मंगलवार, 2 नवंबर 2021

उत्तराखंड में 78.46 लाख मतदाता

देहरादून, दो नवंबर (भाषा) उत्तराखंड में प्रकाशित ताजा निर्वाचक नामावली के अनुसार प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 78.46 लाख है ।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी सौजन्या ने यहां संवाददाताओं को बताया कि एक जनवरी 2021 की अर्हता तिथि के आधार पर प्रदेश में 78.15 लाख मतदाता हैं और एक साल में मतदाताओं की संख्या में प्रदेश में 30 हजार 808 मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि हुई ।

हांलांकि, उन्होंने बताया कि सोमवार को प्रकाशित निर्वाचक नामावली पर 30 नवंबर तक दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकती हैं तथा एक जनवरी 2022 को 18 वर्ष या अधिक की आयु पूर्ण करने वाले नागरिक इस अवधि में दावा प्रस्तुत कर अपना नाम जुडवा सकते हैं ।

उन्होंने बताया कि दावों और आपत्तियों का 20 दिसंबर तक निस्तारण करने के बाद पांच जनवरी 2022 को नामावली का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा । उत्तराखंड में अगले साल की शुरूआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।

अधिकारी ने बताया कि इस बार 1200 से अधिक मतदाता वाले मतदेय स्थलों को विभाजित कर यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी मतदाता को अपने आवास से मतदेय स्थल तक पहुंचने के लिए दो किमी से अधिक पैदल दूरी तय न करनी पड़े । उन्होंने बताया कि पहले मतदेय स्थलों की संख्या 11024 थी जो अब बढकर 11647 हो गई है।

सौजन्या ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के नवीनतम दिशा निर्देशों के अनुसार, 80 वर्ष से अधिक आयु के तथा दिव्यांग मतदाताओं को पोस्टल बैलट से मतदान की सुविधा प्रदान की जाएगी । नई नामावली के अनुसार प्रदेश में 80 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं की संख्या 1,65,113 जबकि दिव्यांग मतदाताओं की संख्या 53,900 है ।



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लक्ष्मणझूला में गुजरात के तीन पर्यटक डूबे

देहरादून, दो नवंबर (भाषा) उत्तराखंड के पौड़ी जिले के लक्ष्मणझूला क्षेत्र में गुजरात के एक पिता पुत्री समेत तीन व्यक्ति गंगा नदी के तेज बहाव में बह गए । पुलिस ने इसकी जानकारी दी ।

पुलिस ने बताया कि सोमवार देर शाम सोनल (18) गंगा में नहाने के दौरान बहने लगी जिसे बचाने के लिए पहले उसके पिता अनिल (42) और फिर उसकी नानी तारूलता (52) भी नदी में उतरे लेकिन वे सभी नदी के तेज बहाव में बह गए ।

पास ही मौजूद परिजनों से इसकी सूचना मिलने पर पुलिस ने तलाशी एवं बचाव अभियान चलाया और तारूलता का शव बरामद कर लिया । अन्य दोनों की तलाश की जा रही है ।

पुलिस ने बताया कि हादसे का शिकार हुए तीनों व्यक्ति गुजरात के राजकोट के रहने वाले थे और परिजनों के साथ यहां घूमने आए थे ।



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Uttarakhand News: उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी को अपने पाले में करेगी BJP, चुनाव में लगा सकती है दांव

देहरादून कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के तो मुख्यमंत्री रहे ही, केंद्र में कई बार महत्वपूर्ण मंत्रालयों के मंत्री रहे। बाद के वर्षों में यूपीए कार्यकाल के दौरान उन्हें आंध्र प्रदेश का राज्यपाल भी बनाया गया। राजनीतिक गलियारों में माना जाता है कि अगर 1991 का लोकसभा चुनाव वह नहीं हारते, तो नरसिम्हा राव की जगह वही प्रधानमंत्री होते। खैर ये सब अतीत की बातें हैं। ताजा घटनाक्रम यह है कि सियासत के कई प्रतीकों को जिस तरह से बीजेपी अपने पाले में करके कांग्रेस को चिढ़ाती आई है, वैसा ही वह नारायण दत्त तिवारी को लेकर भी करने जा रही है। नारायण दत्त तिवारी को 'पहाड़ पुत्र' कहा ही जाता है। उत्तराखंड के वह अब तक के अकेले मुख्यमंत्री हुए हैं, जिन्होंने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया, वरना वहां पांच साल में तीन सीएम का औसत बन चुका है। उत्तराखंड में उनकी साख अब भी बरकरार है। अब जबकि राज्य में अगले कुछ महीनों के अंदर चुनाव होने हैं, बीजेपी उन पर दांव लगा सकती है। पिछले महीने की 18 तारीख को उनकी जयंती और पुण्यतिथि दोनों थी। अमूमन दूसरी पार्टी के नेताओं के नाम पर सरकारें नामकरण करने से बचती हैं जब तक कोई खास वजह न हो, लेकिन सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस मौके पर पंतनगर औद्योगिक क्षेत्र का नामकरण नारायण दत्त तिवारी के नाम पर किया। इसके बाद से ही यह चर्चा शुरू हो गई है कि बीजेपी अब नारायण दत्त तिवारी को भी अपने पाले में करने जा रही है। बीजेपी ने यह भी कहा कि 'पहाड़ पुत्र' कांग्रेस में जितने सम्मान के हकदार थे, कांग्रेस नेतृत्व ने वह उन्हें नहीं दिया। इस तरह की चर्चा है कि धामी सरकार जल्द ही नारायण दत्त तिवारी के नाम पर कुछ अन्य योजनाओं की शुरुआत कर सकती है।


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सोमवार, 1 नवंबर 2021

उत्तराखंड पहुंचे सीएम चन्नी व सिद्धू ने दिया 'ऑल इज वेल' का संदेश, हरीश रावत का आया बड़ा बयान

देहरादून पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी मंगलवार को देहरादून पहुंचे। उनके साथ पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू भी वहां पहुंचे। विधानसभा चुनाव में पार्टी को एकजुट कर चुनावी मैदान में उतरने की कोशिशों के रूप में इसे देखा जा रहा है। पंजाब में पिछले दिनों एडवोकेट जनरल एपीएस दयोल की नियुक्ति ने नवजोत सिद्धू को नाराज किया था। सोमवार को एजी ने सीएम चन्नी को अपना इस्तीफा सौंपा। एजी के इस्तीफे को पंजाब में सिद्धू के पावर गेम में जीत के रूप में पेश किया जा रहा है। सिद्धू की मांग जैसे ही पूरी हुई। वे सीएम चन्नी के साथ देहरादून पहुंच गए। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी व वरिष्ठ नेता की। साथ ही, संदेश दे दिया कि अब पंजाब कांग्रेस में ऑल इज वेल जैसी स्थिति है। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी और विधानसभा अध्यक्ष राणा केपी सिंह ने भी उनके साथ मौजूद रहे। में पूजा का भी है कार्यक्रम उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पिछले दिनों केदारनाथ धाम की यात्रा की थी। अब पंजाब कांग्रेस का भी प्रतिनिधिमंडल भी केदारनाथ धाम में पूजा-अर्चना करने जाएगा। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने रावत से मुलाकात के बाद कहा कि कार्तव्य पथ से बड़ा कोई 'धर्म पथ' नहीं। धर्म गरीबों का पेट भर रहा है, खुशियां फैला रहा है। यह महादेव का संदेश है। इसलिए मैं यहां आशीर्वाद लेने आया था कि मैं अपने कल्याण को पंजाब के कल्याण के साथ मिला सकूं, कि पंजाब और पंजाबियों की जीत हो। आज केदारनाथ जाएंगे। पंजाब कांग्रेस में अब सब ठीक पंजाब कांग्रेस के प्रभारी ने इस मुलाकात के बाद कहा कि आप सबने देखा, पंजाब में अब सब ठीक है। मैंने पहले ही कहा था, पार्टी में सब ठीक है। सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है, हम चुनौतियों से पार पा रहे हैं। विश्वास है कि यह जारी रहेगा और हरीश चौधरी ऐसे व्यक्ति हैं, जिनसे आप सीख सकते हैं। इस प्रकार की स्थिति हमें पंजाब में जीत की ओर ले जा रही है। एक बार फिर पंजाब में कांग्रेस जीत दर्ज करने जा रही है।


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देहरादून में उत्तराखंड के पहले इंटरनेट एक्सचेंज का उद्घाटन

देहरादून, एक नवंबर (भाषा) इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सोमवार को देहरादून में उत्तराखंड के पहले इंटरनेट एक्सचेंज का उद्घाटन किया ।

राज्यसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी के साथ ऑनलाइन माध्यम से यहां आइटी पार्क में एक्सचेंज का उद्घाटन करने के बाद चंद्रशेखर ने कहा कि यह एक्सचेंज न केवल काम करने वाले युवाओं को लाभान्वित करेगा बल्कि ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों को भी तेज गति इंटरनेट की सुविधा मिलेगी ।

उत्तराखंड के विकास के लिए केंद्र की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए चंद्रशेखर ने घोषणा की कि प्रदेश में जल्द ही अगला इंटरनेट एक्सचेंज नैनीताल जिले में शुरू किया जाएगा ।

बलूनी ने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि प्रदेश के हर जिले में इंटरनेट एक्सचेंज स्थापित हो जिससे पर्वतीय और दूरदराज के क्षेत्रों में भी लोगों को इंटरनेट की सुविधा मिल सके।

बलूनी ने चार अक्टूबर को राज्य में इंटरनेट की गति बढ़ाए जाने के लिए इंटरनेट एक्सचेंज शुरू करने का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री के सामने रखा था जिसे उन्होंने मंजूरी दे दी थी।



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केदारनाथ में भाजपा नेताओं को पुरोहितों ने दिखाए काले झंडे, त्रिवेंद्र बिना दर्शन किए लौटे

देहरादून, एक नवंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच नवंबर के दौरे से पहले केदारनाथ में सोमवार को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश के कैबिनेट मंत्री धनसिंह रावत और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक को देवस्थानम बोर्ड को लेकर आंदोलनरत तीर्थ पुरोहितों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा।

त्रिवेंद्र सिंह को तीर्थ पुरोहितों ने मंदिर तक भी नहीं पहुंचने दिया और उन्हें बाबा के दर्शन किए बिना ही उल्टे पांव लौटना पड़ा। तीनों नेता शुक्रवार को प्रस्तावित प्रधानमंत्री के दौरे की व्यवस्था देखने केदारनाथ पहुंचे थे।

पूर्व मुख्यमंत्री के केदारनाथ पहुंचने पर हेलीपैड से मंदिर के रास्ते में तीर्थ पुरोहितों ने उन्हें काले झंडे दिखाए और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उन्हें वहां से वापस जाने को मजबूर कर दिया।

इससे पहले, एक अन्य हैलीकॉप्टर से वहां पहुंचे धनसिंह और कौशिक को भी मंदिर परिसर में पुरोहितों का भारी विरोध झेलना पड़ा लेकिन उन्होंने किसी तरह अंदर पहुंच कर भगवान केदारनाथ के दर्शन और पूजा अर्चना की।

गौरतलब है कि चारधाम सहित प्रदेश के 51 मंदिरों के रखरखाव और प्रबंधन के लिए चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के गठन के प्रावधान वाला अधिनियम दो साल पहले त्रिवेंद्र सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में ही राज्य विधानसभा में पारित किया गया था।

चारों धामों—बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहितों का आरोप है कि बोर्ड का गठन उनके पारंपरिक अधिकारों का हनन है और इसे भंग करने की मांग को लेकर वे लंबे समय से आंदोलनरत हैं।

पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने के बाद जुलाई में उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड अधिनियम के परीक्षण और उसमें 'सकारात्मक संशोधन' का सुझाव देने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। इस समिति ने पिछले महीने अपनी अंतरिम रिपोर्ट दे दी, लेकिन वह अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

केदारानाथ के एक पुरोहित संतोष त्रिवेदी ने भाजपा सरकार को 'धर्मविरोधी' बताते हुए कहा कि चारों धामों में तीर्थ पुरोहितों का सब्र अब खत्म हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री धामी ने 11 सितंबर की बैठक में उन्हें 30 अक्टूबर तक सब्र रखने को कहा था और इसलिए अब उग्र आंदोलन शुरू कर दिया गया है।

बाद में, कौशिक ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड के बारे में उनकी पुरोहितों के साथ बातचीत हुई है जिसमें उन्होंने पूजा पाठ की व्यवस्था को लेकर कुछ शंका प्रकट की है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने उन्हें आश्वासन दिया कि हम उनकी बात को मुख्यमंत्री के सामने प्रभावशाली ढंग से रखेंगे।’’

इस बीच, केदारनाथ जाकर भी भगवान भोले के दर्शन नहीं कर सके त्रिवेंद्र सिंह ने ट्वीट किया, ‘‘बाबा केदार के अंतर्दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और सभी के मंगल की कामना की।’’

कांग्रेस महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पुरोहितों को सत्ता में आने पर देवस्थानम बोर्ड को भंग करने का पहले ही आश्वासन दे चुके हैं।

वहीं, ताजा घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि भाजपा नेताओं और मंत्रियों को काले झंडे दिखाकर तीर्थ पुरोहितों ने अभी ट्रेलर दिखाया है और आगे पूरी पिक्चर बाकी है जो चुनाव में दिखेगी।

उधर, उत्तरकाशी में भी देवस्थानम बोर्ड भंग करने की मांग को लेकर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के व्यापारिक प्रतिष्ठान सोमवार को पूरी तरह बंद रहे जबकि पुरोहितों ने विरोध में श्रद्धालुओं का पूजा पाठ भी नहीं कराया।

पुरोहितों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इस पर निर्णय नहीं किया तो भाजपा को उग्र आंदोलन के साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव में भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।



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रविवार, 31 अक्टूबर 2021

Ghasyari Kalyan Yojana: चुनावी मौसम में बीजेपी ने उत्तराखंड में क्यों खेला 'घस्यारी' योजना का दांव, क्या बदलेगी इससे सियासी तस्वीर?

देहरादून उत्तराखंड में चुनाव से ठीक पहले महिला मतदाताओं को ध्यान में रखकर 'मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना' की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को शुरुआत की। शुरू से ही इस योजना का क्रेडिट लेने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत के बीच होड़ दिख रही है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इस योजना का श्रेय लेने में शामिल हो गए। पुराने अखबारों की खबरों की कतरनें जोड़कर योजना को त्रिवेंद्र सिंह की सौगात बताने संबंधी पोस्टर चारों तरफ देखे गए । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना का श्रेय धन सिंह रावत को दिया, जबकि प्रदेश संगठन कह रहा है कि यह योजना बीजेपी की है। राज्य सरकार देगी खास किट इस योजना के तहत पशुपालक परिवार की हर महिला को राज्य सरकार की ओर से किट दी जाएगी, जिसमें दो कुदाल, दो दरांती, एक पानी की बोतल और एक खाने का टिफिन शामिल होगा। इस किट की कीमत करीब 1500 रुपये होगी। वैसे तो योजना में उत्तराखंड के गांवों में 7771 सहकारी केंद्रों के माध्यम से कम दरों पर चारे की बिक्री की भी बात है, लेकिन राजनीतिक विवाद किट और योजना के नाम को लेकर है। इससे विपक्ष को यह कहने का मौका मिला है कि जब देश-दुनिया की महिलाएं लड़ाकू विमान उड़ाने की तैयारी कर रही है तो उत्तराखंड में बीजेपी महिलाओं को सिर्फ कुदाल और दरांती तक ही सीमित कर देना चाहती है। कांग्रेस के चुनाव अभियान के प्रमुख हरीश रावत का कहना है कि देश की महिलाएं अपने घर के कामों के साथ ही खेत में काम करती हैं, लेकिन उनके काम के आधार पर उन्हें संबोधित नहीं दिया जाना चाहिए। योजना का नाम घस्यारी रखना महिलाओं का अपमान है। रावत ने कहा कि जिस राज्य की पहचान बछेंद्री पाल, जियारानी, तीलू रौतेली, गौरा देवी जैसी महिलाओं से हो, वहां की महिलाओं की पहचान बीजेपी घस्यारी तक सीमित कर देना चाहती है। बीजेपी ने क्यों खेला दांव? योजना को लेकर राजनीतिक विवाद चाहे जो भी है, लेकिन बीजेपी ने जमीनी हकीकत को देखते हुए इस योजना की ओर कदम बढ़ाया है। बीजेपी के एक नेता ने एनबीटी के साथ ऑफ द रेकॉर्ड बातचीत में कहा, 'यह सही है कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। उन्हें बढ़ना भी चाहिए, लेकिन प्रदेश की जमीनी हकीकत यह है कि यहां बड़ी तादाद पशुपालक परिवारों की है। हमने महिलाओं के कल्याण के लिए इस योजना की शुरुआत की है। हमारे राज्य में घस्यारी कोई अपमानजनक शब्द नहीं है। यह सामान्य संबोधन है।' यूपी में प्रियंका गांधी की ओर से 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने के ऐलान का असर उत्तराखंड में भी दिखने लगा है। महिलाएं हाथ से न निकल जाएं इसलिए बीजेपी ने राज्य की सभी सीटों पर महिलाओं को सहप्रभारी बना दिया है। घस्यारी कल्याण योजना से भी बीजेपी को बहुत उम्मीदें हैं। राज्य की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी के प्रमुख आजीविका कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। इस वजह से यह योजना गेम चेंजर बन सकती है। दुधारू पशु की प्रजातियों का 80 प्रतिशत से ज्यादा स्वामित्व सीमांत एवं छोटे किसान के पास है, जिनकी आजीविका के मुख्य स्त्रोतों में दुग्ध उत्पादन एक महत्वपूर्ण व्यवसाय है। उम्मीद की एक वजह यह भी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य में महिलाओं की आबादी 49.48 लाख है। राज्य की 71 फीसदी महिला आबादी गांवों की है। राज्य में 64 फीसदी महिलाएं अपने खेतों में कृषि करती हैं, वहीं 8.84 फीसदी महिलाएं दूसरों के खेतों में परिश्रम करती हैं। जनपद अल्मोड़ा में किए गए अध्ययन से पता चला है कि चारा काटने के लिए महिलाओं को 8 से 10 घंटे पैदल चलना पड़ता है। इसकी वजह से उन्हें पीठ, कमर, घुटने और गर्दन में दर्द का सामना करना पड़ता है। सामान्यतः पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालकों द्वारा पारंपरिक चारा उपयोग में लाया जाता है, जिसके केवल 10 से 15 ही मूल पोषक तत्व होते है। पौष्टिक और गुणवत्तायुक्त चारे की कमी से दुग्ध उत्पादन में लगातार कमी आ रही है, जिसके कारण पर्वतीय कृषकों की पशुपालन में रुचि कम हो रही है। पूर्व में एनडी तिवारी सरकार के वक्त राज्य में लाइवस्टॉक डेवलेपमेंट बोर्ड ने पशु चारे के समस्या के हल को लेकर कलसी, ऋषिकेश के श्यामपुर और रुद्रपुर में पचास मीट्रिक टन प्रतिदिन उत्पादन देने वाले कॉम्पेक्ट फीड ब्लॉक के प्लांट लगाए थे। अगर यह योजना लोगों को पसंद आ गई तो इससे राज्य में बीजेपी सत्ता में टिकी रह सकती है।


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