शनिवार, 5 मार्च 2022

Uttarakhand Chunav: उत्तराखंड में नए विधायकों को 'हॉर्स ट्रेडिंग' से बचाने के लिए तैयारी में जुटी कांग्रेस, राजस्थान में 'सेफ हाउस' बनेगा ठिकाना!

देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election) के नतीजों का ऐलान होने में महज कुछ ही समय बाकी है। और उससे पहले ही कांग्रेस पार्टी आखिरी समय में विधायकों की खरीद-फरोख्त जैसी स्थिति बनने पर अपनी पार्टी के विधायकों को सुरक्षित करने के प्रयास में जुट गई है। 10 मार्च को चुनाव के नतीजों में हंग असेंबली जैसी स्थिति बनने पर पार्टी ने कांग्रेस शासित राजस्थान के सेफ हाउस में उत्तराखंड के विधायकों को शिफ्ट किए जाने की तैयारी शुरू कर दी है। उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता ने अपनी पहचान नहीं उजागर होने की शर्त पर बताया, 'चुनाव के नतीजे की तारीख के पास आने के साथ ही कांग्रेस पार्टी अलर्ट मोड में आ गई है। और बीजेपी के हॉर्स ट्रेडिंग के इतिहास को देखते हुए हम उन्हें इस बार ऐसा कोई मौका नहीं देना चाहते हैं। इसके लिए कुछ योजनाएं तैयार की जा रही है, जिनमें से एक कांग्रेस के प्रत्याशियों विधायकों को राजस्थान भेजा जाना भी शामिल है।' कांग्रेस के नेता ने बताया कि सभी प्रत्याशियों को प्रदेश नेतृत्व की तरफ से विशेष निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया, 'बीजेपी की हॉर्स ट्रेडिंग की वजह से 2017 में हमें नुकसान हो चुका है लेकिन इस बार हम तैयार हैं।' पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत, उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, विपक्ष के नेता प्रीतम सिंह की अगुवाई में एक दल दिल्ली में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने के बाद सोमवार को वापस लौट आएगा। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राजस्थान के बारे में तैयार किए जा रहे इस प्लान के बारे में कुछ भी कहने से इनकार करते हुए कहा, 'अपने प्रत्याशियों में हमारी पूरी आस्था है। बीजेपी के संभावित खतरे के मद्देनजर हमारे सभी सदस्य अलर्ट पर हैं। इस बार हम बीजेपी को मेरा कोई भी खेल करने का मौका नहीं देंगे।' वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड भाजपा के नेताओं ने कांग्रेस की तरफ से लगाए जा रहे हैं ऐसे आरोपों का खंडन किया। पार्टी के प्रदेश मीडिया इंचार्ज मनवीर सिंह चौहान ने कहा, 'पूरे प्रदेश में 2017 में हरीश रावत पर किए गए स्टिंग ऑपरेशन को देखा था, जब वह मुख्यमंत्री थे कांग्रेस हम पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगा रही है, जो की पूरी तरह से गलत है।' ‌


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शुक्रवार, 4 मार्च 2022

उत्तराखंड में छात्रा की हत्या मामले में आरोपी छात्र गिरफ्तार

देहरादून, चार मार्च (भाषा) उत्तराखंड की देहरादून पुलिस ने यहां एक कॉलेज के बाहर एक छात्रा की हत्या मामले में फरार आरोपी छात्र को घटना के 24 घंटे के भीतर शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने बताया कि आरोपी छात्र आदित्य तोमर को रायपुर क्षेत्र के खलंगा स्मारक से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ में आरोपी ने बताया कि किसी बात को लेकर उसकी और छात्रा वंशिका बंसल के बीच कहासुनी हो गयी थी जिसके बाद गुस्से में आकर उसने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी और मौके से फरार हो गया। छात्रा हरिद्वार के कनखल क्षेत्र की रहने वाली थी।

पुलिस के अनुसार यहां रायपुर क्षेत्र में सिद्धार्थ लॉ कॉलेज के बाहर तोमर ने बृहस्पतिवार की शाम छात्रा की तब गोली मारकर हत्या कर दी थी जब वह कुछ सामान लेने के लिए छात्रावास से बाहर आई थी।

पुलिस के अनुसार तोमर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के शामली का रहने वाला है। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया है।



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Uttarakhand News: मसूरी झील में मिला युवती का शव, सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई पूरी वारदात

सुनील सोनकर, मसूरी: उत्तराखंड के मसूरी (uttarakhand mussoorie) में करीब 24 वर्षीय युवती का शव () में मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। युवती के शव की सूचना मिलने पर मसूरी पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को झील से निकालकर कब्जे में लिया गया। वहीं शव की पहचान सोनाली उर्फ काजल के तौर पर हुई है। जो कि श्रीकोट श्रीनगर हाल गुलमोहर एनक्लेव आईटी पार्क देहरादून की रहने वाली थी। मृतका की बहन ने बताया कि सोनाली मानसिक रूप से पीड़ित थी और सुबह बिना बताए घर से निकल गई थी। उन्होंने कहा कि वह मसूरी झील कैसे पहुंची उनको नहीं मालूम। मसूरी पुलिस ने झील के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरा और लोगों से पूछताछ की। मसूरी कोतवाल गिरीश चंद शर्मा ने बताया कि सुबह 8 बजे के करीब सोनाली मसूरी झील के मुख्य गेट पर पहुची और वहां पर मौजूद सफाई कर्मचारी से झील जाने के लिए गेट खोलने को कहा। इस पर सफाई कर्मचारी ने कहा कि 10 बजे के बाद झील का गेट खोला जाता है, जिसके बाद सोनाली ने पास की कुर्सी उठाई और मुख्य गेट से छलांग लगाकर झील की ओर चली गई। सीसी कैमरे में देखा गया कि युवती झील की ओर गई, जहां पर उसने झील में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि सोनाली की बहन के बयान दर्ज कराए हैं।पुलिस ने बताया कि कल सोनाली के पिता मसूरी पहुंचेगे, जिसके बाद पोस्टमार्टम किया जाएगा। आत्महत्या करने की चर्चास्थानीय जनप्रतिनिधि राकेश रावत ने कहा कि झील में युवती ने कूदकर आत्महत्या की होगी। उन्होंने कहा कि झील में गंदगी का अंबार है। झील की साफ सफाई पिछले कई सालों से नहीं हुई है। उन्होंने कहा झील में गंदगी और काई के कारण झील में कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। उन्होने नगर पालिका परिषद से जल्द झील और आसपास के क्षेत्र की सफाई की मांग की है। इस मौके पर एसआई विनय शर्मा और एसआई सुमेर सिंह मौजूद थे।


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Losar Festival 2022: पहाड़ों की रानी मसूरी में लोसर पर्व की घूम, जानें तिब्बतियों के नए साल की रोचक बातें

सुनील सोनकर, मसूरी: उत्तराखंड में पहाड़ों की रानी मसूरी में तिब्बती और भोटिया जनजाति समुदाय का नए साल का पर्व लोसर () धूमधाम मनाया गया। तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व को लेकर इस समुदाय के लोगों में खासा उत्साह देखा गया। तिब्बती समुदाय के लोगों ने बौद्ध मंदिर में भगवान बुद्ध की पूजा अर्चना कर भगवान बुद्ध से विश्व शांति की कामना की। इस मौके पर मसूरी में तिब्बती समुदाय के लोग सुबह के समय मसूरी के दलाई हिल पहुंचे। यहां पारंपरिक झंडी बांधकर पूजा-अर्चना कर पुराने साल की विदाई और नए साल का जोरदार तरीके से स्वागत किया गया। इस मौके पर लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर नए साल की शुभकामनाएं दी। तिब्बती समुदाय की कैलसेंग डोलमा और चौनडीयम रिनछन ने बताया कि तिब्बती कैलेंडर के अनुसार भी यह वर्ष के पहले महीने का पहला दिन होता है। विश्व में जहां कहीं भी बौद्ध लोग बसे हुए हैं वहां यह पर्व मनाया जाता है। लोसर का अर्थ नया साल होता है। लो यानिकृवर्ष, सरकृनया जो मिलकर बनता है नव वर्ष। लोसर का इतिहास बताता है कि यह तिब्बत के नवें काजा पयूड गंगयाल के समय वार्षिक बौद्धिक त्योहार के रूप में मनाया गया पर एक अंतराल लेकर यह पारंपरिक फसली त्योहार में बदल गया। वह एक ऐसा दौर था जब तिब्बत में खेत की जुताई की कला विकसित हुई साथ ही सिंचाई व्यवस्था और पुलों का विकास भी हुआ। रंग रोगन कर घरों को हैं सजाते बाद में लोसर को ज्योतिषीय आधार देकर इसे नव वर्ष के रूप में मनाया जाने लगा। उन्होंने बताया कि तिब्बतियों में एक आम कहावत है लोसर इज लोसर जिसका अर्थ है नया साल नया काम। इस पर्व के मुख्य व्यंजनों में ताजा जौ का सत्तू, फेईमार ग्रोमां, ब्राससिल, लोफूड तथा छांग हैं। इस दिन घरों की साफ सफाई करते हैं तथा रंग रोगन कर घरों को सजाते हैं। उन्होंने बताया कि रसोई की दीवारों पर एक या आठ शुभ प्रतीक बनाए जाते हैं तथा घरेलू बर्तनों के मुंह ऊन के धागों से बांध दिए जाते हैं। रोचक बात यह है कि इस दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाओं को तिब्बती लोग शुभ मानते हैं। तशीदेलेक कहते हुए पड़ोसियों के घरों में जाते हैं लोग चौनडीयम रिनछन ने बताया कि अपने घरों में यह समारोह समाप्त होने पर लोग तशीदेलेक कहते हुए पड़ोसियों के घरों में जाते हैं और लोसर की बधाई देते हैं। कुछ स्थानों पर यह त्योहार एक सप्ताह तक चलता है पर आमतौर पर तीन दिन तक ही चलता है। कुछ लोग इस दिन शादी रचाना भी शुभ मानते हैं।


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गुरुवार, 3 मार्च 2022

Uttarakhand News: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में दर्दनाक हादसा, भूस्खलन के मलबे में दबने से 3 महिलाओं की मौत‌

ओम प्रकाश भट्ट, रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज‍िले में बड़ा दर्दनाक हादसा हो गया। जिले के चिरबटिया से लगे लुठियाग गांव में मिट्टी लेने गई तीन महिलाएं भूस्खलन के मलबे में दब गईं। इससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही रुद्रप्रयाग से जिला आपदा प्रबंधन की टीम और पुलिस प्रशासन के बचाव दल मौके पर पहुंचे। महिलाओं की खोजबीन के लिए बचाव अभियान शुरू किया गया। जानकारी के मुताब‍िक, यह हादसा गुरुवार को तीन बजे के आसपास लुठियाग गांव में हुआ। गांव की तीन महिलाएं घर की लिपाई-पुताई के लिए मिट्टी लेने गईं थी‌। यह गांव तिलवाड़ा-टिहरी मोटर सड़क पर चिरबटिया के समीप है। मिट्टी खोदने समय अचानक मलबा इनके उपर जा गिरा। हादसे के बाद काफी देर रात लोगों को जानकारी नहीं हुई। काफी देर बार जब लोगों को पता चला उन्‍होंने पुल‍िस प्रशासन को हादसे की सूचना दी। मलबे से तीनों शवों को निकाला रुद्रप्रयाग के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनएस रजवार ने पत्रकारों को बताया कि रेस्क्यू टीम ने तीनों महिलाओं के शव मलबे से निकाले हैं और अन्य की तलाश जारी है। उन्होंने बताया कि लुठियाग गांव की आशा देवी उम्र 40 साल, सौड़ी देवी उम्र 48 साल और माला देवी उम्र 52 साल मिट्टी लेने के लिए गांव के समीप ही गए थे, जहां अचानक भूस्खलन हुआ और वे उसके मलबे में दब गए। राहत अभियान जारी रहा ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर एसडीआरएफ, डीडीआरएफ और पुलिस प्रशासन के बचाव दल की ओर से राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया है। जो देर सायं तक चलता रहा।


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मिट्टी खोदते समय मलबा गिरने से तीन महिलाओं की मौत

नई टिहरी, तीन मार्च (भाषा) उत्तराखंड के टिहरी जिले की घनसाली तहसील में बृहस्पतिवार को मिट्टी खोदते समय तीन महिलाएं मलबे की चपेट में आ गयीं जिससे उनकी मृत्यु हो गयी ।

यह घटना सायं करीब चार बजे टिहरी जिले की सीमा पर ग्राम पंचायत थार्ती में चिरबटिया—डाक बंगला मार्ग पर हुई जहां तीन महिलाएं निजी उपयोग के लिए मिट्टी खोद रही थीं। लेकिन अचानक ऊपर से मिट्टी और पत्थर गिरने से तीनों महिलाओं की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

घनसाली के उपजिलाधिकारी केएन गोस्वामी ने बताया कि स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक टीम के मौके पर पहुंचने तक महिलाओं की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि टीम ने किसी तरह शवों को बाहर निकाला।

मृतकों की पहचान रूद्रप्रयाग जिले की जखोली तहसील के लूठियाग गांव की आशा देवी (40), माला देवी (52) और सोना देवी (48) के रूप में हुई है।

राजस्व पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए रुद्रप्रयाग भेज दिया है।



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यूक्रेन में फंसे उत्तराखंड के 80 से ज्यादा लोग वापस लाए गए

देहरादून, तीन मार्च (भाषा) युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसे उत्तराखंड के 80 से अधिक लोग अब तक भारत लौट चुके हैं। लौटने वालों में ज्यादातर छात्र हैं।

प्रदेश के मुख्य सचिव एस. एस. संधू ने यहां इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक में बताया कि अभी तक उत्तराखंड के 287 लोगों की सूचना प्राप्त हो चुकी है जो यूक्रेन और उसके आस-पास के देशों में फंसे हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से 86 लोगों की सकुशल वापसी हो चुकी है।

संधू ने सभी जिलाधिकारियों को यूक्रेन में फंसे प्रदेश के छात्रों एवं अन्य नागरिकों के परिजनों के लगातार संपर्क में रहते हुए उनसे संबंधित जानकारी शासन एवं दिल्ली स्थित स्थानिक आयुक्त कार्यालय को शीघ्र साझा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सूचनाओं का आदान-प्रदान विदेश मंत्रालय से शीघ्रता से किया जाए ताकि यूक्रेन से छात्रों और अन्य नागरिकों को शीघ्रता से निकाला जा सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि यदि फेसबुक और ट्विटर या अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से किसी छात्र या नागरिक के यूक्रेन में फंसे होने की जानकारी मिलती है लेकिन उसके स्थान (लोकेशन) का पता नहीं चल पा रहा है तो इसके लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (खुफिया) से संपर्क किया जाए।

अधिकारियों के अनुसार यूक्रेन में फंसे छात्रों एवं उत्तराखंड में रह रहे उनके परिजनों के मोबाइल नम्बरों को जोड़ते हुए तीन व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाये गये हैं जिनमें सभी वरिष्ठ अधिकारियों को भी जोडा गया है।

मुख्य सचिव ने कहा कि दिल्ली एवं मुंबई में यूक्रेन से आने वाले उत्तराखंड के लोगों के लिए समन्वय केंद्र बनाया गया है जिसमें सभी आगन्तुकों के लिए ठहरने एवं भोजन के अलावा दिल्ली से अपने गन्तव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था भी राज्य की ओर से की गई है।

इस बीच, देहरादून के जिलाधिकारी आर. राजेश कुमार ने यूक्रेन में फंसे विनायक और अस्मिता थपलियाल के रिश्तेदारों से यहां बृहस्पतिवार को मुलाकात करने के बाद कहा कि प्रशासन यूक्रेन में फंसे छात्रों के अभिभावकों से लगातार संपर्क में है।

जिलाधिकारी ने कहा कि छात्रों को युद्धग्रस्त क्षेत्र से बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यूक्रेन में फंसे देहरादून जिले के 41 और लोगों को वापस लाया जाना है।



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