रविवार, 26 सितंबर 2021

उत्तराखंड : हाथियों ने युवक को कुचल कर मारा

ऋषिकेश, 26 सितंबर (भाषा) ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर शिवपुरी में राफ्टिंग कैंप क्षेत्र में हाथियों ने गंगा नदी के किनारे एक युवक को कुचल दिया जिससे उसकी मौत हो गई।

मुनि की रेती क्षेत्र के पुलिस निरीक्षक कमल मोहन भंडारी ने बताया कि संभवत: शनिवार देर रात हुई घटना की सूचना रविवार सुबह मिली। मृतक की पहचान देहरादून के विकासनगर निवासी मयंक डोभाल के रूप में हुई है। वह शिवपुरी क्षेत्र में गंगा किनारे कैंप का संचालन करता था।

जिस क्षेत्र में दुर्घटना हुई है, वह सदियों से हाथियों का गलियारा रहा है जहाँ से वे गंगा नदी में पानी पीने के लिए आते रहे हैं। सर्दियों में गंगा नदी का जलस्तर कम होने पर इसी रास्ते से हाथियों के झुंड नदी पार करके पौड़ी गढ़वाल की तरफ चले जाते हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में गंगा के दोनों तटों पर राफिटंग जैसी साहसिक पर्यटन की गतिविधियां होने से वन्य जीव व इंसानों के बीच संघर्ष की स्थिति बन रही है जो चिंता का विषय है।



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उत्तराखंड में बने उत्तर भारत के सबसे बड़े पामेटम का उद्घाटन

देहरादून, 26 सितंबर (भाषा) हल्द्वानी में रविवार को उत्तराखंड के पहले और उत्तर भारत के सबसे बड़े पामेटम का उद्घाटन किया गया।

पामेटम, पेड़ की किस्म 'पाम' की बागबानी करने का स्थान है।

पामेटम का उद्घाटन कुमांऊ विश्वविद्यालय, नैनीताल के वनस्पति विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉक्टर ललित तिवारी द्वारा किया गया।

मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि उत्तराखंड वन विभाग की शोध शाखा द्वारा केंद्र सरकार की कैम्पा योजना के तहत विकसित यह पामेटम करीब तीन एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। उन्होंने बताया कि इस पामेटम को तीन साल में करीब 16 लाख रुपये की लागत से विकसित किया गया है।

यहां पाम की 100 विभिन्न प्रजातियां हैं जिनमें से 20 प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर या खतरे में पहुंच चुकी श्रेणी में आती हैं। पामेटम में मौजूद ताकील पाम उत्तराखंड में पाई जाने वाली स्थानीय प्रजाति है।

चतुर्वेदी ने बताया कि यह पाम की एकमात्र ऐसी प्रजाति है जो शून्य से नीचे तापमान में भी जीवित रह सकती है और उत्तराखंड जैवविविधता बोर्ड ने इसे खतरे की स्थिति में पहुंच चुकी प्रजाति घोषित किया हुआ है।

पामेटम को स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य विभिन्न पाम प्रजातियों के संरक्षण को बढावा देना, उनके बारे में और अनुसंधान करना तथा उनके महत्व और पारिस्थितिकीय भूमिका के बारे में जागरुकता फैलाना है।

चतुर्वेदी ने बताया कि पाम वृक्षों से कई तरह के खाद्य पदार्थ जैसे नारियल, खजूर, सुपारी और पाम तेल प्राप्त होते हैं। इसके अलावा, इनडोर और आउटडोर सजावट में भी इनका खास महत्व है।



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उत्तराखंड में बना उत्तर भारत का सबसे बड़ा पामेटम

देहरादून, 26 सितंबर (भाषा) हल्द्वानी में उत्तराखंड का पहला और उत्तर भारत का सबसे बड़ा पामेटम विकसित किया गया है।

पामटेम, पेड़ की किस्म 'पाम' की बागबानी करने का स्थान है।

मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने रविवार को बताया कि उत्तराखंड वन विभाग की शोध शाखा द्वारा कैम्पा योजना के तहत विकसित यह पामेटम तीन एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है और यहां पाम की 100 विभिन्न प्रजातियों के पेड़ लगे हुए हैं। इनमें से 20 प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं या खतरे की स्थिति में पहुंच चुकी श्रेणी में आती हैं।

पामेटम में मौजूद ताकील पाम उत्तराखंड में पाई जाने वाली स्थानीय प्रजाति है। चतुर्वेदी ने बताया कि यह पाम की एकमात्र ऐसी प्रजाति है जो शून्य से नीचे तापमान में भी जीवित रह सकती है और उत्तराखंड जैवविविधता बोर्ड ने इसे खतरे की स्थिति में पहुंच चुकी प्रजाति घोषित किया हुआ है।



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उत्तराखंड में जनांकिकी परिवर्तन बना चिंता का विषय

देहरादून, 26 सितंबर (भाषा) उत्तराखंड में पिछले कई वर्षों से जनसंख्या के सामुदायिक अनुपात में आ रहा बदलाव स्थानीय जनता के बीच बहस का मुद्दा रहा है लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रदेश सरकार ने इस पर अधिकारियों को कार्रवाई करने को कहा है।

पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने इस मुद्दे पर चिंता प्रकट की और कहा कि यह जांच किसी समुदाय विशेष को ‘निशाना बनाकर’ नहीं की जा रही है। उन्होंने संवाददाताओं को बताया, ‘‘सम्यक विचार करने के बाद ही सरकार ने यह कदम उठाया है। पलायन और जनसंख्या असंतुलन चिंता का विषय है।’’

जनांकिकी परिवर्तन को लेकर कार्रवाई की मांग भाजपा के अंदर से भी समय-समय पर उठती रही है। उत्तराखंड भाजपा के महासचिव अजेंद्र अजय भी पहाड़ी क्षेत्रों में ‘लव जिहाद’ और एक विशेष समुदाय के लोगों के धर्मस्थलों की संख्या में वृद्धि को लेकर मुख्यमंत्री धामी से मिलकर चिंता जता चुके हैं।

लैंसडौन के भाजपा विधायक दिलीप सिंह रावत ने कहा कि इस समय हिंदू संस्कृति के खिलाफ एक बड़ा युद्ध चल रहा है और हम लोग अपनी संस्कृति बचाने के लिए संघर्षरत हैं। उन्होंने कहा कि वह शुरू से ही कहते आ रहे हैं कि कुछ संस्थाएं धर्मांतरण के काम में लगी हैं।

हालांकि, कांग्रेस ने इसे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा द्वारा जनता को भ्रमित करने का प्रयास बताया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि यह राज्य सरकार द्वारा अपनी नाकामी से जनता का ध्यान हटाने का प्रयास है।

हाल में अल्मोड़ा जिले में सामने आई एक घटना में एक स्थानीय लड़की को अल्पसंख्यक समुदाय के चार युवकों के साथ देखे जाने के बाद लोगों ने भारी विरोध किया था जिसके बाद पुलिस ने बहलाने फुसलाने और अपहरण के प्रयास के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया था। इससे पहले, टिहरी के घनसाली क्षेत्र में भी ऐसी ही एक घटना के बाद तनाव फैल गया था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम उजागर नहीं किए जाने की शर्त पर बताया कि पिछले कुछ सालों में दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में भी ऐसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं जिससे तनाव पैदा हो रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में पुलिस को सतर्क किया गया है और खुफिया जानकारी मांगी जा रही है ताकि ऐसे स्थानों को चिह्नित किया जा सके जहां सांप्रदायिक सौहार्द के बिगड़ने की आशंका है।

उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को पुलिस महानिदेशक, सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों तथा जिलाधिकारियों को इस प्रकार के मामलों के निदान के लिए कार्रवाई करने को कहा है। अधिकारियों को कहा गया है कि प्रदेश के कुछ विशेष क्षेत्रों में जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि होने से जननांकीय परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।

इस संबंध में एहतियाती कदम उठाने के निर्देश देते हुए प्रत्येक जिले में एक जिलास्तरीय समिति गठित करने को कहा गया है जो इस समस्या के निदान के लिए अपने सुझाव देगी। इसके अलावा संबंधित क्षेत्रों में शांति समितियों का गठन करने, समय-समय पर इन समितियों की बैठकें आयोजित करने, क्षेत्रों का चिह्नित कर असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोर करवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।



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शनिवार, 25 सितंबर 2021

उत्तराखंड : पंजीकृत यात्री उन यात्रियों की जगह दर्शन कर सकते हैं जो नियत तारीख को नहीं पहुंचे

देहरादून, 25 सितंबर (भाषा) उत्तराखंड के धार्मिक मामलों के विभाग ने शनिवार को कहा कि चारधाम के लिए पंजीकृत यात्री उन लोगों के स्थान पर दर्शन कर सकते हैं जो देवस्थानम बोर्ड के पोर्टल पर पंजीकृत कराने के बावजूद निर्धारित तारीख पर नहीं पहुंचते।

धार्मिक और तीर्थयात्री मामलों के सचिव हरी चंद्र सेमवाल ने कहा कि यह आदेश उन शिकायतों के मद्देनजर जारी किया गया है कि चार मंदिरों के लिए निर्धारित दैनिक कोटे से भी कम श्रद्धालु दर्शन कर पा रहे हैं।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देशों पर 18 सितंबर से शुरू हुई चारधाम यात्रा के लिए श्रद्धालुओं की अधिकतम दैनिक संख्या निर्धारित कर दी गई है जिसके तहत प्रतिदिन बद्रीनाथ में एक हजार, केदारनाथ में 800, गंगोत्री में 600 और यमुनोत्री में 400 श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी गई है।

गढ़वाल के आयुक्त, देवस्थानम बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और चमोली, रुद्रप्रयाग व उत्तरकाशी के जिलाधिकारियों को इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया गया है।



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उत्तरखंड : पंजीकृत यात्री उन यात्रियों की जगह दर्शन कर सकते हैं जो नियत तारीख को नहीं पहुंचे

देहरादून, 25 सितंबर (भाषा) उत्तराखंड के धार्मिक मामलों के विभाग ने शनिवार को कहा कि चारधाम के लिए पंजीकृत यात्री उन लोगों के स्थान पर दर्शन कर सकते हैं जो देवस्थानम बोर्ड के पोर्टल पर पंजीकृत कराने के बावजूद निर्धारित तारीख पर नहीं पहुंचते।

धार्मिक और तीर्थयात्री मामलों के सचिव हरी चंद्र सेमवाल ने कहा कि यह आदेश उन शिकायतों के मद्देनजर जारी किया गया है कि चार मंदिरों के लिए निर्धारित दैनिक कोटे से भी कम श्रद्धालु दर्शन कर पा रहे हैं।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देशें पर 18 सितंबर से शुरू हुई चारधाम यात्रा के लिए श्रद्धालुओं की अधिकतम दैनिक संख्या निर्धारित कर दी गई है जिसके तहत प्रतिदिन बद्रीनाथ में एक हजार, केदारनाथ में 800, गंगोत्री में 600 और यमुनोत्री में 400 श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी गई है।

गढ़वाल के आयुक्त, देवस्थानम बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और चमोली, रुद्रप्रयाग व उत्तरकाशी के जिलाधिकारियों को इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया गया है।



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उत्तराखंडः 5 साल की बहन के साथ 6 महीने तक रेप करता रहा 32 साल का सौतेला भाई, कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

विनिता कुमार, पिथौरागढ़ उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में शुक्रवार को जिला फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 5 साल की बच्ची के साथ 6 माह तक दुष्कर्म करने वाले सौतेले भाई को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी से पीड़िता को 7 लाख रुपये का मुआवजा भी देने को कहा है। जानकारी के अनुसार बीते अप्रैल में नेपाल मूल का रहने वाला जनक बहादुर अपने दो नाबालिग बच्चों और 5 साल की सौतेली बहन के साथ जाजरदेवल थाना क्षेत्र में रह रहा था। नाबालिग बच्चों ने बताया कि लगभग 32 साल का जनक बहादुर अपनी सौतेली बहन को कई बार मारता-पीटता था। इसकी जानकारी जाजरदेवल थाने में पहुंची। पुलिस ने मामला संवेदनशील होता देख आरोपी जनक बहादुर को गिरफ्तार कर लिया। उसके दो नाबालिग बच्चों और पीड़ित को अपने संरक्षण में लिया। 4 अप्रैल को बच्ची को एक संस्था के संरक्षण में दे दिया गया, जिसके बाद में पीड़ित बच्ची ने संस्था के सदस्यों को अपने साथ हुए दुष्कर्म के बारे में बताया। पीड़ित बच्ची ने बताया कि उसके माता-पिता का निधन हो गया था। वह अपने सौतेले भाई जनक बहादुर के साथ रह रही थी। जनक बहादुर 6 माह से उसके साथ लगातार दुष्कर्म कर रहा था। पुलिस ने चिकित्सकीय परीक्षण करवाया तो बच्ची के शरीर में कई गंभीर घाव भी मिले। पुलिस ने मामले पर गम्भीरता बरतते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो-आईपीसी की धारा 376, 323 सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत और विशेष लोक अभियोजन प्रेम सिंह भंडारी ने पैरवी करते हुए संबंधित गवाहों को पेश किया। दोनों पक्षों और गवाहों को सुनते हुए विशेष न्यायाधीश पॉक्सो डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने जनक बहादुर को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाते हुए कहा कि सौतेला भाई जिस तरह के कृत्य कर रहा था वह क्षमा योग्य नहीं है। न्यायालय ने पीड़ित बच्ची के भरण पोषण और भविष्य को देखते हुए 7 लाख रुपए की धनराशि मुआवजे के रूप में देने के आदेश भी दिए।


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