गुरुवार, 22 जुलाई 2021

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हिरासत में कैदी की मौत की सीबीआई जांच के आदेश दिए

नैनीताल, 22 जुलाई (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हल्द्वानी उपकारागार में एक कैदी की हिरासत में हुई मौत के मामले में बृहस्पतिवार को सीबीआई जांच के आदेश दिए।

उच्च न्यायालय ने मामले से निपटने में कथित लापरवाही के लिए नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और हल्द्वानी के सर्किल अधिकारी के स्थानांतरण के भी आदेश दिए।

मृतक कैदी की पत्नी भारती द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी ने उक्त आदेश दिए।

न्यायमूर्ति मैठाणी ने कहा कि जांच में दखलंदाजी रोकने के लिए भी अधिकारियों का स्थानांतरण आवश्यक है।

एक नाबालिग लड़की से छेड़छाड़, दुव्यर्वहार और मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार उधमसिंह नगर जिले के कुंडेश्वरी काशीपुर निवासी प्रवेश कुमार दयाल की इस साल मार्च में संदिग्ध परिस्थितियों में हल्द्वानी उप कारागार में मौत हो गयी थी।

दयाल की पत्नी ने पुलिस अधिकारियों और जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसकी मौत की जांच की मांग की थी।



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उत्तराखंड : पेगासस जासूसी कांड को लेकर कांग्रेस का राजभवन कूच

देहरादून, 22 जुलाई (भाषा) उत्तराखंड कांग्रेस ने पेगासस जासूसी कांड को जनता के निजता के अधिकारों पर आक्रमण करार देते हुए इसके विरोध में बृहस्पतिवार को राजभवन की ओर कूच किया।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और चकराता विधायक प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र के खिलाफ नारे लगाते हुए राज्य पार्टी मुख्यालय से दिलाराम चौक होते हुए राजभवन की ओर कूच किया।

हालांकि, पुलिस ने उन्हें राजभवन पहुंचने से पहले ही रास्ते में हाथीबडकला में रोक लिया। कांग्रेसजनों ने अवरोधकों पर चढ़कर उन्हें पार करने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

हाथीबडकला में रोके जाने के बाद सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘यह लोगों की निजता के अधिकारों पर हमला है। लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। हमारे नेता राहुल गांधी के फोन के अलावा कुछ केंद्रीय मंत्रियों और पत्रकारों सहित सैकड़ों लोगों के फोन पेगासस स्पाइवेयर के जरिए हैकिंग के निशाने पर थे।’’

उन्होंने नैतिक आधार पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग की।



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बुधवार, 21 जुलाई 2021

India China LAC News: मॉनसून में पहले क्यों आए सैनिक? चमोली में LAC पर चीन की चाल! दिखे PLA के 35-40 जवान

देहरादून उत्तराखंड में एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों को देखा गया है। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में 35-40 चीनी सैनिकों ने चमोली जिले के बाराहोटी इलाके में एलएसी का दौरा किया। हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि पीएलए के सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की या नहीं। 'घोड़े पर सवार होकर आए पीएलए के सैनिक' एक वरिष्ठ अधिकारी ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'बाराहोटी के पास चीन की गतिविधियों का यह ताजा मामला है। चार से पांच दिन पहले पीएलए के सैनिक घोड़े पर सवार होकर आए और अपने वहां पहुंचने के सबूत के तौर पर कुछ चीजें छोड़ गए।' 'एलएसी पर गतिविधि बढ़ी, इस बार वे जल्दी आए' सीनियर अफसर ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'आम तौर पर वे (चीनी सैनिक) मॉनसून के बाद वहां आते रहे हैं। लेकिन इस बार वे जल्दी आए हैं।' एक और सरकारी अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि चीनी सेना की एलएसी के पास ऐक्टिविटी बढ़ गई है। 2018 में भारतीय सेना (Indian Army) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने सरकार को जानकारी दी थी कि बाराहोटी के कई इलाकों में चीन ने हवाई घुसपैठ की। इसके बाद भारत ने हालात का जायजा लेने के लिए कई विभागों की एक टीम वहां भेजी थी। आम तौर पर ये टीम साल में तीन बार उस इलाके का दौरा करती है। बाराहोटी से दिखाई देता है तिब्बत एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, 'दो हफ्ते पहले जिला प्रशासन की एक टीम ने बाराहोटी का दौरा किया था।' बताते चलें कि बाराहोटी उत्तराखंड में चीन की सीमा पर स्थित है। प्रदेश की राजधानी देहरादून से यह तकरीबन 397 किलोमीटर दूर है। चमोली जिले का यह खूबसूरत ग्रासलैंड सड़क के रास्ते जोशीमठ से जुड़ा हुआ है। तीन किलोमीटर की ट्रेकिंग के बाद बाराहोटी चोटी तक पहुंचा जा सकता है, जहां से तिब्बत दिखाई देता है।


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टिहरी जिले में भूस्खलन में प्रोफेसर की मौत

नई टिहरी, 21 जुलाई (भाषा) उत्तराखंड के टिहरी जिले में बुधवार को तोताघाटी और सौडपानी के बीच एक पहाड़ी से भूस्खलन के दौरान एक चट्टान के एक कार पर गिरने से उसमें सवार एक प्रोफेसर की मृत्यु हो गई ।

देवप्रयाग के पुलिस थाना प्रभारी महिपाल सिंह रावत ने बताया कि दुर्घटना में कार चालक तथा साथ में यात्रा कर रहा एक अन्य व्यक्ति बाल—बाल बच गए ।

उन्होंने बताया कि नरेंद्रनगर डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर मनोज सुंद्रियाल (44) को हादसे में गंभीर चोट आई । उन्हें ऋषिकेश एम्स लाया गया जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई । सुंद्रियाल देहरादून के निवासी थे ।



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चंपावत में भूस्खलन के कारण फंसे लोग, धामी ने उत्तराखंड के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया

देहरादून, 21 जुलाई (भाषा) उत्तराखंड के चंपावत जिले में टनकपुर—घाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार बारिश से कई स्थानों पर हुए भूस्खलन के कारण करीब दो दर्जन लोग अब भी फंसे हुए हैं, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी जिले में बादल फटने से प्रभावित गांवों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया ।

टनकपुर—घाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर विश्रामघाट में भूस्खलन के कारण यातायात अवरूद्ध होने से फंसे लोगों के लिए चंपावत जिला प्रशासन द्वारा ठहरने और भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है। मलबे को साफ कर मार्ग खोलने का कार्य किया जा रहा है ।

चंपावत के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडे ने बताया कि लगातार बारिश के दौरान मंगलवार को राष्ट्रीय राजमार्ग पर आठ स्थानों पर पहाडों से हुए भूस्खलन के चलते यातायात बंद हो गया था जिससे करीब 150 लोग फंस गए थे ।

उन्होंने बताया कि इनमें से ज्यादातर लोगों को देवीधुरा के रास्ते हल्द्वानी भेज दिया गया जबकि करीब दो दर्जन लोग अब भी अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए मार्ग से मलबा साफ होने का इंतजार कर रहे हैं ।

पांडे ने बताया कि सात स्थानों पर मंगलवार शाम तक वाहनों का आवागमन सुचारू कर दिया गया लेकिन विश्रामघाट में भारी मलबा आने तथा लगातार बारिश होने से मार्ग अभी साफ नहीं हो पाया है ।

उन्होंने बताया कि मंगलवार दोपहर बनलेख चौकी के पास भूस्खलन होने से एक केंटर और एक कार के खाई में गिरने से घायल हुए पांच यात्रियों को प्रशासन द्वारा अस्पताल में भर्ती कराए जाने के अलावा उनमें से प्रत्येक को 4300 रू की सहायता राशि दी गयी है ।

चंपावत जिले में बाराकोट तहसील के रोनीगाड में बारिश के दौरान एक महिला बह गयी जिसकी खोज के लिए भी तलाश और बचाव अभियान चलाया जा रहा है ।

मुख्यमंत्री धामी उत्तरकाशी में बादल फटने से प्रभावित गांवों मांडौ और कंकराडी की स्थिति का जायजा लेने के लिए बुधवार को वहां पहुंचे और प्रभावितों को सरकार से हर संभव मदद का भरोसा दिया ।

यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के साथ मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने मांडौ और कंकराडी गांवों के लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं ।

उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर उत्तरकाशी के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित को भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण करा गांव के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू करने के भी निर्देश दिए ।

इस दौरान, मुख्यमंत्री ने आपदा पीड़ितों को आपदा राहत की मदद से चार लाख रू के अतिरिक्त एक लाख रूपये की आर्थिक सहायता मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दिये जाने की भी घोषणा की

मांडौ गांव में रविवार देर रात बादल फटने से एक बालिका समेत एक परिवार की तीन महिलाओं की मृत्यु हो गयी थी जबकि निकटवर्ती कंकराडी गांव में एक व्यक्ति लापता हो गया था । बुधवार को उसका शव साडा गांव से बरामद हो गया जिसके साथ ही घटना में मरने वालों की संख्या चार हो गई ।



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पर्यटन, चारधाम से जुड़े लोगों की मदद के लिए 200 करोड़ रुपये का पैकेज

देहरादून, 21 जुलाई (भाषा) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोविड-19 से प्रभावित पर्यटन और चारधाम यात्रा से जुड़े लोगों के लिए 200 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की बुधवार को घोषणा की।

उत्तरकाशी जिले में आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कोविड-19 के कारण प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों और चारधाम यात्रा से जुड़े लोगों तथा उनके व्यवसाय पर सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, ऐसे में विषम आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद राज्य सरकार ऐसे लोगों के बैंक खातों में सीधे पैसे भेजेगी।

उन्होंने कहा कि इसके लिए लगभग 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, इससे ना सिर्फ पर्यटन क्षेत्र को लाभ होगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था भी सुधरेगी। इससे करीब 1.64 लाख परिवारों को लाभ होगा।

धामी ने कहा कि इस पैकेज में पर्यटन विभाग एवं अन्य विभागों में पंजीकृत पर्यटन की विविध गतिविधियों में संलग्न व्यवसायियों को 2000 रुपये प्रतिमाह की दर से छह माह तक आर्थिक सहायता दी जाएगी जिससे 50,000 लोगों को लाभ होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पर्यटन के तहत पंजीकृत टुअर ऑपरेटरों एवं एडवेंचर टुअर ऑपरेटरों को 10 हजार रुपये की दर से आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जायेगी जिसका लाभ 655 लोगों को मिलेगा। कुल पंजीकृत 630 रिवर गाइडस को भी 10,000 रुपये की दर से आर्थिक सहायता दी जाएगी। टिहरी झील के अन्तर्गत पंजीकृत कुल 93 बोट संचालकों को भी 10,000 रुपये की दर से आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जायेगी।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, पर्यटन विभाग में पंजीकृत व्यवसायियों को लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क में भी छूट प्रदान की जायेगी जिससे 600 लोग लाभान्वित होंगे। कुल 301 पंजीकृत राफ्टिंग एवं एयरों स्पोर्टस सेवा प्रदाताओं तथा टिहरी झील के 98 बोट संचालकों को भी लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क में छूट मिलेगी।

परिवहन विभाग के अन्तर्गत सार्वजनिक सेवायानों के चालक, परिचालक और क्लीनर को 2000 रुपये प्रतिमाह की दर से कुल छह माह तक आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी। इस योजना से 1,03,235 लोग लाभान्वित होंगे।

शहरी विभाग के अन्तर्गत नैनीताल जिले में नैनी, नौकुचियाताल, भीमताल, सातताल एवं सडियाताल में पंजीकृत कुल 549 बोट संचालकों को 10,000 रुपये की दर से आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी जबकि नैनी झील के अन्तर्गत बोट नवीनीकरण शुल्क में 671 लाभार्थियों को छूट प्रदान की जायेगी।

इसके अलावा, वित्त विभाग के अन्तर्गत वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली एवं दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना हेतु ऋण पर छह माह के लिये ब्याज प्रतिपूर्ति सहायता प्रदान की जायेगी।



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उच्च स्तरीय समिति करेगी देवस्थानम बोर्ड अधिनियम का परीक्षण

देहरादून, चार जुलाई (भाषा) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को कहा कि उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड अधिनियम के परीक्षण और उस पर 'सकारात्मक संशोधन' का सुझाव देने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है ।

अपने एक दिवसीय उत्तरकाशी दौरे में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सभी पक्षों से विचार विमर्श के उपरांत उनकी सरकार बोर्ड में सकारात्मक परिवर्तन या संशोधन के पक्ष में है ।

उन्होने कहा कि यह समिति अधिनियम के विधिक पहलुओं का आकलन कर यह सुनिश्चित करेगी कि इससे चारधाम यात्रा से जुडे हक—हकूकधारियों, पुजारियों तथा अन्य हितधारकों के पारंपरिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव न पडे ।

धामी ने कहा, ‘‘ समिति की संस्तुति के आधार पर बोर्ड की व्यवस्था के संदर्भ में अग्रिम निर्णय लिया जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि डेढ साल पहले इस अधिनियम के अस्तित्व में आने के बाद से धामों के तीर्थ पुरोहित देवस्थानम बोर्ड को लेकर लगातार अपनी बात कहते आ रहे हैं ।

धामी ने कहा कि अधिनियम के तहत रावल, पंडे, हक—हकूकधारी तथा स्थानीय हितधारकों के पारंपरिक, धार्मिक एवं आर्थिक अधिकारों को सुरक्षित रखने की बात कहे जाने के बावजूद इन पवित्र धामों के कतिपय हितधारकों के मन में संशय उत्पन्न हो रहा है कि सरकार कहीं धामों पर अधिकार तो नहीं करने जा रही है ।

उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा इन पर अधिकार करने की नहीं बल्कि वहां बिजली, पानी, आवास, साफ—सफाई और यात्रा को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने की है ।

चारों हिमालयी धामों, बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री, के तीर्थ पुरोहित लंबे समय से बोर्ड को भंग किए जाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं और उनका मानना है कि बोर्ड का गठन उनके अधिकारों का हनन है ।

देवस्थानम अधिनियम पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सरकार के कार्यकाल में पारित हुआ था जिसके तहत चार धाम सहित प्रदेश के 51 मंदिरों के प्रबंधन के लिए बोर्ड का गठन किया गया ।

मार्च में पद संभालने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने घोषणा की थी कि चारों धामों को देवस्थानम बोर्ड के दायरे से बाहर किया जाएगा और बोर्ड के गठन पर भी पुनर्विचार किया जाएगा । हांलांकि, वायदे को पूरा करने से पहले ही रावत की पद से विदाई हो गई ।



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