शनिवार, 4 जनवरी 2020

उत्तराखंड में ऊंचाई वाली जगहों पर भारी बर्फबारी से ठंड बढ़ी

देहरादून, चार जनवरी (भाषा) उत्तराखंड में चारधाम सहित ऊंचाई वाली जगहों पर भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश एवं ओलावृष्टि के कारण शनिवार को समूचे राज्य में पारा और नीचे चला गया। आपदा शमन एवं प्रबंधन केंद्र के अधिकारियों ने बताया कि उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री एवं यमुनोत्री मंदिरों, रूद्रप्रयाग में केदारनाथ के अलावा चमोली जिले के बद्रीनाथ में दोपहर को हुई भारी बर्फबारी के बाद ये क्षेत्र बर्फ की मोटी चादर में ढंक गए। उत्तरकाशी जिले के हरसिल, सुक्की, मुखवा, जानकीचट्टी और खरसाली में बर्फबारी हुई। ऊंचाई वाली जगहों पर बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश होने से पारे के स्तर में तेजी से गिरावट हुई। चमोली जिले में नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान एवं केदारनाथ कस्तूरी हिरण अभयारण्य में भी बर्फ की चादर बिछी दिखी। राज्य की राजधानी देहरादून में दोपहर में बारिश एवं ओले गिरने से ठंड बढ़ गई। मौसम विभाग ने बताया कि मुक्तेश्वर में न्यूनतम तापमान शून्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज की गई जिसके बाद टिहरी में यह 1.2 डिग्री सेल्सियस, पंतनगर में 6.5 डिग्री सेल्सियस और देहरादून में 7.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई।


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हाशिये पर मौजूद विपक्ष सीएए को लेकर देश में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहा: ठाकुर

देहरादून, चार जनवरी (भाषा) भाजपा ने शनिवार को आरोप लगाया कि हाशिये पर मौजूद विपक्ष संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर देश में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहा है लेकिन लोग उन्हें उनके षड्यंत्रों में कामयाब नहीं होने देंगे। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य भारत में अल्पसंख्यकों की नागरिकता छीनना नहीं है, जैसा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां दुष्प्रचार कर रही हैं। उत्तराखंड आए ठाकुर ने कहा, ‘‘हाशिये पर मौजूद विपक्ष सीएए को लेकर देश में हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहा है लेकिन लोग इस संशोधित कानून के समर्थन में हैं और उन्हें (विपक्ष को) उनके षड्यंत्रों में कभी कामयाब नहीं होने देंगे। इस मुद्दे पर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के कथित दुष्प्रचार को रोकने के लिए भाजपा के कार्यक्रम के तहत संवाददाता सम्मेलन में ठाकुर ने यह कहा। इस कानून के प्रति कांग्रेस के विरोध को उन्होंने हैरान करने वाला बताते हुए कहा कि यहां तक कि महात्मा गांधी भी पड़ोसी देशों में धार्मिक आधार पर प्रताड़ना का सामना करने के चलते आए अल्पसंख्यकों को भारत में उनका वाजिब हक देने के समर्थन में थे। उन्होंने कहा कि यदि नेहरू-लियाकत समझौते की शर्तों का पाकिस्तान ने सम्मान किया होता, तो सीएए की जरूरत नहीं पड़ती। ठाकुर ने कहा, ‘‘पाकिस्तान इस समझौते का सम्मान करने में नाकाम रहा, जबकि भारत ने इसकी शर्तों का अक्षरश: पालन किया। यह इस तथ्य से भी पता चलता है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की आबादी आजादी के समय के 23 प्रतिशत से घट कर 2011 में 3.7 प्रतिशत पर आ गई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसका मतलब है कि पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हुआ। जिन्होंने इसका विरोध किया उन्हें प्रताड़ित किया गया और शरणार्थी के रूप में भारत पलायन करने के लिए मजबूर किया गया।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या कुछ राज्यों का सख्त विरोध करना इस कानून के देशव्यापी क्रियान्वयन के रास्ते में रूकावट डालेगा, भाजपा नेता ने कहा कि इसके क्रियान्वयन को रोकने के लिए राज्यों के पास संवैधानिक शक्तियां नहीं है।


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शुक्रवार, 3 जनवरी 2020

सीएए पर भ्रम फैला रही है कांग्रेस: रावत

देहरादून, तीन जनवरी (भाषा) भाजपा ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) की व्याख्या देश के मुसलमानों की नागरिकता छीनने के तौर पर करके भ्रम फैला रही है। भाजपा ने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून मुस्लिम बहुल देशों में प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीएए को लेकर भ्रम दूर करने के लिए पार्टी द्वारा शुरू किये गए अभियान के तहत अल्मोडा में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस इस कानून को लेकर भ्रम फैला रही है कि और इसे भारत में मुसलमानों की नागरिकता छीने जाने के हथियार के तौर पर पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून के बारे में झूठ फैलाकर कांग्रेस अंग्रेजों से विरासत में मिली 'फूट डालो और राज करो' की नीति को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस आज इस कानून का विरोध कर रही है लेकिन मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली उसकी ही तत्कालीन सरकार ने इस संबंध में शुरूआत की थी। उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की जनसंख्या विभाजन के समय 23 फीसदी से घटकर वर्ष 2011 में 3.7 फीसदी हो जाने के कारण संसद ने इस अधिनियम को पारित किया है।’’ रावत ने कहा कि इसके विपरीत भारत में मुसलमानों की जनसंख्या आजादी के समय चार करोड़ से बढ़कर वर्तमान में 20 करोड़ हो गयी है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम बाहुल्य वाले पड़ोसी देशों में धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उन्हें धर्म बदलकर मुसलमानों से विवाह करने को मजबूर किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड के ऋषिकेश, हरिद्वार और उधमसिंह नगर जिले में रहने वाले करीब 200 परिवार इस संशोधित नागरिकता कानून के दायरे में आ रहे हैं।


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सीएए किसी की नागरिकता नहीं छीनेगा: कौशिक

पिथौरागढ, तीन जनवरी (भाषा) उत्तराखंड के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने शुक्रवार को कहा कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे मुस्लिम बहुल देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने के लिये है जिन्होंने भारत में शरण मांगी है और यह कानून किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं है। कौशिक ने सीएए को लेकर भ्रम को दूर करने के लिए यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों पर इसे भारत में रहने वाले मुसलमानों की नागरिकता छीनने वाला बता कर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। राज्य सरकार के प्रवक्ता कौशिक ने कांग्रेस की कानून की व्याख्या को 'गैरव्यवहारिक' बताते हुए कहा कि सीएए का किसी भी प्रकार से राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से कोई संबंध नहीं है। कौशिक ने कहा कि फिलहाल कांग्रेस भले ही सीएए का विरोध कर रही हो लेकिन उसने सत्ता में रहने के दौरान कई बार पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यकों के अधिकारों का समर्थन किया था। कौशिक का यह संवाददाता सम्मेलन सीएए और एनआरसी को लेकर विपक्ष के अभियान के खिलाफ भाजपा के कार्यक्रम के तहत था।


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गुरुवार, 2 जनवरी 2020

ऑपरेशन स्माइल: केदारनाथ आपदा के 6 साल बाद परिवार से मिला 65 साल का शख्स

देहरादून करीब 6 साल तक उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के सितारगंज की 62 साल की मोबिन अंसारी एक विधवा का जीवन जीती रहीं। उनके पति जमील अहमद अंसारी 2013 के केदारनाथ हादसे से बाद से गायब थे और मान लिया गया था कि वह कभी नहीं लौटेंगे। हालांकि, 31 दिसंबर को मोबिन को एक विडियो कॉल आया जिसे देखकर उनके होश उड़ गए। यह कॉल उनके पति का था। पुलिस ने के तहत जमील को खोज निकाला था। हादसे के बाद उनकी याद्दाश्त चली गई थी और वह चमोली के गोपेश्वर में एक शेल्टर होम में रह रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह सोशल मीडिया पर उनके फोटोज पोस्ट करके उन्हें खोज निकाला। आखिरकार जमील 1 जनवरी को अपने परिवार से मिल सके। केदारनाथ हादसे में अलकनंदा में बहे चमोली जिले में ऑपरेशन स्माइल चलाने वाले सब-इंस्पेक्टर नितिन बिष्ट ने बताया कि जमील 2013 में लंबागड़ में मजदूरी करते थे। जब केदारनाथ की आपदा आई तो वह अलकनंदा में बह गए और उसके बाद क्या हुआ उन्हें याद नहीं। बिष्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने जमील से 2016 में बात की जब उन्हें शेल्टर होम में पाया गया। उस वक्त उन्होंने अपना नाम जहीर खान बताया लेकिन इस बार दिसंबर जब वह मिले तो उन्होंने अपना नाम जमील बताया। जमील की तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया जहां से उनके भतीजे ने उन्हें पहचान लिया। 1 जनवरी को मोबिन और उनके बेटे गोपेश्वर गए जहां पुलिस ने जमील को उन्हें सौंप दिया।


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पिथौरागढ के गांवों में रिवर्स पलायन शुरू

पिथौरागढ़, दो जनवरी (भाषा) उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की भारत—चीन सीमा पर स्थित गांवों से दशकों पहले रोजी रोटी की तलाश में गये कुछ लोग अब घर लौटने लगे हैं जिसे विशेषज्ञ रिवर्स पलायन का संकेत मान रहे हैं । विशेषज्ञों का मानना है कि घर लौटने की यह प्रवृत्ति हाल के वर्षों में क्षेत्र में बेहतर सुविधाओं के सृजन के अलावा अपनी अनूठी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता के नये प्रयासों का फल है । सीमांत गांवों के फिर धीरे—धीरे, फलने—फूलने की बढ़ती उम्मीद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये भी एक अच्छा संकेत है । सेवानिवृत्त शिक्षक और आदिवासी अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ ललित पंत ने बताया, 'दशकों पहले रोजगार की तलाश में अपने पैतृक घरों को छोड़ कर चले गये लोग अब फिर अपनी जड़ों की ओर लौटने लगे हैं । यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये भी अच्छा है क्योंकि इससे सीमांत गांव भी भरने लगे हैं ।' धारचूला में रं सांस्कृतिक कार्य से जुड़े अशोक नबियाल ने कहा, 'ऐसा सीमा की आखिरी चौकी तक मोटर मार्गों के निर्माण के कारण संभव हो पाया है । चीन के साथ लगती सीमा पर स्थित जोहार, दारमा, व्यास और चौंदास घाटियों के आखिरी गांवों तक सडकें पहुंच गयी हैं ।' बेहतर सड़क संपर्क के अलावा, कुछ सांस्कृतिक संगठनों द्वारा मरती हुई संस्कृति को बचाने के प्रति फैलाई जा रही जागृति और राज्य सरकार द्वारा शुरू पर्यटकों के लिये शुरू होम स्टे योजना को भी रिवर्स पलायन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है । पंत ने कहा कि दारमा घाटी में रं कल्याण संस्था और जोहार घाटी में मल्ला जोहार विकास समिति द्वारा सांस्कृतिक जागरूकता फैलाने के लिए किये कार्य भी घर लौटने की प्रवृत्ति में सहायक सिद्ध हुए हैं । मल्ला जोहार विकास समिति के अध्यक्ष और मिलम गांव के स्थायी निवासी श्रीराम सिंह धर्मशक्तू ने कहा कि वह गर्मियों में यहां रहना चाहते हैं । सीमा सुरक्षा बल के रिटायर्ड कमांडेंट धर्मशक्तु ने कहा, ' मैंने मिलम में अपने पैतृक घर की मरम्मत करवा ली है और अब मैं वहां रहूंगा ।' इसी प्रकार भारतीय खाद्य निगम से बतौर अधिकारी सेवानिवृत्त हुए दिग्विजय सिंह रावत ने कहा कि उन्होंने भी अपने पैतृक गांव मिलम गांव में नया घर बना लिया है । दारमा घाटी से भी दशकों पहले पलायन कर रहे कई लोग अब अपने घरों की ओर लौट रहे हैं । रेलवे के सेवानिवृत्त अधिकारी राम सिंह सोनल ने बताया कि दारमा घाटी के आखिरी गांव तक सडक बन जाने के बाद हमने सेब की पैदावार के लिये आदर्श इस घाटी के कई गांवों में सेब के पेड लगाये हैं । इस घाटी को सेब के बागान में तब्दील करने का सपना देख रहे सोनल ने अब दारमा घाटी में स्थित अपने पैतृक गांव सोन को ही स्थायी ठिकाना बना लिया है । एवरेस्ट पर्वतारोही और पर्वतारोहण के क्षेत्र में योगदान के लिये पदमश्री से नवाजे गये मोहन सिंह गुंज्याल भी आइटीबीपी से रिटायरमेंट के बाद अब गर्मियों में अपना ज्यादातर समय अपने पैतृक गांव गुंजी में ही बिताते हैं । उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में घाटीबगड से लिपुलेख के बीच निर्माणाधीन सडक के पूरा बन जाने के बाद व्यास घाटी के गांव फिर से जीवंत हो उठेंगे । भारत चीन सीमा पर स्थित जोहार घाटी के सभी 14 गांवों में 1962 से पहले निवास करने वाले 600 परिवारों में से करीब 40 फीसदी अपने पैतृक गांवों को छोडकर मुनस्यारी, पिथौरागढ, हल्द्वानी, अल्मोडा, देहरादून और नयी दिल्ली में स्थायी रूप से बस गये हैं जबकि बाकी बचे करीब 140 परिवार अब भी खेती कर और भेड़ पालकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं । इन सीमांत घाटियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि अगर सरकार उन्हें मेडिकल, संचार और यातायात की सुविधाएं उपलब्ध कराये तो सभी गांव एक बार फिर लोगों से गुलजार हो उठेंगे । मुनस्यारी के उप जिलाधिकारी भगत सिंह फोनिया ने कहा कि गांवों की ओर लौटने की प्रवृत्ति आखिरी चौकी तक सड़क बनना शुरू होने के बाद पिछले पांच साल के भीतर उभरी है । चमोली जिले के सीमांत गांव के स्थायी निवासी फोनिया ने बताया कि रिटायरमेंट के बाद उनका इरादा भी अपने पैतृक गांव में ही बसने का है । राज्य पलायन आयोग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि पिथौरागढ जिले के गांवों के करीब 41569 परिवार पिछले 20 सालों में पलायन कर अपने जिला मुख्यालय या फिर अन्यत्र चले गये हैं ।


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बुधवार, 1 जनवरी 2020

उत्तराखंड: चमोली और पिथौरागढ़ में बर्फबारी शुरू, दिलकश हुआ वादियों का नजारा, देखें विडियो

चमोली उत्तराखंड के चमोली और पिथौरागढ़ जिले के कई इलाकों में साल की पहली बर्फबारी शुरू हो गई है। यहां अगले दो दिन तक बर्फ गिरने की संभावना है। चमोली के लोहाजंग में गुरुवार सुबह से बर्फबारी हो रही है और यहां चारों ओर बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। पिथौरागढ़ के मुंसयारी में भी तेज बर्फबारी हो रही है जिससे यहां का नजारा काफी सुहाना हो गया है। मौसम विभाग ने पहले 3 जनवरी की शाम से उत्तराखंड के अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ गिरने की भविष्यवाणी की थी। इसके अलावा मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई इलाकों में हल्की बारिश की संभावना भी जताई है। 2 जनवरी को दोपहर से कई जगह बारिश शुरू होने की संभावना है और 3 जनवरी को रुक-रुक कर हल्की बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में भी आज से सामान्य बर्फबारी की संभावना है। यहां मौसम विभाग के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि दो जनवरी से कई स्थानों पर हल्की से लेकर सामान्य बर्फबारी होने की संभावना है, क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ दिन के तापमान में भारी गिरावट के साथ सक्रिय होगा। शिमला, कुफरी, नरकंडा, मनाली, कल्पा और डलहौजी में बर्फबारी की संभावना अधिक है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ चार जनवरी को काफी कम हो जाएगा और न्यूनतम तापमान में गिरावट होगी।


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