ताइवान आज सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा सुपरपावर बन चुका है. साल 2025 तक उसकी वैश्विक हिस्सेदारी बढ़कर 66.8 फीसदी पहुंच गई है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. दूसरी ओर, उसका पड़ोसी देश चीन कई क्षेत्रों में आगे जरूर है, लेकिन सेमीकंडक्टर बनाने के मामले में अभी भी पीछे है. भारत भी इस सेक्टर में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है, हालांकि उसे अभी लंबा रास्ता तय करना है. यह कहानी बताती है कि कैसे ताइवान एक चिप पावरहाउस बना, चीन क्यों इस दौड़ में पिछड़ गया और भारत की मौजूदा स्थिति क्या है.
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