गुरुवार, 18 जून 2015

मोती है बेटियाँ।

घर की सब चहल पहल है बेटी
जीवन में खिला कमल है बेटी।
कभी धूप गुनगुनी सुहानी ,

कभी चंदा शीतल है बेटी।
शिक्षा संस्कार रोप दो ,
फिर बेटों सी सबल है बेटी ।
सहारा दो अगर विश्वास का
तो पावन गंगा जल है बेटी।
क्यो डरते हो पैदा करने से
अरे आने वाला कल है बेटी।।

ओस की एक बूंद सी होती है बेटियाँ ,
तकलीफ हो माँ बाप को तो रोती है बेटियाँ ,
बेटा अगर है हीरा तो

मोती है बेटियाँ।।।

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