शनिवार, 8 अगस्त 2015

सुप्रभात मित्रों शुभ दिन रविवार।

सुप्रभात मित्रों शुभ दिन रविवार। 
ॐ घृणी सूर्याय नमः आइए जानते हैं 
भगवान सूर्य के 21 नाम -

1.

विकर्तन यानी विपत्तियों को नष्ट करने वाले
2.
विवस्वान यानी प्रकाश रूप
3.
मार्तंड
4.
भास्कर
5.
रवि
6.
लोकप्रकाशक
7.
श्रीमान
8.
लोक चक्षु
9.
गृहेश्वर
10.
लोक साक्षी
11.
त्रिलोकेश
12.
कर्ता
13.
हर्ता
14.
तमिस्त्रहा यानी अंधकार को नष्ट करने वाले
15.
तपन
16.
तापन
17.
शुचि यानी पवित्रतम
18.
सप्ताश्ववाहन
19.
गभस्तिहस्त यानी किरणें जिनके हाथ स्वरूप हैं
20.
ब्रह्मा
21.
सर्वदेवनमस्कृत।
भगवान सूर्य के नाम मनुष्य को यश, वैभव और संपन्नता दिलाते हैं।

आज का दिनाँक 09 अगस्त 2015

आज का दिनाँक 09 अगस्त 2015
दिन - रविवार
विक्रम संवत 2072
शक संवत 1937
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - वर्षा
मास - श्रावण
पक्ष - कृष्णपक्ष
तिथि - दशमी
नक्षत्र - रोहिणी
योग - ध्रुव
दिशाशूल - पश्चिम दिशा में
****
जहाँ क्षमा है वहाँ धर्म का वास होता है तथा जहाँ दया है 

उस स्थान पर स्वयं परमात्मा का निवास होता है।

शुक्रवार, 7 अगस्त 2015

सुप्रभात मित्रों

सुप्रभात मित्रों
शुभ दिन शनिवार।
आप सभी का दिन मंगलमय हो ।
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा
नमोऽस्तु‍ते सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु।

"मंगल-मूरति मारूत-नंदन।

"मंगल-मूरति मारूत-नंदन।
सकल-अमंगल-मूल-निकंदन॥
पवनतनय संतन-हितकारी।
ह्रदय बिराजत अवध-बिहारी॥
मातु-पिता,गुरू,गनपति,सारद।
सिवा-समेत संभु,सुक,नारद॥
चरन बंदि बिनवौं सब काहू।
देहु रामपद-नेह-निबाहू॥
बंदौं राम-लखन-बैदेही।
जे तुलसीके परम सनेही॥
ॐ हं हनुमतये नमः॥

आज का दिनाँक 08 अगस्त 2015

आज का दिनाँक 08 अगस्त 2015
दिन - शनिवार
विक्रम संवत 2072
शक संवत 1937
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - वर्षा
मास - श्रावण
पक्ष - कृष्णपक्ष
तिथि - नवमी
नक्षत्र - कृत्तिका
योग - वृद्धि
दिशाशूल - पूर्व दिशा में
****
दया का लक्षण भक्ति है और श्रध्दा पूर्वक भक्ति करने से 

परमात्मा का ध्यान होता है। 
जो ध्यान करता है उसी को ज्ञान मिलता है।

आदरणीय बंधुओ नमस्कार ।

आदरणीय बंधुओ
नमस्कार ।


इस बार फिर प्रेम का धागा चाइनीज न बन जाए। यह रक्षाबंधन जो कभी राष्ट्र को एक करने में महत्ती भूमिका निभाते आया है ,चाइना के चक्कर में राष्ट्र घात क न बन जाये।

संकल्प दिलाना होगा प्यारी बहना को कि तूँ बांध दे एक कच्चा धागा मेरी कलाई पर, 

परन्तु.. यह चमचमाता चाइनीज धागा मेरी भारत माँ का गलफांस न बन जाये।

स्वदेशी रक्षाबंधन को स्वदेशी ही रहने ने,चाइना ने इस बार रक्षा बंधन पर भारत में बीस हजार करोड़ रुपये का सामान उतारा है। हमारा असली रक्षाबंधन मनाने का एक अवसर हमारे सामने आया है।
संकल्प करे कि चाइना की राखी न तो बांधेंगे और न ही बांधने देंगे।

कृपया यह सन्देश अपनी प्यारी बहना को जरुर भेजे।

राखी से पहले हर मोबइल में यह Massage होना चाहिए ।
तब ही 15 अगस्त मनाने की सार्थकता हैं । 

स्वदेशी नहीं तो कैसा देशप्रेम और देशप्रेम नहीं तो कैसा स्वतंत्रता दिवस ।।

शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

प्राण"(आत्मा की छाया) की उत्पत्ति

"प्राण"(आत्मा की छाया) की उत्पत्ति !!!

भगवान् श्री कृष्ण कहते हैं,


अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च ।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ॥
यह आत्मा न कटनेवाला, न जलनेवाला, न गलनेवाला और न सूखनेवाला है। 

आपस में एक दूसरे का नाश कर देने वाले पंचभूत इस आत्मा का नाश करने के लिए समर्थ नहीं है। 
इसलिए यह नित्य है। नित्य होने से सर्वगत है। सर्वव्यापी होने से स्थाणु (ठूँठ) की भाँति स्थिर है। 
स्थिर होने से यह आत्मा अचल है और इसीलिए सनातन है। 
अर्थात किसी कारण से नया उत्पन्न नहीं हुआ है। पुराना है।