Success Story: सफलता कभी सीधी लकीर नहीं होती. पूर्णिया के मशहूर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ.अंगद कुमार चौधरी की कहानी इसका जीवंत प्रमाण है. टिकापट्टी रूपौली जैसे बिजली विहीन गांव से निकलकर चिकित्सा जगत के शिखर तक पहुंचने का उनका सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. शुरुआत में डॉ.अंगद इंजीनियरिंग और सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे थे. सेना की लिखित परीक्षा पास करने के बावजूद मेडिकल अनफिट होने पर उन्हें गहरा धक्का लगा. लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था. पिता का सपना और भाई की एक जटिल सर्जरी को करीब से देखने के बाद उनकी सोच बदल गई. उन्होंने तय किया कि वह अब लोगों के हड्डियों का दर्द दूर करेंगे. किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले डॉ.अंगद पढ़ाई के साथ-साथ पिता के साथ खेतों में काम भी करते थे. 2006 में दरभंगा मेडिकल कॉलेज में चयन के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. एमसीएच पटना और कोलकाता मेडिकल कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की. वह पूर्णिया के लाइन बाजार में अपनी क्लीनिक के जरिए गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा कर रहे हैं. डॉ.अंगद की कहानी सिखाती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो असफलताएं रास्ता रोकने के बजाय एक नई और बेहतर राह की शुरुआत बन जाती हैं.
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