शनिवार, 25 सितंबर 2021

उत्तराखंडः 5 साल की बहन के साथ 6 महीने तक रेप करता रहा 32 साल का सौतेला भाई, कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

विनिता कुमार, पिथौरागढ़ उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में शुक्रवार को जिला फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 5 साल की बच्ची के साथ 6 माह तक दुष्कर्म करने वाले सौतेले भाई को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी से पीड़िता को 7 लाख रुपये का मुआवजा भी देने को कहा है। जानकारी के अनुसार बीते अप्रैल में नेपाल मूल का रहने वाला जनक बहादुर अपने दो नाबालिग बच्चों और 5 साल की सौतेली बहन के साथ जाजरदेवल थाना क्षेत्र में रह रहा था। नाबालिग बच्चों ने बताया कि लगभग 32 साल का जनक बहादुर अपनी सौतेली बहन को कई बार मारता-पीटता था। इसकी जानकारी जाजरदेवल थाने में पहुंची। पुलिस ने मामला संवेदनशील होता देख आरोपी जनक बहादुर को गिरफ्तार कर लिया। उसके दो नाबालिग बच्चों और पीड़ित को अपने संरक्षण में लिया। 4 अप्रैल को बच्ची को एक संस्था के संरक्षण में दे दिया गया, जिसके बाद में पीड़ित बच्ची ने संस्था के सदस्यों को अपने साथ हुए दुष्कर्म के बारे में बताया। पीड़ित बच्ची ने बताया कि उसके माता-पिता का निधन हो गया था। वह अपने सौतेले भाई जनक बहादुर के साथ रह रही थी। जनक बहादुर 6 माह से उसके साथ लगातार दुष्कर्म कर रहा था। पुलिस ने चिकित्सकीय परीक्षण करवाया तो बच्ची के शरीर में कई गंभीर घाव भी मिले। पुलिस ने मामले पर गम्भीरता बरतते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो-आईपीसी की धारा 376, 323 सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत और विशेष लोक अभियोजन प्रेम सिंह भंडारी ने पैरवी करते हुए संबंधित गवाहों को पेश किया। दोनों पक्षों और गवाहों को सुनते हुए विशेष न्यायाधीश पॉक्सो डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने जनक बहादुर को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाते हुए कहा कि सौतेला भाई जिस तरह के कृत्य कर रहा था वह क्षमा योग्य नहीं है। न्यायालय ने पीड़ित बच्ची के भरण पोषण और भविष्य को देखते हुए 7 लाख रुपए की धनराशि मुआवजे के रूप में देने के आदेश भी दिए।


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जनसंख्या में तेज वृद्धि के चलते हो रहा है जनसांख्यिकीय परिवर्तन, उत्तराखंड सरकार की चेतावनी

देहरादून, 25 सितंबर (भाषा) उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि जनसंख्या में तेज वृद्धि से राज्य के कुछ क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप उन स्थानों से कई समुदायों का पलायन हो रहा है, साथ ही सांप्रदायिक शांति के लिए खतरा भी उत्पन्न हो रहा है।

सरकार ने शुक्रवार को यहां एक आधिकारिक विज्ञप्ति में इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), सभी जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) को समस्या के समाधान के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिये।

विज्ञप्ति में कहा गया है, सरकार ने अधिकारियों से सभी जिलों में समितियों का गठन करने को कहा जो इस मुद्दे के समाधान के लिए प्रशासन को सुझाव देंगी। इसके अलावा, शांति समितियों का भी गठन किया जाना चाहिए और स्थिति की समीक्षा के लिए समय-समय पर उनकी बैठकें आयोजित की जानी चाहिए। सभी जिलों में ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जानी चाहिए और वहां रहने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य के बाहर से आने वाले और इन क्षेत्रों में रहने वाले आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की सूची भी उनके मूल निवास स्थान का सत्यापन करने के बाद तैयार की जानी चाहिए। जिलाधिकारियों (डीएम) को ऐसे क्षेत्रों में अवैध भूमि सौदों पर नजर रखने और यह देखने के लिए कहा गया है कि लोग डर या दबाव में अपनी जमीन न बेचें। जाली पहचानपत्र या मतदाता पहचानपत्र प्राप्त करने वाले विदेशी मूल के लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि ऐसे लोगों का रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए और कानूनी प्रावधानों के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

ये निर्देश भाजपा नेता अजेंद्र अजय द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को हाल ही में लिखे गए एक पत्र के बाद आये हैं जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि एक विशेष समुदाय के लोग न केवल अपने उपासना स्थल बना रहे हैं, बल्कि कुछ क्षेत्रों में थोक में जमीन भी खरीद रहे हैं जिससे राज्य के मूल निवासियों का पलायन हो रहा है। भाजपा नेता द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने के बाद गृह विभाग को मामले को देखने के लिए कहा गया था।



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शुक्रवार, 24 सितंबर 2021

Akhil Bharatiya Akhara Parishad: ABAP में नरेंद्र गिरी के बाद कौन बनेगा अध्यक्ष? कठिन टास्क बना चुनाव, प्रमुख अखाड़ों ने बनाई दूरी

हरिद्वार अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी खोजना शीर्ष संस्था के लिए एक कठिन काम होगा। तीन प्रमुख अखाड़े इस पद के चुनाव में मतदान से परहेज करेंगे। अब तक, 13 अखाड़ों में से प्रत्येक के दो प्रतिनिधियों ने परिषद अध्यक्ष की चयन प्रक्रिया में भाग लिया था, लेकिन बैरागियों ने अखाड़ा परिषद से खुद को दूर कर लिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया इस पर अनिश्चितता बनी हुई है। नरेंद्र गिरी पर लगाए थे आरोप बैरागी वैष्णव अखाड़ोंनमें निर्मोही, दिगंबर और निर्वाण अखाड़े शामिल हैं। उन्होंने इस साल हरिद्वार कुंभ में अपने स्वयं के परिषद की घोषणा की थी। अखाड़े नरेंद्र गिरी से नाराज थे और उन्होंने आरोप लगाया था कि वह उनके साथ भेदभाव कर रहे हैं। बलबीर गिरि को बनाया बाघंबरी मठ का महंत गिरि ABAP के अध्यक्ष थे, उनका शव 20 सितंबर को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित बाघंबरी मठ में लटका हुआ पाया गया था। महंत ने कथित रूप से सुइसाइड नोट में कहा कि उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने इस नोट में अपने शिष्य आनंदर गिरि पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया है। नोट में यह भी कहा गया कि बलबीर गिरि को बाघंबरी मठ के महंत के रूप में वह अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करते हैं। एबीएपी अध्यक्ष का पद निर्वाचित पद होता है। संतों ने पहले टीओआई को बताया था कि एबीएपी के उपाध्यक्ष निर्मल अखाड़े के महंत देवेंद्र शास्त्री पद के चुनाव होने तक कार्यवाहक अध्यक्ष होंगे। लेकिन कब होगा, यह अभी तक तय नहीं है। प्रयागराज कुंभ 2024 से पहले होगा चुनाव संतों ने कहा कि ABAP की प्रमुख भूमिका कुंभ व्यवस्था की देखभाल करना है। निरंजनी अखाड़ा के सचिव स्वामी रवींद्र पुरी ने कहा कि चुनावों पर अभी तक कोई सहमति नहीं बनी है, लेकिन चूंकि प्रयागराज कुंभ जनवरी 2024 में होना है, इसलिए चुनाव कराने के लिए बहुत समय है। 'बैरागी खेमा लौटेगा या नहीं, समय बताएगा' बैरागी खेमे के संतों ने इस साल की शुरुआत में अखिल भारतीय वैष्णा अखाड़ा परिषद का गठन किया था। उन्होंने कहा कि समय तय करेगा कि वे एबीएपी में वापस आएंगे या नहीं। रवींद्र पुरी अध्यक्ष बने तो... एक महंत ने बताया कि महानिरवाणी अखाड़े के रवींद्र पुरी के अध्यक्ष पद की दौड़ में होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वह एक मजबूत दावेदार है और बैरागियों के साथ अच्छे संबंध हैं। अगर बैरागी अखाड़ा एबीएपी में लौटता है और यदि रवींद्र पुरी अध्यक्ष बनते हैं, तो महासचिव का पद बैरागी अखाड़ों के पास जा सकता है।


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Uttarakhand news: भड़क सकता है सांप्रदायिक दंगा? उत्तराखंड में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जारी किया अलर्ट

देहरादून भाजपा सदस्य अजेंद्र अजय ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने पहाड़ी और पूजा स्थालों में एक खास समुदाय के जमीन खरीदने पर आपत्ति की थी। उन्होंने इस जमीन खरीद को भूमि जिहाद करार दिया था। अब उत्तराखंड सरकार का एक पत्राचार सामने आया है। शुक्रवार को एक आधिकारिक संचार में, कहा गया है, यह उसके संज्ञान में आया है कि राज्य के कुछ क्षेत्रों में तेजी से जनसंख्या वृद्धि के कारण जनसांख्यिकीय बदलाव आया है, जिसका दुष्परिणाम कुछ समुदायों के लोगों के प्रवास के रूप में दिखना शुरू हो गया था। सरकार ने जाहिर की चिंता आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है, 'कुछ जगहों पर सांप्रदायिक माहौल खराब होने की आशंका है। सरकार ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए डीजीपी, सभी जिलाधिकारियों और एसएसपी को समस्या के समाधान के लिए एहतियाती कदम उठाने का निर्देश दिया है। आपराधिक इतिहास वालों की बनेगी सूची विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में शांति समितियों के गठन का आह्वान किया है। पुलिस और जिला अधिकारियों को ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित करने और असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। उन्हें उन लोगों की जिलेवार सूची तैयार करने को भी कहा गया है जो दूसरे राज्यों से आए हैं और जिनका आपराधिक इतिहास है।


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Kedarnath Dham: ई-पास के बिना बाबा केदारनाथ दर्शन के अनुमति नहीं, वापस लौटे श्रद्धालु हुए मायूस

रजनीश कुमार, रुद्रप्रयाग बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए बिना ई-पास के पहुंचे सात सौ से अधिक यात्रियों को पुलिस और जिला प्रशासन ने बीच रास्ते से वापस लौटाया। बाबा के दर्शन न कर पाने से श्रद्धालु मायूस हो गए। नियमानुसार, प्रतिदिन 800 श्रद्धालुओं को ही ई-पास की अनिवार्यता के साथ बाबा केदारनाथ के दर्शन करने की अनुमति दी जा रही है। उत्तराखंड में बाबा केदारनाथ धाम की यात्रा करने के लिए बिना ई-पास के पहुंच रहे यात्रियों को प्रशासन और पुलिस बाबा केदारनाथ के दर्शन कराये बगैर ही बैरंग वापस लौटाया जा रहा है। ऐसे में यात्रियों को मायूस होना पड़ रहा है। प्रशासन के अनुसार, अभी तक बिना ई-पास के केदारनाथ पहुंच रहे 684 और गलत ई-पास के 35 यात्रियों को अलग-अलग चैक पोस्टों से वापस लौटाया गया है। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद बीते 18 सितम्बर से उत्तराखंड राज्य की चारधाम यात्रा शुरू की गई है। उत्तराखंड सरकार की ओर से जारी एसओपी और देवस्थानम बोर्ड उत्तराखंड द्वारा निर्धारित ई-पास की अनिवार्यता के साथ ही केदारनाथ यात्रा का संचालन किया जा रहा है। यात्रियों का कहना है कि उन्हें अभी तक ई-पास के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी। जबकि अधिकांश यात्री ई-पास को सही तरीके से नहीं भर पा रहे हैं। यात्रियों का आरोप है कि उनके पास कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट के साथ ही दोनों वैक्सीन लगाने का सर्टिफिकेट भी है। फिर भी उन्हे दर्शन करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।


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नाबालिग सौतेली बहन से दुष्कर्म करने के दोषी को मिली मौत की सजा

पिथौरागढ, 24 सितंबर (भाषा) अपनी साढे चार साल की सौतेली बहन से दुष्कर्म करने के दोषी व्यक्ति को यहां की एक स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

सरकारी अधिवक्ता प्रमोद पंत ने बताया कि विशेष सत्र न्यायाधीश ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने नेपाली मजदूर जनक बहादुर को घृणित अपराध के लिए दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई।

सजा सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि यह अपराध दुर्लभतम श्रेणी का है क्योंकि साढे चार साल की पीड़ित बच्ची उत्पीड़न करने वाले व्यक्ति की सौतेली बहन थी जो अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद उसके साथ रह रही थी।

पंत ने बताया कि यह मामला इस साल अप्रैल में तब सामने आया जब पीड़िता ने घर से भागकर पड़ोस में रहने वाली एक महिला के घर शरण ली और उसे आपबीती सुनाई। महिला ने पुलिस को फोन किया जिसके बाद बहादुर के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा-376 एबी और पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।



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Uttarakhand News: चुनाव से पहले उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, 11 फीसदी बढ़ाया राज्य कर्मचारियों का DA

करन खुराना, देहरादून विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स को एक बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने उनके वेतन में महंगाई भत्ते में 11 फीसदी की बढ़ोतरी की है। पहले सरकारी कर्मचारियों को 17 फीसदी महंगाई भत्ता दिया जाता था,अब इसको बढ़ाकर 28 फीसदी कर दिया गया है। इसे सीएम पुष्कर सिंह धामी का मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा है क्योंकि काफी समय से कोरोना महामारी के कारण फ्रीज हुए डीए को देने का अनुरोध किया जा रहा था। शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट बैठक में महंगाई भत्ता में 11 फीसदी बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है। वर्तमान में महंगाई भत्ते के तौर पर वेतन में 17 फीसदी दिया जाता था लेकिन अब सितंबर महीने की सैलरी में 28 फीसदी महंगाई भत्ता मिलेगा। साथ ही जुलाई और अगस्त का एरियर भी मिलेगा। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने नवभारत टाइम्स ऑनलाइन को बताया कि आज की बैठक में अहम फैसले लिए गए है। कोरोना महामारी के कारण महंगाई भत्ता फ्रीज कर दिया गया था लेकिन आज की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि अब सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स को 28 फीसदी महंगाई भत्ता दिया जाएगा। इस फैसले से तकरीबन 1.6 लाख कर्मचारी और 1.5 लाख पेंशनर्स को लाभ मिलेगा।


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