंधित जिलों के जिलाधिकारी इन बच्चों की संपत्ति का संरक्षण करेंगे। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के लिए नौकरियों में पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की जा रही है और ऐसा करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य है।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना बच्चों को सामाजिक, आर्थिक और मानसिक तौर पर सशक्त बनाएगी।

योजना को सरकार का मानवीय चेहरा बताते हुए उन्होंने कहा कि एक मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 तक कोविड-19 महामारी एवं अन्य बीमारियों के कारण बेसहारा हुए बच्चों के लिए सरकार अभिभावक के रूप में काम करेगी।

इस योजना के तहत प्रदेश में कुल 2,347 बच्चे चिन्हित किए गए हैं जिनमें से प्रथम चरण में 1,062 बच्चों को लाभ मिल रहा है।



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रविवार, 1 अगस्त 2021

टिहरी गढ़वाल में भाई-भाई में झगड़ा हुआ हिंसक, बड़े ने छोटे पर लोहे की सब्बल से किया वार, मौत

रजनीश कुमार, टिहरी गढ़वालघर में आपसी बातचीत के दौरान बढ़ गई बहस में बड़े भाई ने छोटे भाई को डांट दिया। जिसका छोटे भाई ने विरोध किया लेकिन विवाद इतना बढ़ गया कि बड़े भाई ने गुस्से में आकर पास में रखी लोहे की सब्बल से छोटे भाई पर हमला कर दिया। जिससे सिर पर लगी गंभीर चोट के कारण छोटे भाई की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। अस्पताल में इलाज के दौरान मौत टिहरी जिले के थाना नरेन्द्रनगर पुलिस को कोड़ती बैरनी निवासी मनोज कुमार पुत्र चमनलाल ने सूचना दी कि 23 जुलाई को नरेंद्रनगर के ओनी गांव निवासी रमेश के बड़े भाई राजपाल ने झगड़े की बहस के दौरान रमेश पर सब्बल से हमला कर दिया है। जिससे रमेश की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई है। गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज मामले की गम्भीरता को देखते हुए टिहरी गढ़वाल की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक व पुलिस क्षेत्राधिकारी ने हमलावर राजपाल पुत्र जोतीराम की गिरफ्तारी के लिए उप निरीक्षक विपिन कुमार थाना नरेन्द्रनगर, आरक्षी सुभाष रयाल थाना नरेन्द्रनगर, आरक्षी इमामुद्दीन थाना नरेन्द्रनगर की टीम बनाई। जिसने गैर इरादतन हत्या के आरोप में राजपाल के खिलाफ धारा 304 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज करते हुए गिरफ्तारी कर न्यायालय में पेश कर दिया।


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