हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले दिव्य नरेंद्र ने फेसबुक का आइडिया सबसे पहले सोचा था. फिर मार्क जुकरबर्ग के साथ उनकी मुलाकात हुई और उन्हें कोडिंग करने के लिए कहा गया. उसके बाद जुकरबर्ग ने दिव्य नरेंद्र को धोखा दिया और उनका आइडिया चुराकर अपना प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च कर दिया. मामला जब कोर्ट पहुंचा, तो जुकरबर्ग ने 65 मिलियन डॉलर देकर समझौता किया. इस मामले ने साबित कर दिया कि असल आइडिया दिव्य नरेंद्र का ही था.
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