शनिवार, 25 दिसंबर 2021

कांग्रेस पर उठाए सवाल पर अमरिंदर ने ली थी मौज, अब हरीश रावत का पलटवार, कहा- कैप्टन को गलती का एहसास

देहरादून उत्तराखंड कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ने पंजाब के पूर्व सीएम के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। दरअसल, हरीश ने कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसको लेकर अमरिंदर ने उनकी मौज ले ली थी। रावत ने कहा है कि अमरिंदर को कांग्रेस छोड़ने की गलती का एहसास है। हरीश रावत ने कहा, 'मैं अमरिंदर सिंह जी की शुभकामनाओं को स्वीकार करता हूं। मुझे लगता है कि कहीं ना कहीं उन्हें भी एहसास हो रहा है कि कांग्रेस छोड़ना एक गलती थी। और मनीष तिवारी केवल अपने गुरु (अमरिंदर) की बातों का अनुसरण कर रहे हैं। जैसे खुद अमरिंदर अपने गुरु की बातों का पालन कर रहे हैं।' हालांकि रावत वे स्पष्ट नहीं किया कि वह कैप्टन अमरिंदर के किस गुरु का जिक्र कर रहे हैं। दरअसल, हरीश रावत ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि संगठन चुनाव में सहयोग का हाथ बढ़ाने की बजाय या मुंह फेर ले रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। हरीश रावत के इन आरोपों पर पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तंज कसते हुए ट्वीट किया। ट्वीट में अमरिंदर ने लिखा- आप जो बोएंगे वही काटेंगे। आपको भविष्य की कोशिशों के लिए शुभकामनाएं। गौरतलब है कि हरीश रावत के पंजाब प्रभारी रहते ही अमरिंदर और सिद्धू का विवाद खूब बढ़ा था। पंजाब प्रभारी बनते ही हरीश रावत ने नाराज होकर घर बैठे नवजोत सिंह सिद्धू को सक्रिय किया था। जिसके बाद से पंजाब कांग्रेस में दो धड़ा बन गया था। विवाद इतना बढ़ा था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। गौरतलब है कि हरीश रावत ने हाल ही में एक के बाद एक कई ट्वीट किए, जिसमें उन्होंने लिखा-चुनाव_रूपी_समुद्र है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। जिस समुद्र में तैरना है, सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं। जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि #हरीश_रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है!


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Uttarakhand Election 2022: चुनाव से पहले समझ लें उत्तराखंड विधानसभा का गणित, किस पार्टी के हैं कितने विधायक, क्‍या कहती है सर्वे रिपोर्ट?

देहरादून उत्‍तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव () होने हैं, लेकिन उससे पहले राज्‍य की दो सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस और भाजपा में घमासान मचा हुआ है। पूर्व मुख्‍यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता हरीश रावत जहां पार्टी हाईकमान से नाराज चल रहे हैं तो वहीं सतारूढ़ पार्टी भाजपा के मंत्री हरक सिंह ने कैब‍िनेट की बैठक में ही इस्‍तीफा देने का ऐलान कर दिया। हालांक‍ि अब दोनों दल विवाद खत्‍म का होने दावा कर रहे हैं, लेकिन इससे यह तो स्‍पष्‍ट है दोनों दलों में अंदरुनी कलह की स्‍थ‍िति है। चुनाव से ठीक पहले एक नजर डालते हैं उत्तराखंड विधानसभा की गणित क्‍या कह रही, किस पार्टी के कितने विधायक हैं। किस पार्टी के कितने विधायक वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 70 में से 56 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उससे पहले वहां कांग्रेस की सरकार थी। इस तरह देखें तो प्रदेश में भाजपा के कुल 56 विधायक हैं। प्रदेश में कांग्रेस के 10 विधायक ही हैं। इसे अलावा दो सीटों पर निर्दलीय जबक‍ि दो सीटें रिक्‍त हैं। एक सीट पर एंग्लो इंडियन समुदायक के नामित विधायक हैं। इस बार भी लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में इस बार भी मुख्‍य लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच ही दिख रही है। प्रदेश के युवाओं को साधने के लिए भाजपा ने इस साल 4 जुलाई को पुष्कर सिंह धामी को प्रदेश का मुख्‍यमंत्री बना दिया। जानकार मानते हैं क‍ि पार्टी को जातीय समीकरण साधने के लिए राजपूत चेहरे की जरूरत थी। इस लिहाज से भी पुष्कर सिंह धामी पार्टी के सभी मानकों पर फिट बैठे, इसलिए उन्‍हें पार्टी की कमान सौंपी गयी, और वे कम उम्र की सीएम हैं, बीजेपी युवाओं को साधने में लगी है। धामी दावा कर रहे हैं क‍ि इस बार बीजेपी में प्रदेश की 60 सीटें जीतेगी। इसके लिए वे कई जिलों की यात्रा भी कर रहे हैं। उधर कांग्रेस ने हरीश रावत की नाराजगी खत्‍म करने का दावा कर रही है। खबरों की मानें तो इस चुनाव भी वे कांग्रेस की तरफ से मुख्‍यमंत्री चेहरा वही होंगे। सर्वे के अनुसार प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्‍करएबीपी और सी वोटर द्वारा 13 नवंबर से 9 दिसंबर के बीच कराये गये सर्वे की रिपोर्ट भाजपा की परेशानी बढ़ा सकती है। सर्वे के मुताबिक उत्तराखंड के 40 फीसदी वोटर बीजेपी के पक्ष में हैं तो वहीं कांग्रेस के पक्ष में करीब 36 फीसदी मतदाता है। इसके अलावा 13 फीसदी मतदाता आम आदमी पार्टी की तरफ है। अन्य के खाते में करीब 11 फीसदी मतदाताओं का झुकाव है। सर्वे में साफ है कि उत्तराखंड के चुनावी रण में असल मुकाबला बीजेपी-कांग्रेस के बीच ही है। रिपोर्ट बताती है कि बीजेपी के खाते में 33 से 39 सीटें जाती हुई दिखाई दे रही है। इसके अलावा कांग्रेस के हिस्से में 29 से 35 सीटों का अनुमान जताया जा रहा। 1-3 सीटें आप के खाते में, जबकि अन्य के खाते में 0-1 सीट जाने का अनुमान है।


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शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021

उत्तराखंड में कांग्रेस के प्रचार अभियान की अगुवाई करुंगा: हरीश रावत ने राहुल से मुलाकात के बाद कहा

नयी दिल्ली, 24 दिसंबर (भाषा) उत्तराखंड कांग्रेस के विभिन्न गुटों के बीच गतिरोध समाप्त होने का संकेत देते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने शुक्रवार को कहा कि वह राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार अभियान का नेतृत्व करेंगे और पार्टी आला कमान के फैसले सभी को स्वीकार्य होंगे।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को रावत से तथा प्रदेश कांग्रेस के अन्य नेताओं से मुलाकात कर मतभेदों को सुलझाने का प्रयास किया। दो दिन पहले ही रावत ने विद्रोह का संकेत देते हुए कहा था कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अलग-थलग छोड़ दिया है।

राहुल गांधी से मुलाकात करके निकल रहे रावत ने कहा, ‘‘हम नेतृत्व के सामने अपनी समस्याओं को रखते हैं और वे जो भी फैसले लेते हैं, उन्हें स्वीकार करते हैं।’’

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं उत्तराखंड चुनाव में पार्टी के प्रचार अभियान की कमान संभालूंगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कदम कदम बढ़ाये जा, कांग्रेस के गीत गाये जा।’’ रावत ने कहा कि वह उत्तराखंड के भले के लिए काम करते रहेंगे।

रावत ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को निर्वाचित विधायकों से बात करने के बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता पर फैसला करने का विशेषाधिकार है।

उन्होंने कहा कि सब इसका सम्मान करते हैं और सभी कांग्रेस अध्यक्ष के फैसले को मानेंगे।

इससे पहले राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल से मुलाकात की। प्रदेश इकाई में उभरे गतिरोध के दौरान गोदियाल को रावत के साथ खड़े देखा गया। समझा जा रहा है कि रावत चाहते हैं कि उन्हें राज्य में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया जाए, लेकिन राहुल गांधी ने कहा है कि चुनाव के बाद निर्णय लिया जाएगा।

राहुल गांधी ने कांग्रेस के उत्तराखंड के प्रभारी देवेंद्र यादव से भी मुलाकात की। माना जाता है कि यादव के साथ रावत के संबंध ठीकठाक नहीं हैं।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने राज्य से पार्टी के अन्य नेताओं से भी मुलाकात की, जिनमें राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रीतम सिंह, पार्टी नेता यशपाल आर्य और उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय शामिल रहे।

बैठक में स्पष्ट किया गया कि चुनाव के बाद कांग्रेस के जीतने पर मुख्यमंत्री किसे बनाया जाएगा, इस बारे में फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी करेंगी।

यादव ने कहा कि बैठक में तय हुआ कि मुख्यमंत्री के बारे में फैसला बाद में किया जाएगा। गोदियाल ने कहा कि रावत को जैसा परिवेश चाहिए होगा, बनाया जाएगा और सब उनका समर्थन करेंगे।



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‘मुख्यमंत्री पद पर धामी की नियुक्ति के सकारात्मक नतीजे आए, विस चुनाव में करेंगे नेतृत्व’

नयी दिल्ली, 24 दिसंबर (भाषा) चुनावी राज्य उत्तराखंड में कांग्रेस जहां नेताओं की आपसी गुटबाजी में उलझी हुई है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में वापसी को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है क्योंकि उसके केंद्रीय नेताओं को लगता है कि मुख्यमंत्री के रूप में युवा चेहरे पुष्कर सिंह धामी की नियुक्ति ने कुछ ही महीनों में दो बार मुख्यमंत्री बदलने से पैदा हुई नकारात्मक स्थिति की काट में मदद पहुंचाई।

केंद्रीय मंत्री और उत्तराखंड के चुनाव प्रभारी प्रह्लाद जोशी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा विधानसभा का अगला चुनाव धामी के ही नेतृत्व में लड़ेगी और 2022 में पार्टी के सत्ता में आने के बाद वही राज्य की कमान संभालेंगे।

भाजपा के केंद्रीय नेता भी धामी की तारीफ के पुल बांध रहे हैं। पिछले दिनों रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने धामी के प्रदर्शन की तुलना भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की टी-20 मैचों में शानदार बल्लेबाजी के प्रदर्शन से की थी और जनता से उन्हें पूरे पांच साल के लिये मौका देने की अपील की थी।

पिछले दिनों उत्तराखंड में एक रैली को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा था कि धोनी जिस तरह टी-20 में धुआंधार बल्लेबाजी करते हैं, वैसा ही धुआंधार प्रदर्शन धामी भी कर रहे हैं और उन्हें ‘‘पूरे पांच साल तक’’ टेस्ट मैच का मौका मिलना चाहिए।

भाजपा महासचिव व उत्तराखंड के प्रभारी दुष्यंत गौतम से इस बारे में जब बात की गई तो उन्होंने कहा, ‘‘यह बिल्कुल स्पष्ट है कि भाजपा विधानसभा का आगामी चुनाव धामी के नेतृत्व में लड़ेगी। बहुत कम समय में उन्होंने विभिन्न कदम उठाए हैं और राज्य में विकास की गति को रफ्तार दी है।’’

उन्होंने कहा कि पार्टी ने एक युवा राज्य में एक युवा को मुख्यमंत्री बनाया है, जबकि कांग्रेस बंटी हुई है और उसमें चेहरे को लेकर आपसी खींचतान मची हुई है, वह भी विधानसभा चुनाव से पहले।

पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रभावी प्रशासन और खासकर कुछ ही महीनों के भीतर दो बार मुख्यमंत्री बदले जाने के बाद धामी ने जिस तरह से राजनीतिक स्थिति को संभाला, पार्टी में उनकी स्थिति मजबूत हुई है।

उक्त नेता ने कहा, ‘‘धामी ने जिस तरीके से राजनीतिक स्थितियों का प्रबंधन किया और वरिष्ठ नेताओं के साथ सामंजस्य बिठाया, इससे भाजपा फिर से मजबूत स्थिति मे आ गई है और सरकार बनाने की संभावना बढ़ गई है।’’

ज्ञात हो कि धामी इस साल जुलाई में राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। वह राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने तीरथ सिंह रावत का स्थान लिया था। त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे के बाद तीरथ सिंह रावत को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन चार महीने के भीतर ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।

पार्टी नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड की राजनीति में मुख्य तौर पर दो केंद्र हैं। कुमाऊं और गढ़वाल। धामी ने अभी तक के अपने कार्यकाल में दोनों ही क्षेत्रों का लगातार दौरा किया है और एक सामंजस्य बिठाने की कोशिश की है।

भाजपा के कई नेता पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह चुनावों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे और उम्मीदवारों के चयन में उन्हें महत्व दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह हल्द्वानी में एक रैली को संबोधित कर सकते हैं।



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चुनाव टालने के सुझाव पर सुशील चंद्रा ने कहा : अगले हफ्ते के उप्र दौरे के बाद उचित फैसला

देहरादून, 24 दिसंबर (भाषा) ओमीक्रोन के कारण कोविड की तीसरी लहर की आशंका के चलते उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव टालने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सुझाव के एक दिन बाद, मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा ने शुक्रवार को कहा कि अगले सप्ताह उनकी उप्र की यात्रा के बाद इस मुद्दे पर कोई उचित फैसला किया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा ने उच्च न्यायालय की टिप्पणी को लेकर यहां पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में संवाददाताओं से कहा, "मैं अगले हफ्ते उत्तर प्रदेश का दौरा करूंगा। स्थिति की समीक्षा करने के बाद स्थिति के अनुरूप उचित फैसला किया जाएगा।"

चंद्रा से पूछा गया था कि क्या चुनाव स्थगित करना संभव है क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोरोना वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जतायी है।

चंद्रा ने उत्तराखंड की स्थिति पर कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव एसएस संधू से राज्य में ओमीक्रोन के मामलों के बारे में पूछा था और उन्हें बताया गया कि राज्य में कोविड -19 के नवीनतम स्वरूप का केवल एक मामला था।

चंद्रा ने कोविड के कारण आयोग द्वारा उठाए गए विभिन्न सुरक्षा उपायों का भी जिक्र किया लेकिन यह आश्वासन भी दिया कि वायरस के प्रसार पर काबू पाने के लिए “संवैधानिक स्थिति” के अनुसार जो कुछ भी आवश्यक होगा, वह किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोविड-19 की तीसरी लहर की बढ़ती आशंका के मद्देनजर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से चुनावी रैलियों पर रोक लगाने तथा चुनावों को टालने पर विचार करने का आग्रह किया है।



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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने दलित वर्ग की रसोइया को ‘हटाने’ के मामले की जांच के आदेश दिये

देहरादून, 24 दिसंबर (भाषा) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को चंपावत जिले के सरकारी स्कूल में दलित वर्ग की एक महिला रसोइया को कथित तौर पर हटाए जाने के मामले की जांच के आदेश दिये। अगड़ी जाति के छात्रों ने महिला द्वारा पकाया गया खाना खाने से इनकार कर दिया था।

धामी ने कुमाऊं के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) नीलेश आनंद भरने से सुखीढांग में स्कूल का दौरा कर घटना की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि डीआईजी को घटना के बारे में अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखने को भी कहा गया है।

इस महीने की शुरुआत में ‘भोजनमाता’ के रूप में नियुक्ति के एक दिन बाद अगड़ी जाति के छात्रों ने महिला की जाति के कारण उनके द्वारा बनाया गया भोजन ग्रहण करना बंद कर दिया और घर से अपना खाना टिफिन बॉक्स में लाना शुरू कर दिया। छात्रों के अभिभावकों ने भी ‘भोजनमाता’ के रूप में दलित वर्ग की महिला की नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी।

अधिकारियों ने पूर्व में कहा कि महिला की नियुक्ति रद्द कर दी गई क्योंकि यह पाया गया कि नियुक्ति में मानदंडों का पालन नहीं किया गया था।



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हरिद्वार में धर्म संसद में नफरत भरे भाषण दिये जाने को लेकर प्राथमिकी दर्ज

देहरादून, 24 दिसंबर (भाषा) हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए कथित तौर पर नफरत भरे भाषण देने के सिलसिले में जितेन्द्र नारायण त्यागी एवं अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह जानकारी शुक्रवार को पुलिस ने दी।

इस महीने की शुरुआत में धर्म परिवर्तन करने के बाद हिंदू बने त्यागी एवं अन्य वक्ताओं पर आरोप है कि पिछले हफ्ते आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने अत्यंत भड़काऊ भाषण दिए और इसके कुछ वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर डाले गए हैं। हिंदू बनने से पहले त्यागी का नाम वसीम रिजवी था।

हरिद्वार कोतवाली थाने के एसएचओ रकिंदर सिंह ने कहा कि भादंसं की धारा 153ए (धर्म, जाति, जन्मस्थान, आवास, भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत बृहस्पतिवार को प्राथमिकी दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि मामले की जांच चल रही है।

हरिद्वार के ज्वालापुर इलाके के एक निवासी की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर वीडियो क्लिप साझा किए जाने के बारे में पूछने पर अधिकारी ने कहा कि पुलिस के पास अभी तक घटना की कोई फुटेज नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक वरिष्ठ नेता ने बृहस्पतिवार को कार्यक्रम के आयोजकों एवं वक्ताओं के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने की मांग की थी। पिछले हफ्ते हरिद्वार के वेद निकेतन धाम में तीन दिनों के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ था।

टीएमसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता साकेत गोखले ने ज्वालापुर थाने में इस सिलसिले में शिकायत दर्ज कराई और एसएचओ से कहा कि मामले में 24 घंटे के अंदर प्राथमिकी दर्ज की जाए।

गोखले ने शिकायत की प्रति ट्विटर पर साझा की और धर्म संसद के आयोजकों तथा कार्यक्रम में मुसलमानों एवं अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने वालों को 27 दिसंबर तक गिरफ्तार करने की समय सीमा दी थी।

एसएचओ को दी गई शिकायत में गोखले ने कहा कि इसमें संलिप्त लोगों के खिलाफ अगर 24 घंटे के अंदर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती है, तो न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दी जाएगी।

कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने कथित तौर पर भड़काऊ एवं उत्तेजक भाषण दिए और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की हत्या करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने लोगों से हथियार उठाने और एक पूर्व प्रधानमंत्री को गोली मारने की भी अपील की।

धर्म संसद का कथित तौर पर आयोजन जूना अखाड़ा के यति नरसिंहानंद गिरि ने की थी, जिन पर विगत में भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत भरे भाषण देने और हिंसा भड़काने के आरोप हैं।



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