शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

उत्तरकाशी में हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग

देहरादून, 23 अगस्त (भाषा) उत्तराखंड के बारिश प्रभावित उत्तरकाशी जिले में बचाव अभियान में शामिल एक हेलीकॉप्टर को शुक्रवार को लगवाड़ा में आपात लैंडिंग करनी पड़ी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। विधि-व्यवस्था के महानिदेशक अशोक कुमार ने बताया कि हेलीकॉप्टर के पायलट और सह-पायलट दोनों सुरक्षित हैं और उन्हें मामूली चोटें आई हैं। उत्तरकाशी जिला मजिस्ट्रेट आशीष चौहान ने कहा कि निजी हेलीकॉप्टर एक नदी के तट पर उतरा। यह हेलीकॉप्टर बारिश से प्रभावित लोगों को राहत सामग्री पहुंचाने के लिए चीवा जा रहा था। इस घटना से दो दिन पहले बाढ़ प्रभावित उत्तरकाशी जिले में राहत कार्यों में शामिल एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। बिजली के तारों में फंसने के चलते उसमें आग लग गई थी। इस घटना में हेलीकॉप्टर में सवार तीन लोगों की मौत हो गई थी।


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उत्तरकाशी: राहतकार्य को जा रहा एक और हेलिकॉप्टर क्रैश, पायलट, को-पायलट घायल

उत्तरकाशी उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने जा रहा एक और हेलिकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हो गया। बादल फटने से बाढ़ प्रभावित आराकोट में हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। हालांकि, घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। पायलट और को-पायलट को मामूली चोटें आई हैं। गौरतलब है कि इससे पहले मोरी ब्लॉक में राहत कार्य में लगा एक हेलिकॉप्टर बुधवार को क्रैश हो गया। इस हादसे में हेलिकॉप्टर में सवार तीनों लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक बादल फटने से बाढ़ का सामना कर रहे आराकोट के तिकोची के पास हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। घटना की पुष्टि उत्तरकाशी के जिला मैजिस्ट्रेट आशीष चौहान ने की। इसके पीछे क्या कारण रहा, इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। यह भी पढ़ें: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बाढ़ प्रभावित मोरी ब्लॉक में राहत कार्य में लगा एक हेलिकॉप्टर बुधवार को क्रैश हो गया। इस हादसे में हेलिकॉप्टर में सवार तीनों लोगों की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक राहत सामग्री बांटकर लौट रहा यह हेलिकॉप्टर बिजली के तारों से बचने के चक्कर में पहाड़ी से जा टकराया। मुख्यमंत्री रावत ने सभी मृतकों के परिजन को 15-15 लाख रुपये की सहायता राशि देने की भी घोषणा की है।


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WII की स्टडीः सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल में प्रदूषित है गंगा, मिले जहरीले तत्व

देहरादून उत्तराखंड के वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) ने गंगा के प्रदूषण स्तर पर एक रिसर्च किया है। इस ताजा अध्ययन में सामने आया है कि गंगा सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल में प्रदूषित है न की उत्तर प्रदेश के कानपुर में। इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन के लिए 43 जगहों पर गंगा का प्रदूषण स्तर जांचा। 43 में से हर एक स्ट्रेच में पांच किलोमीटर का एरिया शामिल किया गया। गंगा में 15 प्रतिबंधित औरगैनो क्लोरीन पेस्टिसाइड्स (ओसीपीएस) पाए गए। इसके अलावा अत्यंत जहरीले भारी धातुओं जैसे लेड और क्रोमियम की उपस्थिति भी गंगा के पानी में मिली। वैज्ञानिकों ने बताया कि अध्ययन से पहले गंगा को पांच जोन में बांटा गया। उत्तरखांड को अपर जोन, उत्तर प्रदेश में यमुना से पहले मिलने वाली गंगा को अपर मिडल जोन एक, वाराणसी, गाजीपुर, मीरजापुर और बलिया में गंगा को अपर मिडल जोन दो, बिहार और झारखंड में मिडल जोन और वेस्ट बंगाल में गंगा को ओवर जोन में रखा गया। अध्ययन के दौरान वेस्ट बंगाल के लोवर जोन में गंगा में सबसे ज्यादा प्रदूषण पाया गया। इस अध्ययन में शामिल रुचिका शाह ने वेस्ट बंगाल में गंगा के सबसे ज्यादा प्रदूषित होने के पीछे कारण बताते हुए कहा कि लोवर जोन वार्षिक वर्षा दर बहुत ज्यादा है। ज्यादा बारिश से ज्यादा बाढ़ आती है जो गंगा के आसपास की कृषि भूमि से कीटनाशक बहाकर लाती है। यह एक मुख्य कारण हो सकता है। हालांकि वैज्ञानिक यहां पर गंगा के सबसे ज्यादा प्रदूषित होने के पीछे एक कारण क्षेत्र में संवेदनशील जलीय प्रजातियों का होना भी मानते हैं। वैज्ञानिकों ने कहा कि अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो इसका असर सुंदरबन की जैव विविधता पर भी पड़ेगा। रुचिका ने कहा कि पवित्र गंगा लोगों के लिए पूजा सामग्री फेंकने का एक एरिया भी बन गया है। लोग विभिन्न तरह की पूजा सामग्री इसमें बहा रहे हैं। इसके अलावा औधोगिक, नगर महापालिका और कृषि संबंधित वेस्ट भी जल निकायों में बहाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गंगा के प्रदूषित होने का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी होगा। इस खबर को


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गुरुवार, 22 अगस्त 2019

पर्वतारोहियों ने दारमा-व्यास घाटियों को जोडने वाला नया ट्रैक ढूंढा

पिथौरागढ, 22 अगस्त (भाषा) उत्तराखंड के पिथौरागढ के पर्वतारोहियों ने हिमालयी दारमा और व्यास घाटियों को 5435 मीटर उंचे सिन ला दर्रे के जरिये जोड़ने वाला एक नये पैदल रास्ते :ट्रैक रूट: को खोज निकाला है और इस दल में एवरेस्ट फतेह करने वाले पर्वतारोही भी शामिल थे । पर्वतारोहियों का मानना है कि अगर इस मार्ग को सरकार कमीशन कर देती है तो इससे क्षेत्र में साहसिक पर्यटन को बढावा मिलने के साथ ही रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे जिससे सीमावर्ती गांवों से हो रहे पलायन को भी रोकने में मदद मिलेगी । अभियान के आयोजक और 2015 में माउंट एवरेस्ट फतेह कर चुके पर्वतारोही योगेश गरबियाल ने बताया कि सौंदर्य से भरपूर यह नया रूट दारमा घाटी में बिदांग से शुरू होता है और जोलिंगकोंग झील के निकट से गुजरता हुआ सिन ला दर्रे के जरिये व्यास घाटी में गुंजी तक जाता है । उन्होंने कहा कि 56 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक रूट को सरकार कमीशन कर दे तो यह दारमा और व्यास घाटियों को जोडने वाला पहला र्टैक रूट होगा । इस साल मई में एवरेस्ट पर विजय हासिल कर चुकीं प्रख्यात पर्वतारोही शीतल भी इस अभियान 'क्लाइम्बिंग एक्रॅास समिट' का हिस्सा थीं । 'सिन ला' दर्रा धारचूला सब डिवीजन के उच्च हिमालयी क्षेत्र में दारमा और व्यास घाटियों को बीच में विभाजित करने वाला उंचा पहाड़ है । गरबियाल ने बताया कि इस रूट की आधिकारिक मंजूरी और सरकार से कमीशनिंग के लिये राज्य सरकार को जल्द ही एक प्रस्ताव भेजा जायेगा ।


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बुधवार, 21 अगस्त 2019

उत्तरकाशी की बाढ़ में बह गए सात स्कूल और सारे दस्तावेज, तीन सौ से ज्यादा बच्चों की पढ़ाई दांव पर

उत्तरकाशी उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बादल फटने से मोरी ब्लॉक में पंद्रह से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। कई लोग अब भी लापता हैं। कई स्कूलों की इमारत पूरी तरह से ढह गई। स्कूल बिल्डिंगों के साथ हाईस्कूल और इंटरमीडिएट छात्रों के बोर्ड परीक्षाओं के फॉर्म और दूसरे दस्तावेज भी बह गए। शिक्षा विभाग ने आपदा ग्रस्त इलाकों के सभी स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर रखी हैं। ऐसे परिस्थितियों में तीन सौ से ज्यादा छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। मोरी ब्लॉक के एक दर्जन से ज्यादा गांव बाढ़ के पानी में बह गए। ऐसे में सात सरकारी स्कूलों की इमारतें बाढ़ में बह गई हैं। टीकोची इंटर कॉलोज, चिवान हाई स्कूल, प्राइमरी स्कूल चिवान, जूनियर हाई स्कूल चिवान और जूनियर हाई स्कूल किरानू की इमारतें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। वहीं प्राइमरी स्कूल डगोली और मोलदी गांव में भी बाढ़ का प्रभाव पड़ा है। सूत्रों की मानें तो इन स्कूलों में पढ़ने वाले 314 छात्रों की शिक्षा पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। इन 314 छात्रों में से 200 छात्र टीकोची गांव के बताए जा रहे हैं जो पूरी तरह से बाढ़ में बह गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ प्रभावित स्कूलों के बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। सीईओ आरसी आर्या ने कहा कि हम लोगों ने टीकोची इंटर कॉलेज के दो सौ छात्रों के पढ़ने की व्यवस्था बरनाली प्राइमरी स्कूल में की है। हम चिवान प्राइमरी स्कूल के 22 और चिवान जूनियर हाई स्कूल के 24 बच्चों को जगता प्राइमरी स्कूल में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चिवान हाई स्कूल के 25 छात्रों को बालावट प्राइमरी स्कूल, डगोली प्राइमरी स्कूल के 28 बच्चों को टीकोची प्राइमरी स्कूल, मोलदी प्राइमरी स्कूल के 11 छात्रों को मोलदी सामुदायिक सेंटर और किरानू जूनियर हाई स्कूल के चार बच्चों को किरानू प्राइमरी स्कूल में शिफ्ट किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही सारे बोर्ड के अभ्यर्थियों को फिर से परीक्षा फॉर्म दिए जाएंगे। सारे छात्रों को कॉपियां, किताबें और दूसरे स्टडी मैटेरियल भी देने जाने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि हो सकता है जगह की कमी और इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते छात्रों को परेशानी हो लेकिन जल्दी ही उनकी परेशानियां खत्म की जाएंगी। स्कूलों के फिर से निर्माण का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है। इस खबर को


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उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, पायलट समेत तीन की मौत

देहरादून, 21 अगस्त (भाषा) उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित उत्तरकाशी जिले में राहत एवं बचाव कार्यों में लगा एक हेलीकॉप्टर बुधवार को मोल्डी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पायलट, सह पायलट समेत हेलीकॉप्टर में सवार तीन व्यक्तियों की मौत हो गयी। डीजीसीए ने हादसे की जांच के लिए एक टीम गठित की है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, कानून एवं व्यवस्था, अशोक कुमार ने बताया कि राहत सामग्री लेकर जा रहा निजी कंपनी का यह हेलीकॉप्टर मोल्डी गांव के पास बिजली के तारों में उलझ कर दुर्घटनाग्रस्त हो गया । उन्होंने बताया कि इस दुर्घटना में पायलट, सह-पायलट और एक स्थानीय व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गयी । मृतकों की पहचान कैप्टन लाल, कैप्टन शैलेश एवं उत्तरकाशी के खरसाली गांव के राजपाल राणा के रूप में हुई है। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने दुर्घटना की प्रारंभिक जांच के लिए अधिकारियों की एक टीम गठित की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। डीजीसीए के एक अधिकारी ने बताया कि इस हादसे की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो द्वारा किये जाने की संभावना है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राहत सामग्री वाले हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने पर दुख व्यक्त किया है टि्वटर पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री रावत ने कहा, ‘‘हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर दुखद है। ईश्वर से मृतात्माओं की शांति व उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं।’’ मुख्यमंत्री रावत ने राज्य आपदा परिचालन केंद्र जाकर स्वयं घटना की जानकारी ली। उन्होंने सभी मृतकों के परिजनों को 15-15 लाख रूपये की सहायता राशि देने की भी घोषणा की। उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र में गत रविवार को बादल फटने और लगातार भारी बारिश से हुए भूस्खलन की घटनाओं में 70 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कुल 51 गांव प्रभावित हुए। आपदा के कारण प्रभावित गांवों में कई भवन ढह गये हैं और 16 व्यक्तियों की मौत हुई है। छह अन्य लापता हैं जबकि आठ अन्य घायलों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है।


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उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, पायलट समेत तीन लोगों की मौत

देहरादून, 21 अगस्त :भाषा: उत्तराखंड के आपदाग्रस्त उत्तरकाशी जिले में बचाव और राहत कार्यों में लगा एक हेलीकॉप्टर बुधवार को मोल्डी के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पायलट, सह पायलट समेत हेलीकॉप्टर में सवार तीन व्यक्तियों की मौत हो गयी । प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, कानून एवं व्यवस्था, अशोक कुमार ने बताया कि निजी कंपनी का यह हेलीकॉप्टर राहत सामग्री लेकर आपदा प्रभावित क्षेत्र मोरी में एक गांव से दूसरे गांव जा रहा था। उन्होंने बताया कि मोल्डी गांव के पास बिजली के तारों में उलझकर हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया । उन्होंने बताया कि इस दुर्घटना में पायलट, सह-पायलट और एक स्थानीय व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गयी । मृतकों की पहचान कैप्टन लाल, कैप्टन शैलेश एवं उत्तरकाशी के खरसाली गांव के राजपाल राणा के रूप में हुई है । मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राहत सामग्री वाले हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने पर दुख व्यक्त किया है टिवटर पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री रावत ने कहा, 'हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर दुखद है । ईश्वर से मृतात्माओं की शांति व उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं । ' मुख्यमंत्री रावत ने राज्य आपदा परिचालन केंद्र में जाकर स्वयं घटना की जानकारी ली । उन्होंने सभी मृतकों के परिजनों को 15-15 लाख रूपये की सहायता राशि देने की भी घोषणा की है। उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र में गत रविवार को बादल फटने और लगातार भारी बारिश से हुए भूस्खलन की घटनाओं में 70 किलोमीटर क्षेत्र में कुल 51 गांव प्रभावित हुए। आपदा के कारण प्रभावित गांवों में कई भवन ढह गये हैं और 15 व्यक्तियों की मौत हुई है। छह अन्य लापता हैं जबकि आठ अन्य घायलों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है।


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