बुधवार, 3 मार्च 2021

सभी के सहयोग से होगा दिव्य और भव्य हरिद्वार कुंभ का आयोजन : सीएम रावत

हरिद्वार, तीन (भाषा) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को कहा कि कुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर संतों में कोई नाराजगी नहीं है और सभी के सहयोग से दिव्य एवं भव्य कुंभ का सफल आयोजन होगा । अपने एक दिवसीय दौरे में साधु संतों से मुलाकात करने के बाद यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सभी अखाड़ों के संत-महात्माओं का आशीर्वाद लिया है और कुंभ की व्यवस्थाओं के प्रति संतों में कोई नाराजगी नहीं है। बैरागी अखाड़े के संतों की नाराजगी के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बैरागी संतो की भूमि की समस्या है जबकि हरिद्वार में जमीन खाली पड़ी है जिसका उपयोग वे अस्थायी रूप से कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सहयोग से दिव्य एवं भव्य कुम्भ का सफल आयोजन होगा। रावत ने अभी तक हुई कुंभ की तैयारियों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कोविड-19 दिशानिर्देशों तथा उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार मेले की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुल, सड़क और मेले से संबंधित सभी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है और बाकी बचे काम भी जल्द पूरे कर लिए जाएंगे। कोविड-19 के कारण हरिद्वार कुंभ की अवधि को कम करने को लेकर हरिद्वार के व्यापारियों की नाराजगी को भी उन्होंने दूर करने का प्रयास किया और कहा कि हरिद्वार का व्यापारी अकेला नहीं है, सरकार उनके साथ है। रावत ने कहा कि कोविड काल में जनजीवन को सुरक्षित रखने का हमारा प्रयास रहा है और इसके दृष्टिगत सभी को परेशानी हुई है जिसमें हरिद्वार के लोग भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘व्यापारी धैर्य रखें और सहयोग करें, ये दौर भी टल जाएगा।’’


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Haridwar kumbh 2021: पहली पेशवाई के साथ हरिद्वार कुंभ 2021 का आगाज, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी हुए शामिल

करन खुराना, हरिद्वार का विधिवत शुरुआत हो चुकी है। बुधवार को पंचायती श्री निरंजनी अखाड़े के पेशवाई हरिद्वार में भव्य रूप से निकाली गई। कोरोना के कारण जो कार्यक्रम दिसंबर में होने थे वो कार्यक्रम मार्च में हो रहे हैं। बड़ी संख्या में नागा साधु शामिल हुए पेशवाई की शुरुआत एसएमजेएन पीजी कॉलेज से हुई। भव्य रूप से बड़ी संख्या में नागा साधु के अगुवाई में पेशवाई की शुरुआत की गई। पेशवाई पूरे हरिद्वार भ्रमण कर शाम तक अखाड़े में पहुंच गई। कुंभ में पेशवाई बड़ी महत्वपूर्ण शोभायात्रा मानी जाती है। साधु-सन्तों पेशवाई को कुंभ की शुरुआत मानते हैं। ऐसे होता है स्वागत जानकारी के अनुसार, पेशवाई एक ऐसी यात्रा है, जिसमें साधु-संत राजाओं की तरह घोड़े हाथी में सवार होकर अखाड़े की ओर प्रस्थान करते हैं और श्रद्धालु साधु-संतों पर फूलों की वर्षा से स्वागत करते हैं। मुख्यमंत्री ने लिया साधु-संतों का आशीर्वाद भी पंचायती श्री निरंजनी अखाड़े के पेशवाई में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने भगवान की पूजा कर साधु-संतों का आशीर्वाद लिया। साथ ही सभी साधु-संतों को भव्य कुंभ के लिए आश्वस्त किया। ये रहे मौजूद इस दौरान पंचायती श्री निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र गिरी, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरिगिरि व बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे।


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मंगलवार, 2 मार्च 2021

गंगा संरक्षण के लिए अनशनरत मातृसदन के संत ने आठ मार्च से जल त्यागने की घोषणा की

हरिद्वार, दो मार्च (भाषा) गंगा संरक्षण से जुड़ी चार मांगों को लेकर यहां मातृसदन आश्रम में अनशनरत संत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने मंगलवार को घोषणा की कि वह आठ मार्च से जल भी त्याग देंगे । पर्यावरण संरक्षण को समर्पित संस्था मातृ सदन के प्रमुख स्वामी शिवानंद सरस्वती के 26 वर्षीय शिष्य ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद अभी नींबू, जल और शहद के सहारे तपस्या कर रहे हैं। प्रसिद्ध पर्यावरणविद दिवंगत स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद की चार मांगों, गंगा तथा अलकनंदा और भागीरथी जैसी उसकी सहायक नदियों पर सभी निर्माणाधीन और प्रस्तावित बांधों को रद्द करने, खनन तथा नदी में स्टोन क्रशर की अनुमति बंद करने तथा गंगा भक्त परिषद के गठन—को लेकर आत्मबोधानंद ने 23 फरवरी से अनशन शुरू किया था । यहां मातृ सदन आश्रम में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने आरोप लगाया कि उनकी मांगों पर हठधर्मिता दिखाते हुए उत्तराखंड सरकार ने बिना उनसे कोई वार्ता किए 25 फरवरी से गंगा में खनन को फिर खोल दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार के इस कदम के विरोध में उन्होंने आठ मार्च से जल त्यागने का निर्णय लिया है और अब वह बिना जल के ही तपस्या जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि गंगा रक्षा के लिए वे अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा, ' उत्तराखंड सरकार माफियागिरी कर रही है और इसके कारण वह साधुगिरी करने के लिए मजबूर हैं।' इस मौके पर स्वामी शिवानंद ने घोषणा की कि कुंभ के दौरान वह अपना शरीर छोड़ देंगे लेकिन इसके पूर्व अनेक प्रमाण छोड़ जाऐंगे ताकि दुनिया के सामने सरकार और खनन माफियाओं की सच्चाई सामने आ सके। स्वामी सानंद ने भी इन्हीं मांगों को लेकर अनशन किया था और लंबे अनशन के बाद 2018 में उनका निधन हो गया था ।


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गायक जुबिन ने आपदा पीडितों के लिए दिए 13.91 लाख

देहरादून, दो मार्च (भाषा) प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल ने मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को आपदा पीडि़तों की मदद के लिए 13.91 लाख रुपये का चेक सौंपा । नौटियाल ने यह चेक मुख्यमंत्री रावत को उनसे यहां एक शिष्टाचार भेंट के दौरान सौंपा । नौटियाल ने यह धनराशि मुख्यमंत्री राहत कोष में दी है । सात फरवरी को चमोली जिले की ऋषिगंगा घाटी में आई विकराल बाढ़ में 204 लोग लापता हो गए थे जिसमें से अब तक 72 लोगों के शव मिल चुके हैं । इसके अलावा आपदा में 13.2 मेगावाट रैंणी जलविद्युत परियोजना पूरी तरह से तबाह हो गई जबकि 520 मेगावाट तपोवन—विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना को भारी नुकसान हुआ ।


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हरिद्वार कुंभ का भव्य आयोजन करे उत्तराखंड सरकार : महंत नरेंद्र गिरी

हरिद्वार, दो मार्च (भाषा) कुंभ मेला—2021 की व्यवस्था को लेकर उत्तराखंड सरकार के निर्णयों पर सवाल उठाते हुए संतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने मंगलवार को कहा कि जब उत्तर प्रदेश में माघ मेला भव्य रूप से हो सकता है तो उत्तराखंड में कुंभ मेला क्यों नहीं। कुंभ को लेकर राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का जिक्र करते हुए महंत नरेंद्र गिरि ने पूछा कि कुंभ के आयोजन में तमाम तरह की पाबंदियां क्यों लगाई जा रही हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में परांपरागत तरीके से माघ मेला आयोजित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा सभी अधिकारियों को धन्यवाद दिया तथा कहा कि उत्तराखंड सरकार को भी उसी तर्ज पर हरिद्वार महाकुंभ का भव्य आयोजन करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हरिद्वार महाकुंभ मेले का आयोजन भी भव्य रुप से हो। गंगा घाटों पर कथाएं हों, कीर्तन भी हो, संत समागम हो और गंगा किनारे संतों के लिए तंबू भी लगाये जाएं।’’ महंत ने कहा कि माघ मेले के दौरान करोड़ों लोग प्रयागराज पहुंचे लेकिन किसी को भी कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ और नाहीं किसी की मृत्यु संक्रमण से हुई। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार उत्तराखंड सरकार भी हरिद्वार कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लगाई गई तमाम तरह की पाबंदियों को हटाते हुए कुंभ का आयोजन भव्य रूप से करे।


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सोमवार, 1 मार्च 2021

Modi Maidan: कृषि कानूनों के खिलाफ रुद्रपुर महापंचायत में उमड़ा जनसैलाब, 'मोदी मैदान' बन गया 'किसान मैदान'

रुद्रपुर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। उत्तराखंड के रुद्रपुर में सोमवार को बीकेयू लीडर राकेश के नेतृत्व में किसान पंचायत आयोजित की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। इस दौरान जिस विशाल मैदान में किसानों की पंचायत हुई, उसका नाम 'मोदी मैदान' से बदलकर 'किसान मैदान' कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक, साल 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसी मैदान में जनसभा आयोजित की गई थी। पीएम के इस कार्यक्रम में तब 50 हजार लोगों ने शिरकत की थी। सोमवार को बीकेयू नेता ने दावा किया कि उनकी किसान महापंचायत में 50 हजार से ज्यादा लोग आए हैं। ऐसे में इस मैदान को मोदी मैदान की बजाय किसान मैदान कहना ज्यादा उचित होगा। टिकैत ने कहा कि यह जनता ही है जो किसी स्थान को पहचान देती है। जनता ने ही इसे मोदी मैदान का नाम दिया था और जनता ही इसे किसान मैदान कहेगी। उन्होंने आगे कहा कि इस मैदान पर कृषि कानूनों का विरोध करते हुए जान गंवाने वाले किसानों की याद में एक स्मारक बनाया जाएगा। टिकैत ने कहा कि बीजेपी पश्चिम बंगाल और केरल जैसे चुनावी राज्यों में व्यस्त है। उसके पास किसानों की मांगों को पूरा करने का समय नहीं है। हम किसान हर जगह उनका पीछा करेंगे और महापंचायत आयोजित करेंगे ताकि लोगों को उनकी खराब नीतियों के बारे में बता सकें। टिकैत ने कहा कि मैं अपने किसान भाइयों से अपील करूंगा कि अगले 8 महीनों में कहीं भी, कभी भी विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार रहें। उन्होंने इसके अलावा किसानों से अपने खेतों में काम करते रहने की भी अपील की। किसान नेता गुरनाम सिंह चादुनी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब भारत को आजादी मिली थी तब देश की जीडीपी में कृषि सेक्टर का हिस्सा 60 फीसदी था लेकिन अब यब यह घटकर 12 फीसदी हो गया है। गुरनाम सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार एग्रीकल्चर सेक्टर को नष्ट करने के अपने दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों में सफल नहीं होगी। हम तब तक वापस नहीं लौटेंगे, जब तक कि वापस नहीं लिए जाते हैं।


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Uttarakhand News: गैरसैंण में सड़क चौड़ीकरण की मांग कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज

करन खुराना, चमोली उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में सोमवार को बजट सत्र की शुरुआत की गई। इस दौरान नन्दप्रयाग घाट रोड चौड़ीकरण को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों पर पुलिस ने लाठियां भांजी। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया। लाठीचार्ज के बाद मौके पर भगदड़ मच गई। भगदड़ में कई महिलाओं और बच्चों के चोटिल होने की सूचना है। जानकारी के अनुसार महिलाएं और स्थानीय लोग पिछले एक महीने से सड़क चौड़ीकरण को लेकर आंदोलन कर रहे थे। सोमवार को बैरिकेडिंग से पुलिस लोगों को रोक रही थी लेकिन लोग बैरिकेडिंग तोड़ कर विधानसभा की ओर जाना चाह रहे थे। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प हो गई। विधानसभा की ओर जाना चाह रहे थे लोग पुलिस अधीक्षक चमोली यशवंत सिंह ने बताया कि रोड चौड़ीकरण को लेकर पिछले दो महीने से आंदोलन चल रहा है। सोमवार को करीब एक से डेढ़ हजार लोग विधानसभा की ओर जाना चाह रहे थे। विधानसभा की ओर जाने वाले रोड पर पुलिस की और से आखिरी चौकी दिवालिखाल पर आंदोलनकारियों को रोका गया। दो पुलिस वाले भी जख्मी यशवंत सिंह ने बताया कि जब ऐसा लगा कि माहौल ज्यादा बिगड़ रहा है, तब लाठी फटकार कर भीड़ को तितर-बितर किया गया। इसके बाद आंदोलनकारियों की ओर से पुलिस बल पर पथराव किया गया। इसमें एक सिपाही का सिर फटा है और एक पुलिस उपाधीक्षक घायल हुआ है।


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