शुक्रवार, 7 अगस्त 2015

आदरणीय बंधुओ नमस्कार ।

आदरणीय बंधुओ
नमस्कार ।


इस बार फिर प्रेम का धागा चाइनीज न बन जाए। यह रक्षाबंधन जो कभी राष्ट्र को एक करने में महत्ती भूमिका निभाते आया है ,चाइना के चक्कर में राष्ट्र घात क न बन जाये।

संकल्प दिलाना होगा प्यारी बहना को कि तूँ बांध दे एक कच्चा धागा मेरी कलाई पर, 

परन्तु.. यह चमचमाता चाइनीज धागा मेरी भारत माँ का गलफांस न बन जाये।

स्वदेशी रक्षाबंधन को स्वदेशी ही रहने ने,चाइना ने इस बार रक्षा बंधन पर भारत में बीस हजार करोड़ रुपये का सामान उतारा है। हमारा असली रक्षाबंधन मनाने का एक अवसर हमारे सामने आया है।
संकल्प करे कि चाइना की राखी न तो बांधेंगे और न ही बांधने देंगे।

कृपया यह सन्देश अपनी प्यारी बहना को जरुर भेजे।

राखी से पहले हर मोबइल में यह Massage होना चाहिए ।
तब ही 15 अगस्त मनाने की सार्थकता हैं । 

स्वदेशी नहीं तो कैसा देशप्रेम और देशप्रेम नहीं तो कैसा स्वतंत्रता दिवस ।।

शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

प्राण"(आत्मा की छाया) की उत्पत्ति

"प्राण"(आत्मा की छाया) की उत्पत्ति !!!

भगवान् श्री कृष्ण कहते हैं,


अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च ।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ॥
यह आत्मा न कटनेवाला, न जलनेवाला, न गलनेवाला और न सूखनेवाला है। 

आपस में एक दूसरे का नाश कर देने वाले पंचभूत इस आत्मा का नाश करने के लिए समर्थ नहीं है। 
इसलिए यह नित्य है। नित्य होने से सर्वगत है। सर्वव्यापी होने से स्थाणु (ठूँठ) की भाँति स्थिर है। 
स्थिर होने से यह आत्मा अचल है और इसीलिए सनातन है। 
अर्थात किसी कारण से नया उत्पन्न नहीं हुआ है। पुराना है।

ये महीना आपके जीवन मेँ मंगलमय साबित हो

ऊँनमः शिवाय नाशिक तंमबकशवेर नमः 
बृहमा विशणु मेहस गोदावरी कुंभ नमः कुंड कुुसावेर नमः
सभी प्रिय मित्रोँ को श्रावण महीना प्रारंभ होने की 
बहुत बहुत हार्दिक बधाई ये महीना आपके जीवन मेँ मंगलमय साबित हो

आज का दिनाँक 01 अगस्त 2015

आज का दिनाँक 01 अगस्त 2015
दिन - शनिवार
विक्रम संवत 2072
शक संवत 1937
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - वर्षा
मास - श्रावण
पक्ष - कृष्णपक्ष
तिथि - एकम
नक्षत्र - श्रवण
योग - आयुष्मान
दिशाशूल - पूर्व दिशा में
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मनुष्य का सर्वोच्च ध्येय प्रभु का निःस्वार्थ प्रेम होना चाहिये। 

उसमे तनिक भी संदेह नही होना चाहिये।

गुरुवार, 30 जुलाई 2015

आज 31जुलाई,को गुरु पूर्णिमा पर्व है...
समस्त स्नेही मित्रो को ‪गुरु_पूर्णिमा‬ पर्व की हार्दिक शुभकामनायें |
'गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णु र्गुरूदेवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥'
गुरु को अपनी महत्ता के कारण ईश्वर से भी ऊँचा पद दिया गया है।
शास्त्र वाक्य में ही गुरु को ही ईश्वर के विभिन्न रूपों-
ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। .
गुरू गोविंद दोउ खडे, काके लागूं पाँय।
बलिहारी गुरू आपने, गोविंद दियो मिलाय॥
सभी को सुप्रभात और
गुरू पूर्णिमा पर शुभकामनाएं
साहस शील ह्रदय मेँ भर दे, जीवन त्याग तपोमय कर दे,
संयम,सत्य,स्नेह का वर दे, स्वाभिमान भर दे ।
अम्ब विमल मति दे ॥
हे हंस वाहिनी,ज्ञानदायिनी ।
अम्ब विमल मति दे ।

आप सबको गुरुपूर्णिमा की शुभकामनाये

#‎गुरुपूर्णिमा_की_शुभकामनाये‬ 
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आज "गुरुपूर्णिमा" है ..और हम सब के कोई न कोई गुरु अवश्य होते है
जीवन में ..चाहे वो ईश्वर के रूप में हो ,
या स्कूल केअध्यापक के रूप में हो या
फिर हमारे माता -पिता ही क्यों न हो ...
कभी कभी आश्चर्यजनक रूप से ,
हमारे मित्र, हमारे भाई - बहन , हमारे बच्चे ,
हमारे प्रेमी -- प्रेमिकाये भी गुरु के रूप में
हमें कोई न कोई जीवन का मन्त्र दे जाते है ..
तो आईये , हम इस पावन दिन को अपने अपने तरीके से
अपने गुरु श्री को एक छोटा सा धन्यवाद बोल कर मनाये ,
आपके जीवन को सुखी बनाये ,

आप सबको गुरुपूर्णिमा की शुभकामनाये !!!