बुधवार, 21 अगस्त 2019

हेलीकॉप्टर दुर्घटना पर रावत ने दुख व्यक्त किया

देहरादून, 21 अगस्त :भाषा: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को आपदा—ग्रस्त उत्तरकाशी जिले में राहत सामग्री वाले हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने पर दुख व्यक्त किया है । ट्विटर पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री रावत ने कहा, ‘‘हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर दुखद है । ईश्वर से मृतात्माओं की शांति तथा उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं ।’’ आपदा ग्रस्त उत्तरकाशी जिले में बचाव और राहत कार्यों में लगे हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से उसके पायलट समेत उसमें सवार तीनों व्यक्तियों की मौत हो गयी ।


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आपदा-ग्रस्त उत्तरकाशी में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, पायलट समेत तीन की मौत

देहरादून, 21 अगस्त :भाषा: उत्तराखंड के आपदाग्रस्त उत्तरकाशी जिले में बचाव और राहत कार्यों में लगे एक हेलीकॉप्टर के बुधवार को मोल्डी के निकट दुर्घटनग्रस्त होने से उसमें सवार एक पायलट समेत सभी तीन व्यक्तियों की मौत हो गयी । प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) अशोक कुमार ने बताया कि निजी कंपनी का यह हेलीकॉप्टर राहत सामग्री लेकर आपदा प्रभावित क्षेत्र मोरी में एक गांव से दूसरे गांव जा रहा था कि तभी वह मोल्डी गांव के पास तारों में उलझकर क्रैश हो गया । उन्होंने बताया कि इस दुर्घटना में पायलट, सह—पायलट और एक स्थानीय व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गयी । उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र में गत रविवार को बादल फटने और लगातार भारी बारिश से हुए भूस्खलन की घटनाओं में 70 किलोमीटर क्षेत्र के कुल 51 गांव प्रभावित हुए तथा कई भवन ढह गये जिसमें 15 व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी । इन घटनाओं में छह अन्य व्यक्ति लापता भी हो गये । आठ अन्य व्यक्ति इनमें घायल भी हुए हैं जिनका प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है ।


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आपदा-ग्रस्त उत्तरकाशी में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त

देहरादून, 21 अगस्त :भाषा: उत्तराखंड के आपदाग्रस्त उत्तरकाशी जिले में बचाव और राहत कार्यों में लगा एक हेलीकॉप्टर मोल्डी के निकट दुर्घटनग्रस्त हो गया । उत्तरकाशी के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि हेलीकॉप्टर में तीन व्यक्ति सवार थे और वह प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री वितरित कर वापस लौट रहा था । उन्होंने बताया, ‘‘शुरूआती सूचना के अनुसार, हेलीकॉप्टर ज्यादा उंचाई पर दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुआ इसलिए उसमें सवार लोग सुरक्षित होने चाहिए ।’’ पटवाल ने बताया कि हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के समय उसमें केवल चालक दल के सदस्य ही थे । जिले के मोरी क्षेत्र में गत रविवार को बादल फटने और लगातार भारी बारिश से हुए भूस्खलन की घटनाओं में कई गांव प्रभावित हुए और मकान ढह गये जिसमें 15 व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी थी।


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उत्तरकाशीः राहत कार्य में लगा हेलिकॉप्टर बिजली के तारों में फंसकर हुआ क्रैश

उत्तरकाशी के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य में लगा एक हेलिकॉप्टर बुधवार को क्रैश हो गया। बताया जा रहा है कि राहत सामग्री लेकर जा रहा यह हेलिकॉप्टर बिजली के तारों में उलझ गया और फिर क्रैश हो गया। सूचना पाकर मौके पर कई अधिकारी पहुंचे हैं। उत्तरकाशी इलाके के मोरी ब्लॉक में राहत कार्य के लिए तीन हेलिकॉप्टर लगाए गए थे। इन हेलिकॉप्टर से राहत सामग्री पहुंचाने का काम चल रहा था। अधिकारियों ने बताया कि हेलिकॉप्टर से पीने का पानी और खाने के पैकेट्स बाढ़ प्रभावित इलकों में भेजे गए थे। मंगलवार को तीन हेलिकॉपटर्स को इस काम में लगाया गया था। बुधवार को भी तीनों हेलिकॉप्टरों से राहत कार्य जारी रखा गया। सुबह हेलिकॉप्टर राहत सामग्री लेकर देहरादून से उत्तरकाशी के मोरी के लिए निकला। इस दौरान वह बिजली के तारों में फंस गया और क्रैश हो गया। आपोक बता दें कि उत्तराखंड में बीते कई दिनों से लगातार बारिश हो रही है। टेहरी और गढ़वाल जैसे इलाकों में टेहरी धान लेक का जल स्तर 813.65 मीटर पहुंच गया है।


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मंगलवार, 20 अगस्त 2019

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया

देहरादून, 20 अगस्त (भाषा) उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लॉक में बादल फटने और भूस्खलन से मची तबाही के बाद मंगलवार को प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य में तेजी आयी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। बाद में मुख्यमंत्री रावत ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘रविवार तड़के आयी इस आपदा में 15 लोग मारे गये हैं और छह अन्य अब भी लापता हैं। आपदा में आठ लोग घायल भी हुए हैं जिनका प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में उपचार किया जा रहा है।’’ आपदा की विभीषिका का वर्णन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘70 किलोमीटर के क्षेत्र में कुल 51 गांव इससे प्रभावित हुए हैं जिसमें करीब 130 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।’’ मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजन को चार—चार लाख रुपये का मुआवजा देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा, ‘‘आपदा में 17 भवन पूर्ण रूप से तथा 115 भवन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा चार पुल और 14 किलोमीटर की विद्युत लाइन भी टूट गयी हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से राहत और बचाव कार्य में तेजी आयी है। इन हेलीकॉप्टरों की मदद से खाने के 2000 पैकेट, 1000 किलो आटा, दाल, चावल और 5000 लीटर पेयजल, कंबल, टेंट, दवाइयां आदि प्रभावित क्षेत्रों में भेजी गयी हैं।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘बचाव और राहत कार्यों में तेजी लाने के लिये क्षेत्र में 10 हेलीपैड बनाये गये हैं। भारतीय वायु सेना और नागरिक उड्डयन के चार हेलीकॉप्टर बचाव और राहत कार्यों के लिये उपलब्ध हैं।’’ रावत ने बताया कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आइटीबीपी, वन विभाग, आपदा खोज एवं बचाव दल के 300 कर्मी खोज, बचाव और राहत कार्यों में लगे हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की चार टीमें भी क्षेत्र में कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने बताया, ‘‘राहत कार्यों के लिये आराकोट को आधार शिविर बनाया गया है। आराकोट के समीप तीन आपदा राहत केंद्र संचालित किये जा रहे हैं जिनमें लगभग 300 आपदा पीड़ितों के भोजन की व्यवस्था की गयी है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र की जनता ने सरकार द्वारा चलाये जा रहे बचाव और राहत कार्यों पर संतोष जाहिर किया है। रावत ने कहा, ‘‘राज्य सरकार के पास आपदा राहत के लिये 320 करोड़ रुपये उपलब्ध है और राज्य को अभी किसी पैकेज की जरूरत नहीं है और अगर पैकेज की जरूरत हुई तो केंद्र से मदद मांगने के बारे में विचार किया जायेगा।’’ मुख्यमंत्री ने बताया कि सोमवार शाम को उन्होंने नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की, जिसमें गृह मंत्री ने उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। 18 अगस्त को तड़के बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं में आराकोट, माकुडी, मोल्डा, सनेल, टिकोची, नगवारा, मलाना, कलीच, जोटरी, डगोली, बरनाली, थापलि, बलावट, चिवा और द्विचाणु सहित अनेक गांव प्रभावित हुए। उन्होंने बताया कि इस साल 15 जून से लेकर अब तक की मानसून अवधि में प्रदेश में घटित आपदाओं में 59 व्यक्ति मारे गये हैं, 55 व्यक्ति घायल हुए हैं और 12 लापता हैं। इसके अतिरिक्त 134 आवासीय भवन आंशिक एवं 115 पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।


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आईटीबीपी में भर्ती के लिये आये युवक की मौत, मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश

नैनीताल, 20 अगस्त (भाषा) उत्तराखंड में नैनीताल जिले के हल्द्वानी में भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में भर्ती के लिये आये एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत मामले की मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिये है। घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री रावत ने नैनीताल के जिलाधिकारी को युवक की मृत्यु की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिये हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उधमसिंह नगर जिले के नानकमत्ता का रहने वाला सूरज सक्सेना आईटीबीपी में भर्ती के लिये 16 अगस्त को हल्द्वानी आया था लेकिन घर नहीं लौटा। इसके बाद उसके परिजनों ने उसकी तलाश करना शुरू की तो उसका शव कल आईटीबीपी के हल्द्वानी स्थित कैंपस की बाड़ के बाहर पडा मिला। युवक के परिजनों का आरोप है कि आईटीबीपी के जवानों ने उसे कथित तौर पर पीटा और उसकी हत्या कर दी। क्षेत्र के ग्रामीण भी इस घटना को लेकर आक्रोशित हो गये और उन्होंने युवक के परिजनों के साथ दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर नानकमत्ता से लेकर लालकुंआ तक विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का दावा है कि पीड़ित युवक और आईटीबीपी के कैडेटस के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गयी जिसके बाद युवक गायब हो गया और घटना के तीन दिन बाद उसका शव बरामद हुआ। इस बीच देहरादून में जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री रावत ने नैनीताल के जिलाधिकारी डा.सविन बंसल को इस घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिये हैं। बंसल ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), नैनीताल को जांच अधिकारी नामित कर दिया है।


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उत्तरकाशी के आपदा ग्रस्त क्षेत्र में बचाव और राहत कार्य जारी

देहरादून, 20 अगस्त :भाषा: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लॉक में दो दिन पहले बादल फटने और भूस्खलन से मची तबाही वाले क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्य मंगलवार को भी जारी रहा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया । इस बीच, राज्य आपदा मोचन बल :एसडीआरएफ: की बचाव और राहत टीमों ने माकुडी गांव से एक और शव बरामद किया है। मृतक का नाम लाल बहादुर :60: है और वह नेपाल का मूल निवासी बताया जा रहा है । इसके साथ ही आपदाग्रस्त क्षेत्रों में मरने वालों की संख्या 13 हो गयी । चार अन्य लोग अभी भी लापता है । अभी तक माकुडी से सात, आराकोट से चार और टिकोची और सनेल से एक—एक शव मिले हैं । 18 अगस्त को तड़के बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं में आराकोट, माकुडी, मोल्डा, सनेल, टिकोची और द्विचाणु में कई मकान ढह गये थे । एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री रावत ने आज आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर वहां स्थिति का जायजा लिया । वह उन क्षेत्रों में भी गये जहां प्रभावित लोगों को ठहराया गया है । उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनकी हरसंभव मदद करेगी । सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों के माध्यम से खाने के पैकेट, कंबल, दवाइयां और पीने का स्वच्छ पानी आपदाग्रस्त क्षेत्रों में पहुंचाया गया । मौसम साफ होने के साथ ही बचाव दल आराकोट से टिकोच, डोचांग, माकुडी एवं चीवा के लिये रवाना हो गये हैं जबकि हेलीकाप्टर से प्रभावित क्षेत्रों के लिये एक मेडिकल टीम भी भेजी गयी है । एसडीआरएफ द्वारा आराकोट तथा अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भोजन शिविर लगाये जा रहे हैं। जिन स्थानों के मार्ग अवरूद्ध हैं, उन स्थानों से संपर्क स्थापित करने के लिये वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की जा रही है । चीवा क्षेत्र में एक वैकल्पिक पुल का निर्माण भी शुरू कर दिया गया है जिसके लिए एसडीआरएफ के जवान मुस्तैदी से काम कर रहे हैं । कल देर शाम प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने मोरी में अतिवृष्टि से हुए जान-माल के नुकसान के संबंध में बैठक की तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में रोड कनेक्टिविटी तेजी से बहाल करने तथा क्षेत्र में ट्रॉली स्थापित करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने पेयजल विभाग को क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति शीघ्र सुचारू करने को कहा । उन्होंने कहा ‘‘समय बर्बाद नहीं होने देना है और जहां तक संभव हो, सामान पहुंचा देना है ताकि पुलों अथवा ट्रॉली की व्यवस्था होते ही आगे के राहत कार्य में अधिक समय न लगे।’’ उन्होंने सभी विभागों को पूरी योजना एवं आपसी तालमेल के साथ राहत कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने मृतकों के दाह संस्कार हेतु उनके परिजनों की भावनाओं के अनुरूप व्यवस्था करने को भी कहा ।


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