सोमवार, 15 जून 2015

एक भी याद नहीं आई..

सैकड़ों शिकायतें रट रखी थी, उन्हें सुनाने को, किताबों की तरह...
वो मुस्कुरा के ऐसे गले मिले कि एक भी याद नहीं आई..

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